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भारत ने चीनी निर्यात पर 30 सितंबर तक पूर्ण प्रतिबंध लगाया, घरेलू कीमतें काबू में रखना लक्ष्य

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भारत ने चीनी निर्यात पर 30 सितंबर तक पूर्ण प्रतिबंध लगाया, घरेलू कीमतें काबू में रखना लक्ष्य

सारांश

भारत ने 30 सितंबर 2026 तक कच्ची, सफेद और रिफाइंड चीनी के निर्यात पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है। DGFT की अधिसूचना के तहत निर्यात श्रेणी 'प्रतिबंधित' से 'वर्जित' हो गई है। कम उत्पादन की आशंका के बीच यह कदम घरेलू कीमतें स्थिर रखने और आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है।

मुख्य बातें

केंद्र सरकार ने 14 मई 2026 को चीनी निर्यात पर 30 सितंबर 2026 तक पूर्ण प्रतिबंध लागू किया।
DGFT ने कच्ची चीनी, सफेद चीनी और रिफाइंड चीनी की निर्यात श्रेणी को 'प्रतिबंधित' से बदलकर 'वर्जित' किया।
इससे पहले मिलों को 15.9 लाख मीट्रिक टन चीनी निर्यात की अनुमति दी गई थी।
EU और USA को CXL और TRQ व्यवस्था के तहत निर्यात जारी रहेगा; AAS के तहत निर्यात भी FTP 2023 से नियंत्रित होगा।
गन्ना उत्पादन में साल-दर-साल लगभग 10 प्रतिशत वृद्धि, लेकिन लाभ मुख्यतः एकीकृत इथेनॉल मिलों तक सीमित।
प्रतिबंध से ब्राज़ील और थाईलैंड के लिए एशियाई-अफ्रीकी बाज़ारों में निर्यात अवसर बढ़ सकते हैं।

केंद्र सरकार ने 14 मई 2026 को चीनी निर्यात पर 30 सितंबर 2026 तक या अगले आदेश तक — जो भी पहले हो — पूर्ण प्रतिबंध लागू कर दिया है। नई दिल्ली से जारी इस फैसले का उद्देश्य कम उत्पादन की आशंका के बीच घरेलू आपूर्ति सुनिश्चित कर चीनी की कीमतों को स्थिर रखना है। दुनिया के दूसरे सबसे बड़े चीनी उत्पादक देश का यह कदम वैश्विक चीनी बाज़ार पर भी असर डालने की संभावना रखता है।

अधिसूचना में क्या कहा गया

वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) ने चीनी निर्यात नीति में संशोधन करते हुए एक आधिकारिक अधिसूचना जारी की है। इसके तहत कच्ची चीनी, सफेद चीनी और रिफाइंड चीनी के निर्यात की श्रेणी को 'प्रतिबंधित' से बदलकर 'वर्जित' कर दिया गया है — यानी अब इन तीनों किस्मों का निर्यात पूरी तरह बंद होगा।

गौरतलब है कि इससे पहले सरकार ने मिलों को लगभग 15.9 लाख मीट्रिक टन चीनी निर्यात करने की अनुमति दी थी, जब घरेलू मांग से अधिक उत्पादन की उम्मीद थी। अब उत्पादन अनुमानों में कमी आने के कारण यह अनुमति वापस ली जा रही है।

किन निर्यातों पर छूट बरकरार

हालाँकि, सरकार ने स्पष्ट किया है कि यूरोपीय संघ (EU) और संयुक्त राज्य अमेरिका (USA) को CXL और टैरिफ दर कोटा (TRQ) व्यवस्था के तहत निर्यात संबंधित सार्वजनिक अधिसूचनाओं में निर्धारित प्रक्रियाओं के अनुसार जारी रहेगा। इसके अतिरिक्त, अग्रिम प्राधिकरण योजना (AAS) के तहत चीनी निर्यात विदेश व्यापार नीति (FTP) 2023 और प्रक्रिया पुस्तिका 2023 के प्रावधानों द्वारा नियंत्रित होता रहेगा।

