चीनी की कोई कमी नहीं: केंद्र सरकार ने दिए आंकड़े, अक्टूबर तक पर्याप्त स्टॉक का दावा
सारांश
मुख्य बातें
केंद्र सरकार ने 26 अगस्त 2026 को स्पष्ट किया कि देश में चीनी की कोई कमी नहीं है और अक्टूबर 2026 में नया पेराई सीजन शुरू होने तक घरेलू मांग को पूरा करने के लिए पर्याप्त आपूर्ति उपलब्ध है। सरकार ने एक आधिकारिक फैक्टशीट जारी कर उन दावों को सिरे से खारिज किया जिनमें एथेनॉल उत्पादन को चीनी की बढ़ती कीमतों का कारण बताया जा रहा था।
एथेनॉल और चीनी: असली तस्वीर
सरकारी फैक्टशीट के अनुसार, एथेनॉल निर्माण में उपयोग होने वाली चीनी की हिस्सेदारी 2022-23 के लगभग 12 प्रतिशत से घटकर 2025-26 में लगभग 9 प्रतिशत रह गई है। इसके अलावा, देश में उत्पादित एथेनॉल का लगभग तीन-चौथाई हिस्सा अब अनाज — विशेषकर मक्के — से आता है। यह आंकड़ा इस तर्क को कमज़ोर करता है कि एथेनॉल नीति चीनी की उपलब्धता पर दबाव डाल रही है।
कीमतों में उछाल: क्या कहते हैं आंकड़े
सरकार ने माना कि हाल के हफ्तों में खुदरा कीमतें बढ़ी हैं। 20 जुलाई 2026 को चीनी की कीमत ₹48.18 प्रति किलोग्राम थी, जो 20 अगस्त 2026 तक बढ़कर ₹55.70 प्रति किलोग्राम हो गई — यानी एक महीने में लगभग 15.6 प्रतिशत की बढ़ोतरी। हालांकि, सरकार का तर्क है कि अगस्त 2024 से जुलाई 2026 के बीच सालाना औसत वृद्धि केवल 3 प्रतिशत रही है, जो दीर्घकालिक मूल्य स्थिरता को दर्शाती है। मौजूदा उछाल को सरकार ने अल्पकालिक आपूर्ति दबाव और बाज़ार कारकों का परिणाम बताया है।
उत्पादन में कमी के कारण
मौजूदा सीजन में चीनी उत्पादन लगभग 306 लाख मीट्रिक टन (एलएमटी) रहने का अनुमान है, जबकि शुरुआती अनुमान 343 एलएमटी का था। इस कमी के पीछे दो प्रमुख कारण बताए गए हैं — रेड रॉट और टॉप बोरर जैसी फसल बीमारियाँ, और अत्यधिक वर्षा से हुआ जलभराव। त्योहारी मांग में उछाल और इंडस्ट्री के कुछ हिस्सों द्वारा सट्टेबाजी व जमाखोरी को भी कीमत वृद्धि का कारण गिनाया गया है।
वैश्विक परिदृश्य और भारत की स्थिति
सरकार ने रेखांकित किया कि चीनी की आपूर्ति में कमी केवल भारत तक सीमित नहीं है — यह एक वैश्विक घटना है। 2026-27 के लिए वैश्विक चीनी घाटे का अनुमान लगभग 33 एलएमटी लगाया गया है। अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में चीनी की कीमतें 30 जून 2026 के $474 प्रति टन से बढ़कर 20 अगस्त 2026 को $552 प्रति टन हो गई हैं — दो महीने से भी कम समय में 16 प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी। इस वैश्विक संदर्भ में भारत की घरेलू स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर बताई जा रही है।
आगे की राह
नया पेराई सीजन अक्टूबर 2026 में शुरू होने की उम्मीद है, जिससे आपूर्ति में सुधार होगा। सरकार का कहना है कि तब तक के लिए पर्याप्त स्टॉक मौजूद है। गौरतलब है कि जमाखोरी और सट्टेबाजी पर नज़र रखने के लिए प्रशासनिक सतर्कता की ज़रूरत बनी रहेगी, ताकि कृत्रिम मूल्य वृद्धि को रोका जा सके।