20 अगस्त 2026
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चीनी ₹46 से ₹65 प्रति किलो: केजरीवाल का आरोप — इथेनॉल नीति ने बिगाड़ा रसोई का बजट

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चीनी ₹46 से ₹65 प्रति किलो: केजरीवाल का आरोप — इथेनॉल नीति ने बिगाड़ा रसोई का बजट

सारांश

केजरीवाल का आरोप है कि केंद्र की इथेनॉल नीति ने 17 दिनों में चीनी को ₹46 से ₹65 प्रति किलो पहुँचा दिया। जो विदेशी मुद्रा पेट्रोलियम आयात में बचानी थी, वही अब चीनी आयात में खर्च होने का खतरा है — नीतिगत दूरदर्शिता पर बड़ा सवाल।

मुख्य बातें

अरविंद केजरीवाल ने 20 अगस्त को केंद्र सरकार की इथेनॉल नीति को चीनी महंगाई का जिम्मेदार ठहराया।
उनके दावे के अनुसार, 17 दिनों में चीनी की कीमत ₹46 से बढ़कर ₹65 प्रति किलो हो गई।
केजरीवाल ने आरोप लगाया कि भारत चीनी निर्यातक से आयातक देश बनने की कगार पर है।
इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल से वाहनों की माइलेज पर असर का भी दावा किया गया।
केजरीवाल ने सरकार से इथेनॉल नीति की समीक्षा और चीनी कीमतों पर नियंत्रण की माँग की।

आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने 20 अगस्त को केंद्र सरकार की इथेनॉल नीति को चीनी की बढ़ती कीमतों का सीधा जिम्मेदार ठहराया। उनका आरोप है कि गन्ने को इथेनॉल उत्पादन की ओर मोड़ने के फैसले के कारण महज 17 दिनों में चीनी की खुदरा कीमत लगभग ₹46 प्रति किलो से बढ़कर ₹65 प्रति किलो हो गई है — यानी करीब ₹20 प्रति किलो की उछाल। केजरीवाल ने इसे नीतिगत दूरदर्शिता की विफलता बताते हुए केंद्र सरकार से तत्काल समीक्षा की माँग की।

इथेनॉल नीति और चीनी संकट का संबंध

केजरीवाल के अनुसार, केंद्र सरकार ने पेट्रोल में इथेनॉल मिश्रण की नीति के तहत गन्ने का एक बड़ा हिस्सा इथेनॉल उत्पादन में लगाया। सरकार का तर्क था कि इससे पेट्रोलियम आयात पर विदेशी मुद्रा की बचत होगी। केजरीवाल ने कहा कि अब स्थिति यह बन गई है कि घरेलू चीनी उत्पादन में कमी को पूरा करने के लिए विदेशों से चीनी आयात करने की नौबत आ सकती है, जिससे वही विदेशी मुद्रा चीनी खरीदने में खर्च होगी जो पेट्रोलियम आयात में बचाई गई थी।

उन्होंने तर्क दिया कि भारत पहले चीनी निर्यातक देशों की अग्रिम पंक्ति में था, लेकिन अब आयात की संभावना पर विचार करने की स्थिति में पहुँच गया है। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक बाज़ार में चीनी की कीमतें भी ऊँची बनी हुई हैं।

इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल पर भी सवाल

केजरीवाल ने केवल चीनी की कीमतों तक ही अपनी आलोचना सीमित नहीं रखी। उन्होंने दावा किया कि इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल के कारण वाहन मालिकों को इंजन संबंधी दिक्कतें और माइलेज में गिरावट का सामना करना पड़ रहा है। उनके अनुसार, एक ओर वाहन चालक कथित तौर पर ईंधन की गुणवत्ता से परेशान हैं, तो दूसरी ओर आम परिवारों को रसोई में इस्तेमाल होने वाली चीनी के लिए अधिक कीमत चुकानी पड़ रही है।

