26 अगस्त 2026
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नेपाल-चीन सीमा पर भीषण फ्लैश फ्लड, APF के 4 जवान लापता; 15 पनबिजली परियोजनाएं प्रभावित

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नेपाल-चीन सीमा पर भीषण फ्लैश फ्लड, APF के 4 जवान लापता; 15 पनबिजली परियोजनाएं प्रभावित

सारांश

नेपाल-चीन सीमा पर भोटेकोशी नदी में अचानक आई बाढ़ — संभवतः तिब्बत में GLOF के कारण — ने रसुवा को तहस-नहस कर दिया। APF के 4 जवान लापता, 15 पनबिजली परियोजनाएं क्षतिग्रस्त और 5 जिलों में हाई-अलर्ट जारी। यह सिर्फ प्राकृतिक आपदा नहीं — हिमालयी GLOF संकट की बढ़ती चेतावनी है।

मुख्य बातें

26 अगस्त 2026 की सुबह 9 बजे भोटेकोशी नदी में अचानक बाढ़ आई, जिसने नेपाल-चीन सीमावर्ती रसुवा क्षेत्र में भारी तबाही मचाई।
नेपाल आर्म्ड पुलिस फोर्स (APF) के 4 जवान उत्तरी रसुवा बॉर्डर आउटपोस्ट से लापता; रसुवा कस्टम्स ऑफिस के 14 कर्मचारियों से भी संपर्क नहीं (अपुष्ट)।
कुल 15 पनबिजली परियोजनाएं प्रभावित — 10 चालू , 5 निर्माणाधीन ; रसुवागढ़ी , चिलिमे , त्रिशूली-3ए/3बी सहित कई प्रमुख संयंत्र क्षतिग्रस्त।
हाइड्रोलॉजी विशेषज्ञों की आशंका — बाढ़ का कारण नेपाल में वर्षा नहीं बल्कि तिब्बत में GLOF हो सकता है; सैटेलाइट डेटा से जाँच जारी।
रसुवा , नुवाकोट , धाडिंग , गोरखा और चितवन जिलों में हाई-अलर्ट जारी; निचले इलाकों को तुरंत खाली करने का निर्देश।

भोटेकोशी नदी में 26 अगस्त 2026 की सुबह करीब 9 बजे अचानक आई विनाशकारी बाढ़ ने नेपाल-चीन सीमावर्ती क्षेत्रों में भारी तबाही मचाई, जिसके बाद उत्तरी रसुवा में बॉर्डर आउटपोस्ट पर तैनात नेपाल आर्म्ड पुलिस फोर्स (APF) के चार जवान लापता बताए जा रहे हैं। हाइड्रोलॉजी विशेषज्ञों के अनुसार, यह बाढ़ नेपाल में भारी वर्षा के कारण नहीं, बल्कि तिब्बत में ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड (GLOF) के कारण आई हो सकती है।

मुख्य घटनाक्रम

APF प्रवक्ता एवं डिप्टी इंस्पेक्टर जनरल नेत्र बहादुर कार्की ने बताया कि नेपाल-चीन सीमा के निकटवर्ती क्षेत्रों में फ्लैश फ्लड आने के बाद से चारों जवानों से संपर्क पूरी तरह टूट गया है। कार्की ने स्पष्ट किया कि बॉर्डर पोस्ट की संरचना को कोई नुकसान नहीं पहुँचा है, परंतु अधिकारी अभी यह जाँच कर रहे हैं कि लापता जवान सीधे बाढ़ से प्रभावित हुए हैं या नहीं। इसके अतिरिक्त, स्थानीय मीडिया की अपुष्ट रिपोर्टों के अनुसार रसुवा कस्टम्स ऑफिस के 14 कर्मचारियों से भी संपर्क नहीं हो पा रहा है।

तिब्बत क्षेत्र से निकलने वाली भोटेकोशी नदी का जलस्तर बुधवार सुबह अचानक तेज़ी से बढ़ा, जिससे टिमुरे मार्केट एरिया, टिमुरे कस्टम्स ऑफिस और स्याब्रुबेसी के कुछ हिस्सों में भारी क्षति की सूचना है। रसुवा में सड़कें, पनबिजली केंद्र, बिजली ट्रांसमिशन लाइनें और सब-स्टेशन बुरी तरह प्रभावित हुए हैं।

बिजली क्षेत्र पर असर

नेपाल इलेक्ट्रिसिटी अथॉरिटी के अनुसार, बाढ़ ने रसुवागढ़ी, चिलिमे, त्रिशूली-3ए और त्रिशूली-3बी पावर प्रोजेक्ट, 220 केवी त्रिशूली-3बी हब सब-स्टेशन, तथा त्रिशूली और देवीघाट पनबिजली संयंत्रों सहित कई वितरण संरचनाओं को नुकसान पहुँचाया है। प्रभावित इलाकों में बिजली आपूर्ति बाधित हो गई है और अथॉरिटी ने जल्द-से-जल्द आपूर्ति बहाल करने के प्रयास शुरू कर दिए हैं।

नेपाल के इंडिपेंडेंट पावर प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन की शुरुआती जानकारी के अनुसार, बाढ़ से कुल 15 पनबिजली परियोजनाएं प्रभावित हुई हैं — जिनमें से 10 चालू और 5 निर्माणाधीन हैं। यह आँकड़ा नेपाल की ऊर्जा अर्थव्यवस्था के लिए गंभीर चिंता का विषय है, क्योंकि देश अपनी बिजली आपूर्ति का बड़ा हिस्सा इन्हीं पनबिजली स्रोतों से प्राप्त करता है।

