फेंटेनाइल तस्करी: अमेरिका ने केएस इंटरनेशनल ट्रेडर्स से जुड़े 13 लोगों के वीजा पर प्रतिबंध लगाया
सारांश
मुख्य बातें
अमेरिका ने केएस इंटरनेशनल ट्रेडर्स से जुड़े 13 लोगों के वीजा पर प्रतिबंध लगा दिया है, जो कथित तौर पर खतरनाक ड्रग फेंटेनाइल की अवैध तस्करी में संलिप्त इस भारतीय व्यवसाय के करीबी कारोबारी सहयोगी बताए जा रहे हैं। अमेरिकी विदेश विभाग के प्रवक्ता टॉमी पिगॉट ने मंगलवार, 12 मई को यह जानकारी दी। यह कार्रवाई भारत और अमेरिका की अवैध ड्रग नेटवर्क के खिलाफ साझा प्रतिबद्धता के तहत की गई है।
मुख्य घटनाक्रम
प्रवक्ता पिगॉट ने बताया कि प्रतिबंधित 13 लोग "केएस इंटरनेशनल ट्रेडर्स और उसके मालिक के करीबी कारोबारी सहयोगी" हैं। यह कंपनी पहले से ही अवैध फेंटेनाइल तस्करी के मामले में प्रतिबंधित थी, जिसे राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जनसंहारक हथियार घोषित किया है। हालाँकि, अधिकारियों ने वीजा प्रतिबंध झेलने वाले 13 लोगों के नाम सार्वजनिक नहीं किए।
यह प्रतिबंध इमिग्रेशन एंड नेशनलिटी एक्ट के तहत लगाया गया है, जो ड्रग तस्करों को अमेरिका में प्रवेश से रोकता है। पिगॉट ने कहा, "यह कार्रवाई अमेरिका और भारत की उस साझा और स्थायी प्रतिबद्धता को दर्शाती है, जिसके तहत अवैध ड्रग नेटवर्क को खत्म किया जा रहा है और उन तस्करी नेटवर्क को तोड़ा जा रहा है जो लोगों को नुकसान पहुंचाते हैं।"
पहले से प्रतिबंधित कंपनी और उसके मालिक
गौरतलब है कि सितंबर में ही अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने केएस इंटरनेशनल ट्रेडर्स, उसके मालिक खिजर मोहम्मद इकबाल शेख और सादिक अब्बास हबीब सैयद पर प्रतिबंध लगाए थे। ये दोनों भारतीय नागरिक हैं। उन प्रतिबंधों के तहत उनकी संपत्तियाँ फ्रीज कर दी गई थीं और अमेरिका में किसी भी वित्तीय लेन-देन पर रोक लगा दी गई थी।
ट्रेजरी विभाग ने आरोप लगाया था कि ये लोग सैकड़ों हजारों नकली दवाइयाँ (प्रिस्क्रिप्शन पिल्स) — जिनमें फेंटेनाइल और अन्य नशीले पदार्थ शामिल थे — अमेरिका में लोगों को बेचते थे। यह ऐसे समय में आया है जब अमेरिका में फेंटेनाइल से होने वाली मौतें एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट बन चुकी हैं।
भारत-अमेरिका सहयोग का संदर्भ
यह कार्रवाई भारत-अमेरिका के बीच नशीले पदार्थों की तस्करी के खिलाफ बढ़ते द्विपक्षीय सहयोग की कड़ी में देखी जा रही है। दोनों देशों ने हाल के वर्षों में अवैध ड्रग नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए खुफिया और कानून प्रवर्तन सहयोग को मजबूत किया है। आलोचकों का कहना है कि प्रतिबंधित व्यक्तियों के नाम सार्वजनिक न करने से जवाबदेही सुनिश्चित करना कठिन हो जाता है।
आगे क्या होगा
विशेषज्ञों के अनुसार, वीजा प्रतिबंध और संपत्ति फ्रीजिंग जैसे कदम तस्करी नेटवर्क पर वित्तीय दबाव बनाने की व्यापक रणनीति का हिस्सा हैं। अमेरिकी अधिकारियों ने संकेत दिया है कि इस मामले में आगे और कार्रवाई की जा सकती है। भारतीय एजेंसियों की भूमिका और संभावित प्रत्यर्पण कार्यवाही पर अभी स्पष्टता नहीं है।