नोटबंदी और कोरोना का संदर्भ

केजरीवाल ने इथेनॉल नीति की आलोचना को व्यापक संदर्भ देते हुए नोटबंदी और कोरोना महामारी के दौरान लिए गए फैसलों का भी उल्लेख किया। उनका आरोप है कि केंद्र सरकार बड़े निर्णय लेने से पहले उनके दीर्घकालिक परिणामों का पर्याप्त आकलन नहीं करती, और इसका खामियाजा अंततः आम जनता को भुगतना पड़ता है।

आम जनता पर असर

केजरीवाल ने रेखांकित किया कि चीनी की कीमतों में अचानक वृद्धि का असर केवल रसोई तक सीमित नहीं है। चाय, मिठाई, खाद्य प्रसंस्करण और छोटे कारोबारों की लागत भी इससे प्रभावित होती है, जो अंततः उपभोक्ताओं पर बोझ बढ़ाती है। उन्होंने केंद्र सरकार से चीनी की कीमतें नियंत्रित करने और इथेनॉल नीति के प्रभावों की समग्र समीक्षा करने की माँग की। गौरतलब है कि सरकार की ओर से इन आरोपों पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन आर्थिक तर्क में दम भी है — इथेनॉल डायवर्जन और चीनी उपलब्धता के बीच का व्यापार-बंद एक वास्तविक नीतिगत पहेली है जिसे कई विशेषज्ञ पहले से उठाते रहे हैं। विडंबना यह है कि विदेशी मुद्रा बचाने के लिए बनाई गई नीति यदि चीनी आयात तक पहुँचती है, तो शुद्ध लाभ शून्य या नकारात्मक हो सकता है। हालाँकि, केजरीवाल के ₹46 से ₹65 प्रति किलो के दावे की स्वतंत्र पुष्टि अभी बाकी है, और सरकार की आधिकारिक प्रतिक्रिया के बिना तस्वीर अधूरी है। मुख्यधारा की कवरेज जो चूक रही है वह यह है कि इथेनॉल मिश्रण लक्ष्य और खाद्य सुरक्षा के बीच संतुलन की कोई पारदर्शी नीतिगत समीक्षा सार्वजनिक नहीं हुई है।
RashtraPress
20 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

केजरीवाल के अनुसार चीनी इतनी महंगी क्यों हुई?
केजरीवाल का दावा है कि केंद्र सरकार ने गन्ने का बड़ा हिस्सा इथेनॉल उत्पादन की ओर मोड़ा, जिससे चीनी के लिए पर्याप्त गन्ना नहीं बचा और कीमतें बढ़ीं। उनके अनुसार 17 दिनों में चीनी ₹46 से ₹65 प्रति किलो हो गई।
इथेनॉल नीति क्या है और इसका चीनी से क्या संबंध है?
केंद्र सरकार ने पेट्रोल में इथेनॉल मिश्रण की नीति अपनाई, जिसके लिए गन्ने से इथेनॉल बनाया जाता है। इससे चीनी उत्पादन के लिए उपलब्ध गन्ने की मात्रा कम होती है, जो घरेलू चीनी आपूर्ति को प्रभावित कर सकती है।
क्या भारत को अब चीनी आयात करनी पड़ेगी?
केजरीवाल ने आरोप लगाया कि भारत, जो पहले चीनी निर्यातक देश था, अब आयात की स्थिति में पहुँच सकता है। हालाँकि, सरकार की ओर से इस दावे पर कोई आधिकारिक पुष्टि या खंडन अभी तक नहीं आया है।
इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल से वाहनों पर क्या असर पड़ता है?
केजरीवाल ने दावा किया कि इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल के कारण वाहन मालिकों को इंजन संबंधी दिक्कतें और माइलेज में गिरावट का सामना करना पड़ रहा है। यह दावा कथित तौर पर उपभोक्ताओं की शिकायतों पर आधारित है।
चीनी महंगाई का आम जनता पर क्या असर होगा?
चीनी की कीमत बढ़ने से चाय, मिठाई, खाद्य प्रसंस्करण और छोटे व्यवसायों की लागत बढ़ती है, जो अंततः उपभोक्ताओं तक पहुँचती है। केजरीवाल के अनुसार, इससे आम परिवारों का घरेलू बजट सीधे प्रभावित होता है।
राष्ट्र प्रेस
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