23 सितंबर 2026
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चीनी की कीमतें वैश्विक बाज़ार तय करता है, सरकार नहीं: गडकरी का NFCSF कार्यक्रम में बड़ा बयान

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चीनी की कीमतें वैश्विक बाज़ार तय करता है, सरकार नहीं: गडकरी का NFCSF कार्यक्रम में बड़ा बयान

सारांश

गडकरी ने NFCSF मंच से साफ कहा — चीनी की कीमतें अब सरकारें नहीं, वैश्विक बाज़ार तय करता है। ₹70/kg से ऊपर पहुँची घरेलू कीमतों के बीच उन्होंने भारत-ब्राज़ील लागत अंतर और उद्योग विविधीकरण की ज़रूरत पर ज़ोर दिया।

मुख्य बातें

नितिन गडकरी ने 22 सितंबर 2026 को NFCSF कार्यक्रम में कहा कि कृषि उत्पादों की कीमतें अब वैश्विक मांग-आपूर्ति से तय होती हैं, सरकारों से नहीं।
घरेलू बाज़ार में चीनी की खुदरा कीमत आपूर्ति कमी के कारण ₹70 प्रति किलोग्राम से ऊपर पहुँच चुकी है।
ब्राज़ील में चीनी उत्पादन लागत ₹23/kg , जबकि भारत में ₹33-34/kg — यह अंतर वैश्विक प्रतिस्पर्धा में बड़ी चुनौती है।
गडकरी ने चीनी मिलों को बायोमास, पराली-आधारित उत्पाद, ऑर्गेनिक खाद और वैल्यू एडेड उत्पादों की ओर रुख करने की सलाह दी।
राज्यों के मंत्री और उद्योग प्रतिनिधि न्यूनतम समर्थन मूल्य में बढ़ोतरी की माँग कर रहे थे, जिस पर गडकरी ने व्यावहारिक सीमाएँ गिनाईं।

केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने 22 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में स्पष्ट किया कि चीनी सहित कृषि उत्पादों की कीमतें अब मुख्य रूप से वैश्विक मांग और आपूर्ति की गतिशीलता से तय होती हैं, और मौजूदा वैश्विक आर्थिक परिवेश में किसी भी सरकार की इन कीमतों को निर्धारित करने में भूमिका काफी सीमित हो चुकी है। यह बयान उस समय आया जब घरेलू बाज़ार में चीनी की खुदरा कीमतें आपूर्ति में कमी के चलते ₹70 प्रति किलोग्राम से ऊपर जा पहुँची हैं।

कार्यक्रम की पृष्ठभूमि

नेशनल फेडरेशन ऑफ कोऑपरेटिव शुगर फैक्ट्रीज लिमिटेड (NFCSF) द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में विभिन्न राज्यों के मंत्री और उद्योग प्रतिनिधि चीनी के न्यूनतम समर्थन मूल्य में बढ़ोतरी की माँग कर रहे थे। इसी माहौल में गडकरी ने वैश्विक बाज़ार की वास्तविकताओं की ओर ध्यान दिलाते हुए प्रशासनिक मूल्य-निर्धारण की सीमाओं को रेखांकित किया।

उन्होंने कहा, 'हम अब वैश्विक अर्थव्यवस्था का हिस्सा हैं और ऐसी स्थिति में कोई भी सरकार कृषि उत्पादों की कीमतें तय नहीं कर सकती, भले ही वह ऐसा करना चाहे।' गडकरी ने यह भी जोड़ा कि व्यावहारिक परिस्थितियाँ अक्सर प्रशासनिक रूप से तय कीमतों की माँगों को लागू करना कठिन बना देती हैं।

भारत बनाम ब्राज़ील: उत्पादन लागत का अंतर

गडकरी ने भारत की प्रतिस्पर्धात्मक चुनौतियों का उल्लेख करते हुए बताया कि ब्राज़ील को बड़े पैमाने पर मशीनीकृत खेती का लाभ मिलता है, जिससे वहाँ उत्पादन लागत काफी कम रहती है। आँकड़ों के अनुसार, ब्राज़ील में चीनी उत्पादन की लागत लगभग ₹23 प्रति किलोग्राम है, जबकि भारत में यह ₹33-34 प्रति किलोग्राम के आसपास है।

गडकरी ने स्पष्ट किया कि जब ब्राज़ील में अधिशेष उत्पादन होता है, तो उसका दबाव वैश्विक बाज़ार के साथ-साथ भारतीय बाज़ार पर भी पड़ता है। यह ऐसे समय में आया है जब भारत स्वयं को वैश्विक चीनी निर्यात में एक प्रमुख खिलाड़ी के रूप में स्थापित करने की कोशिश कर रहा है।

किसानों की आय और कृषि विविधीकरण

गडकरी ने किसानों की आर्थिक कठिनाइयों का जिक्र करते हुए कहा कि कई क्षेत्रों में किसानों की परेशानी का मूल कारण यह है कि खेती अनेक मामलों में अब आर्थिक रूप से पर्याप्त लाभदायक नहीं रही। उनके अनुसार, केवल पारंपरिक खेती पर निर्भर रहने के बजाय नवाचार और विविधीकरण को बढ़ावा देना होगा।

