पटियाला हाउस कोर्ट ने शब्बीर शाह की पत्नी डॉ. बिलकिस पर PMLA के तहत आरोप तय किए, 20 मई को अगली सुनवाई
सारांश
Key Takeaways
पटियाला हाउस कोर्ट ने 28 अप्रैल 2026 को कश्मीरी अलगाववादी नेता शब्बीर अहमद शाह की पत्नी डॉ. बिलकिस शाह के विरुद्ध प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA), 2002 की धारा 3/4 के तहत आरोप तय कर दिए हैं। अदालत ने डॉ. बिलकिस को 20 मई को कोर्ट में उपस्थित होने का निर्देश दिया है।
आरोप तय करने का आधार
कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि डॉ. बिलकिस शाह एक सरकारी अस्पताल में डॉक्टर के पद पर कार्यरत थीं और उन्हें प्रतिमाह लगभग ₹26,000 का वेतन मिलता था। अदालत ने माना कि यह वेतन उनके जीवनयापन के खर्चों और जीवनशैली को बनाए रखने के लिए अपर्याप्त था, फिर भी उन्होंने कई संपत्तियाँ अर्जित कीं, जिससे गंभीर संदेह उत्पन्न होता है।
कोर्ट के अनुसार, यह संपत्तियाँ कथित तौर पर वर्ष 2005 में डॉ. बिलकिस की दो बहनों द्वारा उनकी नाबालिग बेटियों और उन्हें उपहार में दी गई बताई गई थीं। जाँच के दौरान बहनों ने बयान दिया कि उक्त संपत्ति उनके पिता मोहम्मद इकबाल राथर ने 1997 में ₹9 लाख में खरीदी थी। हालाँकि, मोहम्मद इकबाल राथर वैध साधनों से इस खरीद को प्रमाणित करने वाला कोई दस्तावेज़ी साक्ष्य प्रस्तुत करने में विफल रहे।
बेनामी लेन-देन का खुलासा
अदालत ने यह भी कहा कि डॉ. बिलकिस द्वारा दी गई जानकारी उनकी दो बेटियों के नाम पर खरीदी गई भूमि के लिए नकद में भुगतान की गई राशि को उचित ठहराने के लिए पर्याप्त नहीं थी। आगे की जाँच से यह स्पष्ट हुआ कि भूमि की खरीद और उसे बाद में उपहार में देने का समूचा लेन-देन बेनामी तरीके से संचालित किया गया था। गौरतलब है कि इसी मामले में 2017 में अलगाववादी नेता शब्बीर शाह और मोहम्मद असलम वानी के विरुद्ध पहले ही आरोप तय किए जा चुके हैं।
शब्बीर शाह की NIA रिमांड बढ़ी
इस बीच, सोमवार को राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) की अदालत ने अलगाववादी नेता शब्बीर अहमद शाह की रिमांड दस दिन के लिए और बढ़ा दी। NIA ने उन्हें हाल ही में दिल्ली से गिरफ्तार किया था और ट्रांजिट रिमांड मंजूर करवाकर 18 अप्रैल को जम्मू स्थित NIA कोर्ट में पेश किया गया था, जहाँ पहले दस दिन की रिमांड दी गई थी।
उल्लेखनीय है कि शब्बीर शाह टेरर फंडिंग केस में दिल्ली की जेल में सज़ा काट रहे थे और कुछ दिन पहले ही जमानत पर रिहा हुए थे। रिमांड समाप्त होने से पूर्व उन्हें पुनः NIA कोर्ट में पेश किया गया, जहाँ अदालत ने दस दिन की नई रिमांड मंजूर की।
आम जनता और कानूनी विशेषज्ञों पर असर
यह मामला इस दृष्टि से महत्वपूर्ण है कि इसमें PMLA के तहत किसी अभियुक्त के परिवारजन पर भी आरोप तय किए गए हैं, जो मनी लॉन्ड्रिंग जाँच के दायरे को विस्तृत करने की प्रवृत्ति को दर्शाता है। कानूनी जानकारों के अनुसार, इस प्रकार के मामले संपत्ति अर्जन और स्रोत के दस्तावेज़ीकरण की अनिवार्यता को रेखांकित करते हैं। अब सभी की निगाहें 20 मई की सुनवाई पर टिकी हैं, जब मामले में अगला महत्वपूर्ण कदम उठाया जाएगा।