चीनी निर्यात रोक और एथेनॉल नीति: बिसवां मिल चेयरमैन सुधाकर शुक्ला ने किया सरकार के फैसले का समर्थन
सारांश
मुख्य बातें
सीतापुर में बिसवां चीनी मिल समिति के चेयरमैन सुधाकर शुक्ला ने 14 मई 2026 को केंद्र सरकार के उस फैसले का समर्थन किया, जिसके तहत चीनी के निर्यात पर 30 सितंबर 2026 तक अस्थायी रोक लगाई गई है। उन्होंने कहा कि मौजूदा वैश्विक अनिश्चितता और युद्ध जैसे हालात के बीच देश की अर्थव्यवस्था को प्राथमिकता देना अनिवार्य है।
वैश्विक संकट के बीच भारत की स्थिति
शुक्ला के अनुसार, इस समय पूरी दुनिया आर्थिक उथल-पुथल से जूझ रही है, लेकिन भारत की स्थिति अपेक्षाकृत स्थिर बनी हुई है। उन्होंने कहा कि 'यदि देश की आर्थिक स्थिति मजबूत रहेगी तो विकास की रफ्तार भी बनी रहेगी।' यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाएँ दबाव में हैं और कई देश मुद्रास्फीति से जूझ रहे हैं।
चीनी निर्यात रोक और एथेनॉल उत्पादन का संबंध
शुक्ला ने स्पष्ट किया कि 30 सितंबर 2026 तक चीनी निर्यात पर लगाई गई अस्थायी रोक केवल घरेलू आपूर्ति सुनिश्चित करने तक सीमित नहीं है — इसके पीछे एथेनॉल उत्पादन को बढ़ावा देने की दीर्घकालिक ऊर्जा रणनीति भी है। उनका कहना था कि अधिक एथेनॉल उत्पादन से पेट्रोल और डीजल की खपत में कमी लाई जा सकेगी, जिससे भारत ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में तेजी से आगे बढ़ेगा।
नागरिकों से ईंधन बचत की अपील
बिसवां चीनी मिल समिति के चेयरमैन ने आम नागरिकों से अनुरोध किया कि जहाँ आवश्यक न हो, वहाँ वाहनों का उपयोग सीमित रखें और ईंधन की खपत कम करें। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उस अपील का भी समर्थन किया, जिसमें देशवासियों को फिलहाल सोने की खरीद से परहेज करने की सलाह दी गई है। शुक्ला के अनुसार, इन उपायों का पालन करने से भारत की अर्थव्यवस्था को दीर्घकालिक मजबूती मिलेगी।
हालात सामान्य, सरकार सतर्क
शुक्ला ने आश्वस्त किया कि वैश्विक तनावों के बावजूद देश के भीतर किसी प्रकार का संकट नहीं है और स्थिति सामान्य बनी हुई है। उन्होंने कहा कि सरकार लगातार ऐसे नीतिगत कदम उठा रही है जो भारत को आत्मनिर्भरता की राह पर और तेज़ी से आगे ले जाएँ।