पीएम-जय डाटा सत्यापन: यूपी में 274 चिकित्सक 7 से अधिक अस्पतालों में दर्ज, योगी सरकार ने कसी नकेल

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पीएम-जय डाटा सत्यापन: यूपी में 274 चिकित्सक 7 से अधिक अस्पतालों में दर्ज, योगी सरकार ने कसी नकेल

सारांश

उत्तर प्रदेश में पीएम-जय के तहत चलाए गए डाटा सत्यापन अभियान ने चौंकाने वाले तथ्य उजागर किए — 274 चिकित्सक 7 से अधिक और 28 चिकित्सक 15 से अधिक अस्पतालों में एक साथ दर्ज थे। योगी सरकार का यह कदम सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं में पारदर्शिता और डिजिटल जवाबदेही की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण पहल है।

मुख्य बातें

274 चिकित्सकों के नाम 7 से अधिक अस्पतालों में और 28 चिकित्सकों के नाम 15 से अधिक अस्पतालों में दर्ज पाए गए।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर पीएम-जय के तहत विशेष सत्यापन एवं सैनेटाइजेशन अभियान चलाया गया।
संबंधित चिकित्सकों और अस्पतालों को नोटिस जारी कर तीन दिवसीय सत्यापन प्रक्रिया संचालित की गई।
कई मामलों में विसंगति का कारण डाटा अपडेट न होना पाया गया, न कि सीधे फर्जीवाड़ा।
आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के तहत इलेक्ट्रॉनिक हेल्थ रिकॉर्ड (EHR) को शीघ्र लागू करने की योजना है।

उत्तर प्रदेश में प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (पीएम-जय) के तहत पंजीकृत अस्पतालों और चिकित्सकों के डाटा में बड़ी विसंगतियाँ सामने आई हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर चलाए गए विशेष सत्यापन एवं सैनेटाइजेशन अभियान में पाया गया कि 274 चिकित्सकों के नाम सात से अधिक अस्पतालों में दर्ज थे, जबकि 28 चिकित्सकों के नाम 15 से अधिक अस्पतालों से जुड़े हुए थे। इस अभियान का उद्देश्य योजना के वास्तविक लाभार्थियों तक पारदर्शी और उच्च गुणवत्ता वाली स्वास्थ्य सेवाएँ सुनिश्चित करना है।

अभियान में क्या सामने आया

राज्य स्वास्थ्य एजेंसी साचीज (SACHIS) की मुख्य कार्यकारी अधिकारी अर्चना वर्मा ने बताया कि डाटा की गहन समीक्षा के दौरान दो अलग-अलग स्थितियाँ उजागर हुईं। एक ओर ऐसे मामले मिले जहाँ चिकित्सक पहले संबंधित अस्पताल में कार्यरत थे, किंतु समय पर डाटा अपडेट न होने के कारण उनके नाम अब भी रिकॉर्ड में बने हुए थे। दूसरी ओर, कई विशेषज्ञ चिकित्सक वास्तव में एक साथ अनेक अस्पतालों में सेवाएँ दे रहे हैं।

संबंधित चिकित्सकों और अस्पतालों को नोटिस जारी किए गए और तीन दिवसीय सत्यापन प्रक्रिया संचालित की गई, जिसमें सभी पक्षों को अपना पक्ष रखने और आवश्यक अभिलेख प्रस्तुत करने का पूरा अवसर दिया गया।

दूरदराज़ क्षेत्रों में विशेषज्ञ सेवाओं की उपलब्धता

अर्चना वर्मा के अनुसार, कई विशेषज्ञ चिकित्सकों का एक साथ अनेक अस्पतालों से जुड़ा होना प्रदेश के दूरस्थ और जरूरतमंद क्षेत्रों में भी विशेषज्ञ चिकित्सा सेवाएँ सुलभ कराने में सहायक है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अभियान का उद्देश्य किसी चिकित्सक या अस्पताल को अनावश्यक रूप से परेशान करना नहीं, बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और विश्वसनीयता को सुदृढ़ बनाना है।

डिजिटल स्वास्थ्य रिकॉर्ड की ओर कदम

आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के तहत इलेक्ट्रॉनिक हेल्थ रिकॉर्ड (EHR) को तेज़ी से लागू करने की योजना है। इससे मरीज़ों का संपूर्ण चिकित्सा इतिहास डिजिटल रूप में उपलब्ध रहेगा, जिससे अस्पताल बदलने की स्थिति में बार-बार जाँच कराने की आवश्यकता कम होगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यह प्रणाली उपचार प्रक्रिया को अधिक तेज़, पारदर्शी और प्रभावी बनाएगी।

