नेपाल बाढ़: भोटेकोशी नदी की तबाही में 162 की मौत, 400 से अधिक लापता
सारांश
मुख्य बातें
नेपाल में 27 अगस्त 2025 को भोटेकोशी नदी में अचानक आई भीषण बाढ़ ने कम से कम 162 लोगों की जान ले ली है, जबकि 41 घायल विभिन्न अस्पतालों में उपचाराधीन हैं। नेपाल पुलिस ने गुरुवार सुबह इन आँकड़ों की आधिकारिक पुष्टि की। रिपोर्टों के अनुसार अभी भी 400 से अधिक लोग लापता हैं, जिनमें 28 पुलिसकर्मी भी शामिल हैं।
ज़िलेवार मृतकों का विवरण
नेपाल पुलिस द्वारा जारी आँकड़ों के अनुसार, चितवन में सर्वाधिक 64 शव बरामद हुए हैं। इसके अलावा धादिंग में 27, एनपी पूर्व क्षेत्र में 26, गोरखा में 20, नुवाकोट में 12, तनहुं में 9, तथा रसुवा और एनपी पश्चिम में 2-2 लोगों के शव मिले हैं। यह आपदा नेपाल के मध्य और पश्चिमी क्षेत्रों में एक साथ फैली, जो इसकी व्यापकता को दर्शाता है।
घायलों का उपचार और अस्पतालों पर दबाव
नेपाल पुलिस के अनुसार, 41 घायलों को काठमांडू और आसपास के अस्पतालों में भर्ती किया गया है। इनमें से 20 त्रिभुवन यूनिवर्सिटी टीचिंग हॉस्पिटल में, 9 त्रिशूली हॉस्पिटल में, 4 ट्रॉमा सेंटर में, 3 बीर हॉस्पिटल और 3 नॉर्विक हॉस्पिटल में, तथा 1-1 बीरेंद्र सैनिक हॉस्पिटल और ग्रीन सिटी हॉस्पिटल में भर्ती हैं। बड़ी संख्या में घायलों के एक साथ आने से अस्पतालों पर असाधारण दबाव बना हुआ है।
बाढ़ का स्रोत और तबाही का दायरा
बताया जा रहा है कि बुधवार सुबह करीब 9 बजे (स्थानीय समय) भोटेकोशी नदी में पानी का स्तर अचानक और तेज़ी से बढ़ा। अधिकारियों के अनुसार यह पानी तिब्बत की दिशा से आया था। नेपाल सेना ने अपने बयान में कहा कि पानी के इस अचानक उफान से रसुवा जिले के तिमुरे और स्याफ्रुबेसी इलाकों में भारी तबाही मची — वाहन, घरेलू सामान और अन्य संपत्तियाँ बह गईं। यह ऐसे समय में आया है जब नेपाल में मानसून का मौसम अपने चरम पर है।
लापता पुलिसकर्मी और संचार की बाधा
नेपाल पुलिस के अनुसार, रसुवा जिले के कई चौकियों से संपर्क अभी तक बहाल नहीं हो सका है। तिमुर में तैनात 23 में से केवल 13 कर्मचारी, रसुवागढ़ी में 9 में से 1, स्यापुर्बेँसी में 8 में से 5, मैलुंग में 8 में से 3, बेत्रावती में 10 में से 9 और हाकु में 6 में से 5 कर्मचारियों से ही संपर्क हो पाया है। संचार अवरोध बचाव अभियान को और जटिल बना रहा है।
राहत एवं बचाव की स्थिति
नेपाल सेना और पुलिस के दल प्रभावित क्षेत्रों में राहत एवं बचाव कार्य में जुटे हैं, लेकिन भूस्खलन और टूटे रास्तों के कारण दुर्गम इलाकों तक पहुँचना चुनौतीपूर्ण बना हुआ है। मृतकों की संख्या में और वृद्धि की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता, क्योंकि 400 से अधिक लापता लोगों की तलाश अभी जारी है।