उन्होंने कहा कि स्थायी समाधान तभी संभव है जब कृषि से जुड़े नए आय स्रोत विकसित किए जाएँ। गौरतलब है कि भारत में गन्ना किसानों का बकाया (एफआरपी बकाया) लंबे समय से एक बड़ी समस्या रहा है, जो उद्योग की आर्थिक सेहत को सीधे प्रभावित करता है।

चीनी उद्योग के लिए विविधीकरण की सलाह

चीनी उद्योग के भविष्य पर अपनी राय रखते हुए गडकरी ने कहा कि केवल चीनी उत्पादन पर निर्भर रहना अब व्यावहारिक रणनीति नहीं है। उन्होंने चीनी मिलों और उद्योग जगत को बायोमास उपयोग, पराली-आधारित उत्पाद, ऑर्गेनिक खाद और अन्य वैल्यू एडेड उत्पादों पर अधिक ध्यान देने की सलाह दी।

उनके अनुसार, ऐसे उत्पाद चीनी मिलों और किसानों दोनों के लिए अतिरिक्त राजस्व के स्रोत बन सकते हैं और उद्योग को दीर्घकालिक स्थिरता प्रदान कर सकते हैं। यह सुझाव उस व्यापक नीतिगत दिशा के अनुरूप है जिसमें इथेनॉल मिश्रण और जैव-ऊर्जा को बढ़ावा देने पर ज़ोर दिया जा रहा है।

आगे की राह

गडकरी का यह बयान चीनी क्षेत्र में मूल्य-निर्धारण की बहस को एक नई दिशा देता है। उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि बदलते वैश्विक बाज़ार में भारतीय चीनी उद्योग को प्रतिस्पर्धी बने रहने के लिए पारंपरिक व्यवसाय मॉडल से आगे बढ़कर नवाचार और वैकल्पिक आय के अवसरों को अपनाना होगा। आने वाले महीनों में न्यूनतम समर्थन मूल्य की समीक्षा और इथेनॉल नीति के अगले चरण पर सरकार का रुख निर्णायक साबित होगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि केंद्र की ओर से एक स्पष्ट संकेत है कि मूल्य-समर्थन की माँगें पूरी नहीं की जाएँगी। ₹70/kg से ऊपर की कीमतें उपभोक्ताओं को चोट पहुँचा रही हैं, जबकि ₹33-34/kg की उत्पादन लागत किसानों और मिलों को दबाव में रखती है — यह दोहरा संकट किसी एक नीतिगत कदम से हल नहीं होगा। विविधीकरण और इथेनॉल की सलाह सही दिशा में है, लेकिन जब तक छोटे गन्ना किसानों तक उसका लाभ पहुँचाने का ठोस ढाँचा नहीं बनता, यह सुझाव बड़ी मिलों के हित में ज़्यादा और किसानों के हित में कम साबित हो सकता है।
RashtraPress
23 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नितिन गडकरी ने चीनी की कीमतों पर क्या कहा?
गडकरी ने 22 सितंबर 2026 को NFCSF कार्यक्रम में कहा कि चीनी सहित कृषि उत्पादों की कीमतें अब वैश्विक मांग और आपूर्ति से तय होती हैं, न कि सरकारों द्वारा। उन्होंने कहा कि वैश्वीकरण के दौर में कोई भी सरकार इन कीमतों को प्रशासनिक रूप से निर्धारित नहीं कर सकती।
भारत में चीनी की खुदरा कीमत इतनी ज़्यादा क्यों है?
आपूर्ति में कमी के कारण भारत में चीनी की खुदरा कीमत ₹70 प्रति किलोग्राम से ऊपर पहुँच चुकी है। इसके साथ ही ब्राज़ील जैसे बड़े उत्पादक देशों के उत्पादन रुझानों का भी घरेलू कीमतों पर असर पड़ता है।
भारत और ब्राज़ील में चीनी उत्पादन लागत में कितना अंतर है?
गडकरी के अनुसार, ब्राज़ील में चीनी उत्पादन लागत लगभग ₹23 प्रति किलोग्राम है, जबकि भारत में यह ₹33-34 प्रति किलोग्राम के आसपास है। ब्राज़ील की कम लागत का कारण बड़े पैमाने पर मशीनीकृत खेती है।
गडकरी ने चीनी उद्योग को क्या सलाह दी?
गडकरी ने चीनी मिलों को केवल चीनी उत्पादन पर निर्भर न रहकर बायोमास उपयोग, पराली-आधारित उत्पाद, ऑर्गेनिक खाद और अन्य वैल्यू एडेड उत्पादों पर ध्यान देने की सलाह दी। उनके अनुसार ये विकल्प किसानों और मिलों दोनों के लिए अतिरिक्त राजस्व स्रोत बन सकते हैं।
NFCSF कार्यक्रम में किसानों की आय का मुद्दा क्यों उठा?
विभिन्न राज्यों के मंत्री और उद्योग प्रतिनिधि चीनी के न्यूनतम समर्थन मूल्य में बढ़ोतरी की माँग कर रहे थे, क्योंकि कई क्षेत्रों में खेती आर्थिक रूप से पर्याप्त लाभदायक नहीं रही। गडकरी ने इसके जवाब में नवाचार और विविधीकरण को स्थायी समाधान बताया।
राष्ट्र प्रेस
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