सरकार की प्राथमिकता: फर्जीवाड़े पर लगाम

योगी सरकार ने स्पष्ट किया है कि पीएम-जय के अंतर्गत फर्जीवाड़े, डाटा विसंगति और अनियमितताओं को रोकना सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसका सीधा उद्देश्य सरकारी संसाधनों का सदुपयोग सुनिश्चित करना और वास्तविक लाभार्थियों तक योजना का लाभ पहुँचाना है। गौरतलब है कि पीएम-जय देश की सबसे बड़ी सरकारी स्वास्थ्य बीमा योजना है, जिसके तहत करोड़ों गरीब परिवारों को निःशुल्क उपचार की सुविधा मिलती है।

यह कदम ऐसे समय में आया है जब देशभर में आयुष्मान भारत योजना में अनियमितताओं की शिकायतें समय-समय पर सामने आती रही हैं। उत्तर प्रदेश का यह डाटा सत्यापन अभियान अन्य राज्यों के लिए एक मॉडल बन सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

किंतु असली सवाल यह है कि इतने वर्षों तक यह विसंगतियाँ प्रणाली में बनी कैसे रहीं। यदि 274 चिकित्सक सात से अधिक अस्पतालों में दर्ज थे और इसका पता एक विशेष अभियान से चला, तो यह नियमित निगरानी तंत्र की कमज़ोरी को उजागर करता है। 'डाटा अपडेट न होना' को कारण बताना प्रशासनिक लापरवाही को नरम शब्दों में कहना है — जिसका खामियाज़ा अंततः वे गरीब मरीज़ उठाते हैं जिनके लिए यह योजना बनी है। इलेक्ट्रॉनिक हेल्थ रिकॉर्ड की घोषणा सही दिशा में है, लेकिन क्रियान्वयन की समयसीमा और जवाबदेही तंत्र स्पष्ट किए बिना यह भी एक और नीतिगत वादा बनकर रह सकती है।
RashtraPress
14 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पीएम-जय डाटा सत्यापन अभियान क्या है और यह क्यों चलाया गया?
यह उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (पीएम-जय) के तहत पंजीकृत अस्पतालों और चिकित्सकों के डाटा की सटीकता जाँचने के लिए चलाया गया विशेष अभियान है। इसका उद्देश्य फर्जीवाड़े और डाटा विसंगतियों को समाप्त कर वास्तविक लाभार्थियों तक योजना का लाभ सुनिश्चित करना है।
जाँच में कितने चिकित्सकों के नाम कई अस्पतालों में दर्ज मिले?
जाँच में पाया गया कि 274 चिकित्सकों के नाम सात से अधिक अस्पतालों में और 28 चिकित्सकों के नाम 15 से अधिक अस्पतालों में एक साथ दर्ज थे। इन सभी को नोटिस जारी कर तीन दिवसीय सत्यापन प्रक्रिया में शामिल किया गया।
क्या सभी विसंगतियाँ फर्जीवाड़े के मामले हैं?
नहीं, साचीज की सीईओ अर्चना वर्मा के अनुसार कई मामलों में चिकित्सक पूर्व में संबंधित अस्पताल में कार्यरत थे, लेकिन डाटा समय पर अपडेट न होने के कारण उनके नाम रिकॉर्ड में बने रहे। कुछ विशेषज्ञ चिकित्सक वास्तव में एक साथ अनेक अस्पतालों में सेवाएँ दे रहे हैं।
इलेक्ट्रॉनिक हेल्थ रिकॉर्ड (EHR) से मरीज़ों को क्या फायदा होगा?
आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के तहत EHR लागू होने से मरीज़ों का संपूर्ण चिकित्सा इतिहास डिजिटल रूप में उपलब्ध रहेगा। इससे अस्पताल बदलने पर बार-बार जाँच कराने की आवश्यकता कम होगी और उपचार प्रक्रिया अधिक तेज़ व पारदर्शी बनेगी।
इस अभियान का दूरदराज़ के मरीज़ों पर क्या असर पड़ेगा?
अभियान से डाटा की सटीकता बढ़ेगी, जिससे प्रदेश के दूरस्थ क्षेत्रों में वास्तव में उपलब्ध विशेषज्ञ चिकित्सकों की पहचान आसान होगी। इससे गरीब और जरूरतमंद मरीज़ों को सही समय पर सही विशेषज्ञ से उपचार मिलने की संभावना बढ़ेगी।
राष्ट्र प्रेस
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