चीनी की कोई कमी नहीं, कुछ हफ्तों में घटेंगी कीमतें: इस्मा का भरोसा
सारांश
मुख्य बातें
इंडियन शुगर मिल्स एसोसिएशन (इस्मा) ने 24 अगस्त को स्पष्ट किया कि भारत में चीनी की कोई वास्तविक कमी नहीं है और आने वाले 2-3 हफ्तों में खुदरा बाजार में कीमतें नरम पड़ने की उम्मीद है। उद्योग संगठन के अनुसार, हालिया मूल्य वृद्धि बाजार की धारणा, सट्टेबाजी और वैश्विक परिस्थितियों का परिणाम है — न कि आपूर्ति के किसी संरचनात्मक संकट का।
मूल्य वृद्धि के पीछे क्या कारण
इस्मा के महानिदेशक दीपक बल्लानी ने बताया कि पिछले 15 से 20 दिनों में चीनी की कीमतों में जो तेजी आई, उसके कई कारण रहे। उत्तर प्रदेश में गन्ने में लाल सड़न (रेड रॉट) रोग और समय से पहले फूल आने की वजह से पिछले वर्ष उत्पादन अपेक्षा से कम रहा, जिससे बाजार की धारणा प्रभावित हुई। इसके अलावा बाजार में सट्टेबाजी और घबराहट में की गई खरीदारी ने कीमतों को और ऊपर धकेला। वैश्विक स्तर पर चीनी की उपलब्धता में कमी के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी भाव बढ़े, जिसका असर घरेलू बाजार पर पड़ा।
बल्लानी ने कहा, 'कीमतों में पहले से ही नरमी के संकेत दिखाई देने लगे हैं। हमें उम्मीद है कि आने वाले समय में इसका प्रभाव खुदरा बाजार पर भी पड़ेगा और उपभोक्ताओं को राहत मिलेगी।'
उत्पादन और भंडार की स्थिति
इस्मा के अध्यक्ष नीरज शिरगांवकर ने बताया कि 2025-26 सीजन में देश का कुल शुद्ध चीनी उत्पादन लगभग 279 लाख टन रहने का अनुमान है। सीजन के अंत में करीब 35 लाख टन का क्लोजिंग स्टॉक उपलब्ध रहने की उम्मीद है, जो घरेलू मांग के मुकाबले एक मजबूत बफर है। दक्षिण कर्नाटक और तमिलनाडु में विशेष पेराई सीजन जारी रहने से उत्पादन में अतिरिक्त योगदान मिल रहा है।
शिरगांवकर ने कहा, 'सीजन शुरू होने तक देश में चीनी का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है। इसलिए, इस नजरिए से हमें पूरा भरोसा है कि मांग को पूरा करने के लिए हमारे पास काफ़ी स्टॉक होगा। सरकार द्वारा उठाए गए सभी कदमों से, हम बेहतर स्थिति में होंगे।'
इथेनॉल कार्यक्रम पर स्थिति साफ
इस्मा के उपाध्यक्ष माधव बी. श्रीराम ने चीनी की कीमतों के लिए इथेनॉल कार्यक्रम को जिम्मेदार ठहराए जाने से असहमति जताई। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब इथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम शुरू हुआ था, तब कुल इथेनॉल आपूर्ति का करीब 80 प्रतिशत हिस्सा चीनी उद्योग से आता था, जो अब घटकर 28 प्रतिशत रह गया है। उन्होंने यह भी बताया कि सरकार की स्पष्ट नीति के अनुसार पहली प्राथमिकता घरेलू उपभोक्ताओं को चीनी उपलब्ध कराना है, दूसरी इथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम और तीसरी निर्यात।
श्रीराम ने कहा, 'हमारी चीनी मिलों और गोदामों में पर्याप्त मात्रा में स्टॉक मौजूद है। जो कमी का माहौल बनाया जा रहा है, वह वास्तविक स्थिति से पूरी तरह मेल नहीं खाता। चीनी उपलब्ध है और सरकार द्वारा उठाए गए कदमों का असर जल्द दिखाई देगा।'
उपभोक्ताओं को कब मिलेगी राहत
30 सितंबर 2025 को मौजूदा सीजन समाप्त होने तक देश में पर्याप्त चीनी उपलब्ध रहने का भरोसा इस्मा ने दिलाया है। शिरगांवकर के अनुसार, अगले 2-3 हफ्तों में जैसे ही चीनी खुदरा बाजार में पहुँचेगी, कीमतों में सुधार साफ दिखाई देगा। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार के कदमों से किसानों की आय में भी सुधार हुआ है और पिछले कुछ दिनों में बाजार में सकारात्मक बदलाव देखा गया है।