ओडिशा ग्रामीण बैंक चेयरमैन ने क्योंझर कंकाल घटना को 'बेहद दुर्भाग्यपूर्ण' बताया, ₹19,300 के लिए जीतू ने खोदी थी बहन की कब्र

Click to start listening
ओडिशा ग्रामीण बैंक चेयरमैन ने क्योंझर कंकाल घटना को 'बेहद दुर्भाग्यपूर्ण' बताया, ₹19,300 के लिए जीतू ने खोदी थी बहन की कब्र

सारांश

₹19,300 के लिए एक अनपढ़ आदिवासी ने बहन की कब्र खोदकर कंकाल बैंक के सामने रख दिया — यह सिर्फ एक विचित्र घटना नहीं, बल्कि ग्रामीण भारत में बैंकिंग प्रक्रियाओं की जटिलता और साक्षरता की खाई का दर्दनाक आईना है।

Key Takeaways

  • जीतू नामक आदिवासी व्यक्ति ने ओडिशा के क्योंझर जिले में बहन के बैंक खाते से ₹19,300 निकालने के लिए उसका कंकाल बैंक शाखा में ले जाकर विरोध किया।
  • घटना सोमवार दोपहर करीब 1 बजे मल्लिपासी गाँव, पटना पुलिस स्टेशन क्षेत्र में हुई।
  • बैंक ने मृत्यु प्रमाण पत्र और कानूनी उत्तराधिकारी प्रमाण पत्र माँगे थे; जीतू अनपढ़ होने के कारण प्रक्रिया नहीं समझ सका।
  • खाते का नामांकित व्यक्ति भी मृत बताया जा रहा है, जिससे मामला और जटिल हो गया।
  • चेयरमैन ऋषि सिंह ने आश्वासन दिया कि कानूनी औपचारिकताएँ पूरी होते ही बिना देरी भुगतान किया जाएगा।
  • बैंक ने आंतरिक जाँच की है और वरिष्ठ अधिकारियों ने शाखा का दौरा कर रिपोर्ट सौंपी है।

ओडिशा ग्रामीण बैंक के चेयरमैन ऋषि सिंह ने मंगलवार, 28 अप्रैल 2026 को क्योंझर में हुई हालिया घटना को 'बेहद दुर्भाग्यपूर्ण' बताया, जहाँ एक आदिवासी व्यक्ति जीतू कथित तौर पर अपनी मृत बहन का कंकाल मल्लिपासी ग्राम की बैंक शाखा में लेकर पहुँचा था। जीतू का उद्देश्य बहन के खाते में जमा ₹19,300 निकालना था, लेकिन दस्तावेज़ी औपचारिकताओं को न समझ पाने के कारण उसने यह असामान्य कदम उठाया। चेयरमैन ने स्पष्ट किया कि बैंक ने स्थापित कानूनी प्रक्रियाओं का पूरी तरह पालन किया।

घटनाक्रम: क्या हुआ मल्लिपासी में

पुलिस के अनुसार, जीतू की बहन की मृत्यु लगभग दो महीने पहले हो गई थी। मलिपासी स्थित ओडिशा ग्रामीण बैंक की शाखा में उसकी बहन के नाम पर खाता था, जिसमें ₹19,300 जमा थे। मृत्यु के बाद जीतू जब पैसे निकालने गया, तो बैंक अधिकारियों ने उसे मृत्यु प्रमाण पत्र और अन्य वैध दस्तावेज़ प्रस्तुत करने को कहा।

जीतू अनपढ़ था और उसे यह प्रक्रिया समझ नहीं आई। सोमवार दोपहर करीब 1 बजे, पटना पुलिस स्टेशन क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले मल्लिपासी गाँव में उसने कब्र खोदकर बहन की हड्डियाँ एक बोरी में भरीं और बैंक अधिकारी के सामने 'सबूत' के तौर पर पेश कर दिया।

बैंक की प्रतिक्रिया और पुलिस का हस्तक्षेप

कंकाल देखकर बैंक अधिकारी और ग्राहक भयभीत हो गए। शाखा प्रबंधन ने तुरंत स्थानीय पुलिस को सूचित किया। सूचना मिलते ही पुलिस दल मौके पर पहुँचा और स्थिति को नियंत्रण में लिया। पुलिस से बातचीत के बाद जीतू ने कंकाल वापस ले लिया और उसे उचित स्थान पर पुनः दफना दिया।

चेयरमैन ऋषि सिंह ने बताया कि इससे पहले जीतू शाखा में आया था और महिला के नाम पर दर्ज खाते से पैसे निकालने की कोशिश कर रहा था। शाखा प्रबंधक ने उसे स्पष्ट किया कि तीसरे पक्ष के रूप में वह राशि नहीं निकाल सकता — इसके लिए खाताधारक की उपस्थिति या वैध कानूनी दस्तावेज़ आवश्यक हैं।

