OFAC ने सिनालोआ कार्टेल के सिंथेटिक ड्रग नेटवर्क पर 23 प्रतिबंध लगाए, भारतीय सहयोग को बताया 'महत्वपूर्ण'
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सारांश
अमेरिका ने सिनालोआ कार्टेल के सिंथेटिक ड्रग नेटवर्क पर शिकंजा कसते हुए 23 पर प्रतिबंध लगाए। भारतीय एजेंसियों ने एशिया से आने वाले प्रीकर्सर केमिकल्स की सप्लाई चेन तोड़ने में अहम भूमिका निभाई — यह भारत-अमेरिका सुरक्षा साझेदारी की बढ़ती गहराई का संकेत है।
Key Takeaways
- OFAC ने 28 अप्रैल को सिनालोआ कार्टेल से जुड़े सिंथेटिक ओपिओइड नेटवर्क के 23 व्यक्तियों और संस्थाओं पर प्रतिबंध लगाए।
- भारतीय कानून प्रवर्तन एजेंसियों ने इस आपराधिक नेटवर्क को बाधित करने में "महत्वपूर्ण" योगदान दिया — अमेरिकी दूतावास।
- नेटवर्क एशिया से फेंटेनिल निर्माण के लिए प्रीकर्सर केमिकल्स की आपूर्ति करता था, जिन्हें मैक्सिको और ग्वाटेमाला की अवैध लैब्स में ड्रग्स में बदला जाता था।
- केमिकल्स को अक्सर "सुरक्षित पदार्थ" बताकर गलत लेबलिंग के साथ भेजा जाता था — अमेरिकी वित्त मंत्रालय।
- ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने कहा कि ओपिओइड सप्लाई चेन के हर चरण को निशाना बनाना जारी रहेगा।
अमेरिकी वित्त मंत्रालय के अंतर्गत कार्यरत विदेशी संपत्ति नियंत्रण कार्यालय (OFAC) ने 28 अप्रैल को मैक्सिको के कुख्यात सिनालोआ कार्टेल से जुड़े सिंथेटिक ओपिओइड नेटवर्क के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए 23 व्यक्तियों और संस्थाओं पर प्रतिबंध लगाए हैं। नई दिल्ली स्थित अमेरिकी दूतावास ने इस अभियान में भारतीय कानून प्रवर्तन एजेंसियों की भूमिका को
Point of View
बल्कि वैश्विक ड्रग-रोधी अभियानों में भी अमेरिका का विश्वसनीय साझेदार बन रहा है। हालाँकि, यह भी उतना ही महत्वपूर्ण है कि भारत की घरेलू रासायनिक विनियमन व्यवस्था की जाँच हो — क्योंकि यदि भारत-आधारित आपूर्तिकर्ता इस नेटवर्क का हिस्सा थे, तो निगरानी की खामियाँ भी उजागर होती हैं। फेंटेनिल संकट अमेरिका में हर साल हजारों जानें लेता है और इस पर काबू पाना अब द्विपक्षीय कूटनीति का एक अहम आयाम बन चुका है।
NationPress
28/04/2026
Frequently Asked Questions
OFAC ने सिनालोआ कार्टेल के नेटवर्क पर क्या कार्रवाई की?
अमेरिकी वित्त मंत्रालय के OFAC ने 28 अप्रैल को सिनालोआ कार्टेल से जुड़े सिंथेटिक ओपिओइड नेटवर्क के 23 व्यक्तियों और संस्थाओं पर प्रतिबंध लगाए। यह नेटवर्क एशिया से फेंटेनिल निर्माण के लिए प्रीकर्सर केमिकल्स की आपूर्ति करता था।
इस कार्रवाई में भारत की क्या भूमिका रही?
नई दिल्ली स्थित अमेरिकी दूतावास के अनुसार, भारतीय कानून प्रवर्तन एजेंसियों ने इस आपराधिक नेटवर्क के प्रमुख हिस्सों को तोड़ने में 'महत्वपूर्ण' योगदान दिया। दूतावास ने भारत की साझेदारी की 'तहेदिल से सराहना' की।
सिंथेटिक ड्रग्स का यह नेटवर्क कैसे काम करता था?
यह नेटवर्क एशिया से प्रीकर्सर केमिकल्स को 'सुरक्षित पदार्थ' बताकर गलत लेबलिंग के साथ भेजता था। इन्हें मैक्सिको और ग्वाटेमाला की अवैध प्रयोगशालाओं में फेंटेनिल जैसे सिंथेटिक नशीले पदार्थों में बदलकर अमेरिकी बाजारों तक पहुँचाया जाता था।
ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने क्या कहा?
बेसेंट ने कहा कि 'राष्ट्रपति ट्रंप ने यह साफ कर दिया है कि आतंकवादी गिरोहों को हमारी सीमाओं और हमारे समुदायों में तबाही मचाने की इजाजत नहीं दी जाएगी।' उन्होंने यह भी कहा कि ट्रेजरी ओपिओइड सप्लाई चेन के हर चरण को निशाना बनाना जारी रखेगी।
अमेरिका में फेंटेनिल संकट कितना गंभीर है?
अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार फेंटेनिल और मेथामफेटामिन जैसे सिंथेटिक ड्रग्स हर साल हजारों अमेरिकियों की मौत का कारण बनते हैं। इन पर अंकुश लगाना अब अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा का एक महत्वपूर्ण मुद्दा बन चुका है।