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चीनी की कोई कमी नहीं, कुछ हफ्तों में घटेंगी कीमतें: इस्मा का भरोसा

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चीनी की कोई कमी नहीं, कुछ हफ्तों में घटेंगी कीमतें: इस्मा का भरोसा

सारांश

इस्मा ने साफ कहा — भारत में चीनी की कोई वास्तविक कमी नहीं है। 279 लाख टन उत्पादन अनुमान और 35 लाख टन के बफर स्टॉक के साथ, मौजूदा कीमत वृद्धि बाजार की घबराहट और वैश्विक कारणों से है। उद्योग को 2-3 हफ्तों में खुदरा राहत का भरोसा है।

मुख्य बातें

इंडियन शुगर मिल्स एसोसिएशन ( इस्मा ) ने 24 अगस्त को पुष्टि की कि भारत में चीनी की कोई कमी नहीं है।
2025-26 सीजन में कुल शुद्ध चीनी उत्पादन लगभग 279 लाख टन रहने का अनुमान; सीजन के अंत में 35 लाख टन बफर स्टॉक।
कीमतों में तेजी के पीछे उत्तर प्रदेश में रेड रॉट रोग, बाजार में सट्टेबाजी और वैश्विक कीमतें जिम्मेदार।
इस्मा उपाध्यक्ष माधव बी.
श्रीराम ने स्पष्ट किया कि इथेनॉल की हिस्सेदारी चीनी उद्योग से घटकर 28% रह गई है, जो पहले 80% थी।
अगले 2-3 हफ्तों में खुदरा बाजार में कीमतें नरम पड़ने की उम्मीद; 30 सितंबर तक पर्याप्त आपूर्ति का भरोसा।

इंडियन शुगर मिल्स एसोसिएशन (इस्मा) ने 24 अगस्त को स्पष्ट किया कि भारत में चीनी की कोई वास्तविक कमी नहीं है और आने वाले 2-3 हफ्तों में खुदरा बाजार में कीमतें नरम पड़ने की उम्मीद है। उद्योग संगठन के अनुसार, हालिया मूल्य वृद्धि बाजार की धारणा, सट्टेबाजी और वैश्विक परिस्थितियों का परिणाम है — न कि आपूर्ति के किसी संरचनात्मक संकट का।

मूल्य वृद्धि के पीछे क्या कारण

इस्मा के महानिदेशक दीपक बल्लानी ने बताया कि पिछले 15 से 20 दिनों में चीनी की कीमतों में जो तेजी आई, उसके कई कारण रहे। उत्तर प्रदेश में गन्ने में लाल सड़न (रेड रॉट) रोग और समय से पहले फूल आने की वजह से पिछले वर्ष उत्पादन अपेक्षा से कम रहा, जिससे बाजार की धारणा प्रभावित हुई। इसके अलावा बाजार में सट्टेबाजी और घबराहट में की गई खरीदारी ने कीमतों को और ऊपर धकेला। वैश्विक स्तर पर चीनी की उपलब्धता में कमी के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी भाव बढ़े, जिसका असर घरेलू बाजार पर पड़ा।

बल्लानी ने कहा, 'कीमतों में पहले से ही नरमी के संकेत दिखाई देने लगे हैं। हमें उम्मीद है कि आने वाले समय में इसका प्रभाव खुदरा बाजार पर भी पड़ेगा और उपभोक्ताओं को राहत मिलेगी।'

उत्पादन और भंडार की स्थिति

इस्मा के अध्यक्ष नीरज शिरगांवकर ने बताया कि 2025-26 सीजन में देश का कुल शुद्ध चीनी उत्पादन लगभग 279 लाख टन रहने का अनुमान है। सीजन के अंत में करीब 35 लाख टन का क्लोजिंग स्टॉक उपलब्ध रहने की उम्मीद है, जो घरेलू मांग के मुकाबले एक मजबूत बफर है। दक्षिण कर्नाटक और तमिलनाडु में विशेष पेराई सीजन जारी रहने से उत्पादन में अतिरिक्त योगदान मिल रहा है।

शिरगांवकर ने कहा, 'सीजन शुरू होने तक देश में चीनी का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है। इसलिए, इस नजरिए से हमें पूरा भरोसा है कि मांग को पूरा करने के लिए हमारे पास काफ़ी स्टॉक होगा। सरकार द्वारा उठाए गए सभी कदमों से, हम बेहतर स्थिति में होंगे।'