विरोधाभासी बयान और जटिल परिस्थितियाँ

सिंह ने बताया कि जीतू ने शुरू में अपनी बहन की स्थिति को लेकर विरोधाभासी बयान दिए — पहले कहा कि वह बीमार है, बाद में स्वीकार किया कि उसकी मृत्यु हो चुकी है। बैंक अधिकारियों ने उसे बताया कि मृत्यु की स्थिति में मृत्यु प्रमाण पत्र और कानूनी उत्तराधिकारी प्रमाण पत्र जमा करने पर ही राशि जारी की जा सकती है।

मामला और जटिल इसलिए हो गया क्योंकि खाते से जुड़ा नामांकित व्यक्ति भी मृत बताया जा रहा है। ऐसे में दावेदार को सक्षम स्थानीय अधिकारियों द्वारा जारी कानूनी उत्तराधिकार प्रमाण पत्र प्रस्तुत करना अनिवार्य है। सिंह ने बताया कि स्थानीय अधिकारियों से पुष्टि लंबित होने के कारण यह प्रमाण पत्र अभी तक जमा नहीं हो सका है।

बैंक का आश्वासन और आंतरिक जाँच

चेयरमैन ने जोर देकर कहा कि बैंक का जीतू को परेशान करने का कोई इरादा नहीं था। उन्होंने कहा,

Point of View

लेकिन सवाल यह है कि क्या शाखा स्तर पर ऐसे संवेदनशील मामलों में मार्गदर्शन की कोई व्यवस्था है? जब नामांकित व्यक्ति भी मृत हो और दावेदार अनपढ़ हो, तो ₹19,300 के लिए महीनों की प्रतीक्षा और दस्तावेज़ी भूलभुलैया — यही व्यवस्था की विफलता है। ग्रामीण बैंकों को प्रक्रिया-पालन के साथ-साथ मानवीय संवेदनशीलता और सक्रिय सहायता का दायित्व भी निभाना होगा।
NationPress
29/04/2026

Frequently Asked Questions

क्योंझर बैंक कंकाल घटना क्या है?
ओडिशा के क्योंझर जिले के मल्लिपासी गाँव में जीतू नामक आदिवासी व्यक्ति अपनी मृत बहन का कंकाल ओडिशा ग्रामीण बैंक की शाखा में लेकर पहुँचा, ताकि बहन के खाते में जमा ₹19,300 निकाल सके। बैंक ने मृत्यु प्रमाण पत्र और कानूनी उत्तराधिकारी प्रमाण पत्र न होने के कारण पैसे देने से मना किया था।
बैंक ने जीतू को पैसे क्यों नहीं दिए?
बैंक के नियमों के अनुसार, खाताधारक की मृत्यु के बाद राशि केवल सत्यापित कानूनी वारिस या नामांकित व्यक्ति को ही दी जा सकती है। जीतू के पास मृत्यु प्रमाण पत्र और कानूनी उत्तराधिकारी प्रमाण पत्र नहीं थे, और खाते का नामांकित व्यक्ति भी मृत बताया जा रहा है।
जीतू को अब पैसे कब मिलेंगे?
ओडिशा ग्रामीण बैंक के चेयरमैन ऋषि सिंह ने आश्वासन दिया है कि सक्षम स्थानीय अधिकारियों द्वारा जारी कानूनी उत्तराधिकार प्रमाण पत्र जमा होते ही बिना देरी के भुगतान कर दिया जाएगा। फिलहाल स्थानीय प्रशासन से पुष्टि लंबित है।
इस घटना में पुलिस की क्या भूमिका रही?
बैंक अधिकारियों ने कंकाल देखकर पटना पुलिस स्टेशन को सूचित किया। पुलिस दल मौके पर पहुँचा, स्थिति को नियंत्रित किया और जीतू से बातचीत की। इसके बाद जीतू ने कंकाल वापस ले लिया और उसे उचित स्थान पर पुनः दफना दिया।
ओडिशा ग्रामीण बैंक ने इस घटना के बाद क्या कदम उठाए?
बैंक ने आंतरिक जाँच की है और क्षेत्रीय प्रबंधकों सहित वरिष्ठ अधिकारियों ने शाखा का दौरा कर रिपोर्ट सौंपी है। चेयरमैन ने कहा कि कानूनी औपचारिकताएँ पूरी होते ही सही लाभार्थी को भुगतान सुनिश्चित किया जाएगा।
Nation Press