GLOF की आशंका और वैज्ञानिक जाँच

हाइड्रोलॉजी विशेषज्ञों ने संभावना जताई है कि यह बाढ़ तिब्बत में ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड (GLOF) के कारण आई है, न कि नेपाल में हुई भारी वर्षा के कारण। हाइड्रोलॉजी और मौसम विज्ञान विभाग के अधिकारी चीनी अधिकारियों के साथ मिलकर सैटेलाइट डेटा का विश्लेषण कर पानी के अचानक बढ़ने के सटीक कारण का पता लगाने में जुटे हैं। गौरतलब है कि हिमालयी क्षेत्र में GLOF की घटनाएँ पिछले दो दशकों में तेज़ी से बढ़ी हैं, और नेपाल-तिब्बत सीमा पर इस तरह की आपदाएँ पहले भी आ चुकी हैं।

अलर्ट और बचाव कार्य

रसुवा, नुवाकोट, धाडिंग, गोरखा और चितवन जिलों में नदी के किनारे बसे क्षेत्रों के लिए हाई-अलर्ट जारी किया गया है। अधिकारियों ने निचले इलाकों और नदी किनारे रहने वाले लोगों को तुरंत सुरक्षित एवं ऊँचे स्थानों पर जाने की सलाह दी है। पृथ्वी हाईवे और नदी किनारे के मार्गों पर अनावश्यक यात्रा से बचने का भी अनुरोध किया गया है, क्योंकि भोटेकोशी नदी आगे जाकर त्रिशूली नदी में मिलती है और नुवाकोट तथा मध्य नेपाल के अन्य जिलों की ओर बाढ़ का खतरा बना हुआ है।

जिला-स्तरीय आपदा प्रबंधन अधिकारी प्रभावित क्षेत्रों में बचाव कार्यों का समन्वय कर रहे हैं और आपातकालीन संसाधन जुटाए जा रहे हैं। स्थिति अभी भी अनिश्चित बनी हुई है और लापता जवानों एवं कर्मचारियों की खोज जारी है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जिसे नेपाल और भारत दोनों अब तक पर्याप्त गंभीरता से नहीं ले रहे। तिब्बत में ग्लेशियल झीलों की निगरानी और चीन के साथ रियल-टाइम डेटा-साझेदारी की कमी इस तरह की घटनाओं में पूर्व-चेतावनी को लगभग असंभव बना देती है। नेपाल की 15 प्रभावित पनबिजली परियोजनाएं यह भी उजागर करती हैं कि देश की ऊर्जा अर्थव्यवस्था उन्हीं नदी घाटियों पर टिकी है जो GLOF के सर्वाधिक जोखिम में हैं — और इस भेद्यता पर नीतिगत चर्चा अभी भी नदारद है।
RashtraPress
26 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नेपाल-चीन सीमा पर आई फ्लैश फ्लड का कारण क्या है?
हाइड्रोलॉजी विशेषज्ञों के अनुसार, यह बाढ़ नेपाल में भारी वर्षा के कारण नहीं, बल्कि तिब्बत में ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड (GLOF) के कारण आई हो सकती है। हाइड्रोलॉजी और मौसम विज्ञान विभाग चीनी अधिकारियों के साथ मिलकर सैटेलाइट डेटा का विश्लेषण कर सटीक कारण जानने की कोशिश कर रहा है।
APF के कितने जवान लापता हैं और उनकी खोज कहाँ हो रही है?
नेपाल आर्म्ड पुलिस फोर्स (APF) के चार जवान उत्तरी रसुवा में नेपाल-चीन सीमा के पास बॉर्डर आउटपोस्ट पर तैनात थे और बाढ़ के बाद से उनसे संपर्क नहीं हो पा रहा है। APF प्रवक्ता डिप्टी इंस्पेक्टर जनरल नेत्र बहादुर कार्की के अनुसार, अधिकारी अभी यह पता लगाने में जुटे हैं कि ये जवान सीधे बाढ़ से प्रभावित हुए हैं या नहीं।
इस बाढ़ से नेपाल की बिजली आपूर्ति पर क्या असर पड़ा है?
नेपाल इलेक्ट्रिसिटी अथॉरिटी के अनुसार, बाढ़ ने रसुवागढ़ी, चिलिमे, त्रिशूली-3ए और त्रिशूली-3बी पावर प्रोजेक्ट सहित कई प्रमुख पनबिजली संयंत्रों और सब-स्टेशनों को नुकसान पहुँचाया है। इंडिपेंडेंट पावर प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन के अनुसार कुल 15 परियोजनाएं प्रभावित हुई हैं — 10 चालू और 5 निर्माणाधीन।
किन जिलों में हाई-अलर्ट जारी किया गया है और लोगों को क्या करना चाहिए?
रसुवा, नुवाकोट, धाडिंग, गोरखा और चितवन जिलों में नदी किनारे बसे क्षेत्रों के लिए हाई-अलर्ट जारी है। निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को तुरंत सुरक्षित और ऊँचे स्थानों पर जाने और पृथ्वी हाईवे पर अनावश्यक यात्रा से बचने की सलाह दी गई है।
GLOF क्या होता है और यह नेपाल के लिए खतरनाक क्यों है?
GLOF यानी ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड तब होता है जब हिमालय में ग्लेशियर के पिघलने से बनी झीलें अचानक टूट जाती हैं और विशाल मात्रा में पानी नीचे की ओर बहता है। नेपाल की अधिकांश प्रमुख नदियाँ और पनबिजली परियोजनाएं इन्हीं ग्लेशियर-पोषित नदी घाटियों में स्थित हैं, जिससे GLOF की घटनाएँ देश की ऊर्जा और बुनियादी ढाँचे के लिए गंभीर खतरा बनती हैं।
राष्ट्र प्रेस
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