उत्तर प्रदेश के स्वास्थ्य सेवाओं में नवाचार: योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में पिछले नौ वर्षों की उपलब्धियाँ
सारांश
Key Takeaways
- डिजिटल स्वास्थ्य में ५.७६ करोड़ रिकॉर्ड बनाए गए हैं।
- आयुष्मान भारत योजना के तहत १.३१ करोड़ परिवारों को स्वास्थ्य सुरक्षा।
- ७५ जिलों में निशुल्क डायलिसिस सुविधा उपलब्ध।
- ३६ मोबाइल प्रयोगशालाओं के माध्यम से खाद्य पदार्थों की जांच।
- योगी सरकार ने स्वास्थ्य अवसंरचना में महत्वपूर्ण वृद्धि की है।
लखनऊ, २४ मार्च (राष्ट्र प्रेस)। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में पिछले नौ वर्षों में स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में अद्वितीय परिवर्तन हुए हैं। यूपी सरकार ने इस अवधि में न केवल आधारभूत संरचना को मजबूत किया है, बल्कि डिजिटल स्वास्थ्य, आपात सेवाएं, और मातृ-शिशु देखभाल जैसे क्षेत्रों में भी नई ऊंचाइयों को छुआ है। यही कारण है कि उत्तर प्रदेश कई स्वास्थ्य मानकों पर आज देश में अग्रणी बन गया है।
योगी सरकार ने डिजिटल स्वास्थ्य में महत्वपूर्ण उपलब्धियाँ हासिल करते हुए ५.७६ करोड़ से अधिक इलेक्ट्रॉनिक स्वास्थ्य रिकॉर्ड बनाए हैं। माइक्रोसाइट प्रोजेक्ट के तहत ३५ माइक्रोसाइट्स का संचालन हो रहा है, जहाँ ४.४ लाख से अधिक रिकॉर्ड पंजीकृत कर प्रदेश ने देश में पहला स्थान प्राप्त किया है। इसके साथ ही, यूनिफाइड डिजीज सर्विलांस पोर्टल के माध्यम से रोगों की निगरानी को और प्रभावी बनाया गया है। अस्पतालों में चिकित्सा उपकरणों की उपलब्धता को सुनिश्चित करने के लिए ‘केयर मॉडल’ लागू किया गया है। मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय कार्य हुए हैं।
गर्भवती महिलाओं को निशुल्क अल्ट्रासाउंड के लिए ई-वाउचर की सुविधा दी गई है। जननी सुरक्षा योजना के अंतर्गत १३,५१,०४४ लाभार्थियों को सहायता मिली है, जबकि बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत ८,७९,६४२ बच्चों का उपचार किया गया है। दस्तक अभियान के माध्यम से एईएस-जेई जैसी बीमारियों के खिलाफ सघन अभियान चलाया गया। प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि २२,६८१ आयुष्मान भारत हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर संचालित हैं। आयुष्मान भारत हेल्थ अकाउंट के तहत १३.१८ करोड़ से अधिक लोगों का पंजीकरण किया गया है। स्वास्थ्य पेशेवर रजिस्ट्र्री में ८१,६१५ से अधिक पंजीकरण कर प्रदेश ने देश में अग्रणी स्थान प्राप्त किया है।
आयुष्मान भारत योजना के तहत १.३१ करोड़ परिवारों के ५.५९ करोड़ लाभार्थियों के कार्ड बनाए गए हैं। ९ करोड़ से अधिक लोगों को ५ लाख रुपये तक का निशुल्क चिकित्सा सुरक्षा प्रदान किया गया है। प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के अंतर्गत ७.३४ करोड़ लोग लाभान्वित हो रहे हैं। इसके अतिरिक्त, मुख्यमंत्री जन आरोग्य अभियान के तहत ५०.६४ लाख परिवारों के १.५० करोड़ लोगों को स्वास्थ्य सुरक्षा दी गई है। स्वास्थ्य अवसंरचना के विस्तार में भी प्रदेश ने बड़ी छलांग लगाई है। सभी जिलों में ८७३ जन औषधि केंद्र संचालित हैं। ६३,४०७ हेल्थ फैसिलिटी रजिस्ट्रेशन के साथ उत्तर प्रदेश देश में पहले स्थान पर है। प्रदेश में अब तक १३,३५३ करोड़ रुपये खर्च कर ८१.५५ लाख मरीजों का निशुल्क उपचार किया जा चुका है।
आयुष्मान योजना से जुड़े ६,२१३ अस्पतालों (२,९५० सरकारी और ३,२६३ निजी) का नेटवर्क देश में सबसे बड़ा है। आपातकालीन सेवाओं में १०८ एम्बुलेंस सेवा के माध्यम से ४ करोड़ से अधिक लोगों को लाभ मिला है। एडवांस लाइफ सपोर्ट (एएलएस) एम्बुलेंस की संख्या बढ़ाकर ३७५ कर दी गई है। एम्बुलेंस सेवाओं की पहुंच और क्षमता में सुधार करते हुए प्रतिदिन की दूरी ६० किमी से बढ़ाकर १२० किमी कर दी गई है। इसके साथ ही, मोबाइल मेडिकल यूनिट्स के जरिए १.८० करोड़ से अधिक मरीजों का उपचार किया गया है।
योगी सरकार में प्रदेश के ७५ जिलों के अस्पतालों में निशुल्क डायलिसिस सुविधा उपलब्ध कराई गई है, जिससे ४१.४६ लाख से अधिक मरीज लाभान्वित हुए हैं। जिलों में सीटी स्कैन सेवा शुरू की गई है। दूरदराज के क्षेत्रों में टेलीमेडिसिन और टेली कंसल्टेशन के माध्यम से विशेषज्ञ डॉक्टरों की सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। स्वास्थ्य सेवाओं को और मजबूत करने के लिए योगी सरकार ने उत्तर प्रदेश मेडिकल सप्लाई कॉर्पोरेशन की स्थापना की, जिससे दवाओं की गुणवत्ता और आपूर्ति में पारदर्शिता आई है। साथ ही, ७९८ स्वास्थ्य इकाइयों को नेशनल क्वालिटी एश्योरेंस सर्टिफिकेट प्राप्त हुआ है।
खाद्य सुरक्षा और अनुसंधान के क्षेत्र में भी प्रदेश ने कदम बढ़ाए हैं। ३६ मोबाइल प्रयोगशालाओं के माध्यम से खाद्य पदार्थों की जांच की जा रही है। लखनऊ, मेरठ और वाराणसी में माइक्रोबायोलॉजी लैब स्थापित कर खाद्य गुणवत्ता की निगरानी को मजबूत किया गया है। फार्मास्युटिकल रिसर्च को बढ़ावा देने के लिए ‘प्रमोद फार्म’ संस्था की स्थापना की गई है। इसके अलावा, प्रदेश के कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए पंडित दीनदयाल उपाध्याय कैशलेस चिकित्सा योजना लागू की गई है, जिससे उन्हें कैशलेस इलाज की सुविधा मिल रही है। वहीं, विभिन्न विभागों से जुड़े लाखों परिवारों को भी स्वास्थ्य बीमा योजनाओं में शामिल किया गया है।