वैश्विक बाज़ार पर असर

भारत ब्राज़ील के बाद दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा चीनी निर्यातक देश है। इस प्रतिबंध के चलते वैश्विक स्तर पर कच्ची और सफेद चीनी की कीमतों को समर्थन मिलने की संभावना है। साथ ही, ब्राज़ील और थाईलैंड जैसे प्रतिद्वंद्वी उत्पादकों के लिए एशियाई और अफ्रीकी बाज़ारों में निर्यात के नए अवसर खुल सकते हैं।

उत्पादन की स्थिति

हाल ही में जारी एक रिपोर्ट के अनुसार, गन्ने के उत्पादन में साल-दर-साल लगभग 10 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है, जिससे चीनी और इथेनॉल इकोसिस्टम को सहारा मिला है। हालाँकि, यह वृद्धि असमान रही और मुख्य रूप से एकीकृत इथेनॉल क्षमता वाली मिलों तक ही सीमित रही — जिससे समग्र उत्पादन अनुमान अपेक्षाओं से कम रहे।

आगे क्या होगा

यह प्रतिबंध 30 सितंबर 2026 तक प्रभावी रहेगा, जब तक कि सरकार कोई नया आदेश न जारी करे। चीनी उद्योग के विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले महीनों में घरेलू उत्पादन के आँकड़ों की समीक्षा के बाद ही प्रतिबंध की अवधि बढ़ाने या हटाने पर निर्णय लिया जाएगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसके पीछे एक बड़ा सवाल है — जब सरकार ने पहले ही 15.9 लाख मीट्रिक टन निर्यात की अनुमति दी थी, तो उत्पादन अनुमान इतनी जल्दी क्यों बदले? गन्ना उत्पादन में 10 प्रतिशत वृद्धि के बावजूद यदि आपूर्ति की चिंता है, तो यह दर्शाता है कि इथेनॉल मिश्रण लक्ष्यों और खाद्य सुरक्षा के बीच संतुलन बनाना सरकार के लिए बढ़ती चुनौती है। वैश्विक बाज़ार में भारत के इस कदम से ब्राज़ील और थाईलैंड को फायदा होगा — जो दीर्घकालिक रूप से भारत की निर्यात प्रतिस्पर्धात्मकता के लिए नुकसानदेह हो सकता है।
RashtraPress
28 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत ने चीनी निर्यात पर प्रतिबंध क्यों लगाया?
कम उत्पादन की आशंका के बीच घरेलू आपूर्ति बनाए रखने और चीनी की कीमतों को नियंत्रण में रखने के लिए सरकार ने यह कदम उठाया। DGFT की अधिसूचना के अनुसार, निर्यात श्रेणी को 'प्रतिबंधित' से 'वर्जित' किया गया है।
चीनी निर्यात प्रतिबंध कब तक लागू रहेगा?
यह प्रतिबंध 30 सितंबर 2026 तक या अगले सरकारी आदेश तक — जो भी पहले हो — प्रभावी रहेगा। इसके बाद उत्पादन समीक्षा के आधार पर निर्णय लिया जाएगा।
क्या किसी देश को चीनी निर्यात में छूट मिली है?
हाँ, यूरोपीय संघ और अमेरिका को CXL और TRQ व्यवस्था के तहत निर्यात जारी रहेगा। इसके अलावा अग्रिम प्राधिकरण योजना (AAS) के तहत निर्यात FTP 2023 के प्रावधानों से नियंत्रित होगा।
इस प्रतिबंध का वैश्विक चीनी बाज़ार पर क्या असर होगा?
भारत के निर्यात बंद होने से वैश्विक कच्ची और सफेद चीनी की कीमतों को समर्थन मिलने की संभावना है। ब्राज़ील और थाईलैंड जैसे प्रतिद्वंद्वी देशों के लिए एशियाई और अफ्रीकी बाज़ारों में नए अवसर खुल सकते हैं।
भारत में गन्ना और चीनी उत्पादन की मौजूदा स्थिति क्या है?
रिपोर्टों के अनुसार, गन्ने के उत्पादन में साल-दर-साल लगभग 10 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, लेकिन यह वृद्धि असमान रही और मुख्यतः एकीकृत इथेनॉल क्षमता वाली मिलों तक सीमित रही, जिससे समग्र चीनी उत्पादन अनुमान अपेक्षाओं से कम रहे।
राष्ट्र प्रेस
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