इथेनॉल कार्यक्रम पर स्थिति साफ

इस्मा के उपाध्यक्ष माधव बी. श्रीराम ने चीनी की कीमतों के लिए इथेनॉल कार्यक्रम को जिम्मेदार ठहराए जाने से असहमति जताई। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब इथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम शुरू हुआ था, तब कुल इथेनॉल आपूर्ति का करीब 80 प्रतिशत हिस्सा चीनी उद्योग से आता था, जो अब घटकर 28 प्रतिशत रह गया है। उन्होंने यह भी बताया कि सरकार की स्पष्ट नीति के अनुसार पहली प्राथमिकता घरेलू उपभोक्ताओं को चीनी उपलब्ध कराना है, दूसरी इथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम और तीसरी निर्यात।

श्रीराम ने कहा, 'हमारी चीनी मिलों और गोदामों में पर्याप्त मात्रा में स्टॉक मौजूद है। जो कमी का माहौल बनाया जा रहा है, वह वास्तविक स्थिति से पूरी तरह मेल नहीं खाता। चीनी उपलब्ध है और सरकार द्वारा उठाए गए कदमों का असर जल्द दिखाई देगा।'

उपभोक्ताओं को कब मिलेगी राहत

30 सितंबर 2025 को मौजूदा सीजन समाप्त होने तक देश में पर्याप्त चीनी उपलब्ध रहने का भरोसा इस्मा ने दिलाया है। शिरगांवकर के अनुसार, अगले 2-3 हफ्तों में जैसे ही चीनी खुदरा बाजार में पहुँचेगी, कीमतों में सुधार साफ दिखाई देगा। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार के कदमों से किसानों की आय में भी सुधार हुआ है और पिछले कुछ दिनों में बाजार में सकारात्मक बदलाव देखा गया है।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो खुदरा कीमतें इतनी तेज़ी से क्यों बढ़ीं — और उद्योग ने पहले हस्तक्षेप क्यों नहीं किया। त्योहारी सीजन से पहले घबराहट में खरीदारी और सट्टेबाजी को रोकने के लिए कोई ठोस तंत्र नज़र नहीं आता। इथेनॉल की हिस्सेदारी 80% से 28% पर आना सकारात्मक है, लेकिन इस बदलाव का श्रेय उद्योग खुद लेता है जबकि कीमत वृद्धि का दोष बाजार पर डाला जाता है — यह विरोधाभास उपभोक्ता के नजरिए से संतोषजनक नहीं है।
RashtraPress
24 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत में चीनी की कीमतें क्यों बढ़ रही हैं?
इस्मा के अनुसार, कीमतों में हालिया तेजी वास्तविक कमी के कारण नहीं, बल्कि बाजार में सट्टेबाजी, घबराहट में खरीदारी और वैश्विक कीमतों में वृद्धि के कारण है। उत्तर प्रदेश में गन्ने में रेड रॉट रोग और समय से पहले फूल आने से पिछले सीजन में उत्पादन अपेक्षा से कम रहा, जिसने बाजार की धारणा को प्रभावित किया।
2025-26 में भारत में कितनी चीनी का उत्पादन होगा?
इस्मा के अनुमान के अनुसार, 2025-26 सीजन में भारत में कुल शुद्ध चीनी उत्पादन लगभग 279 लाख टन रहेगा। सीजन के अंत में करीब 35 लाख टन का क्लोजिंग स्टॉक उपलब्ध रहने की उम्मीद है, जो घरेलू मांग के मुकाबले पर्याप्त बफर माना जा रहा है।
चीनी की कीमतें कब तक घटेंगी?
इस्मा के अध्यक्ष नीरज शिरगांवकर के अनुसार, अगले 2-3 हफ्तों में जैसे ही चीनी खुदरा बाजार में पहुँचेगी, कीमतों में सुधार दिखाई देगा। महानिदेशक दीपक बल्लानी ने भी कहा कि नरमी के संकेत पहले से दिखने लगे हैं।
क्या इथेनॉल कार्यक्रम के कारण चीनी की कमी हो रही है?
इस्मा के उपाध्यक्ष माधव बी. श्रीराम ने इस दावे को खारिज किया है। उन्होंने बताया कि कुल इथेनॉल आपूर्ति में चीनी उद्योग की हिस्सेदारी 80% से घटकर 28% रह गई है। सरकार की नीति के अनुसार पहली प्राथमिकता घरेलू उपभोक्ताओं को चीनी उपलब्ध कराना है।
मौजूदा चीनी सीजन कब तक चलेगा और स्टॉक पर्याप्त रहेगा?
मौजूदा चीनी सीजन 30 सितंबर 2025 को समाप्त होगा। इस्मा ने भरोसा दिलाया है कि सीजन के अंत तक और नए सीजन की शुरुआत तक देश में पर्याप्त चीनी स्टॉक उपलब्ध रहेगा, जिससे आपूर्ति में किसी तरह की बाधा नहीं आएगी।
राष्ट्र प्रेस
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