पटियाला हाउस कोर्ट ने शब्बीर शाह की पत्नी डॉ. बिलकिस पर PMLA के तहत आरोप तय किए, 20 मई को अगली सुनवाई

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पटियाला हाउस कोर्ट ने शब्बीर शाह की पत्नी डॉ. बिलकिस पर PMLA के तहत आरोप तय किए, 20 मई को अगली सुनवाई

सारांश

पटियाला हाउस कोर्ट ने कश्मीरी अलगाववादी नेता शब्बीर शाह की पत्नी डॉ. बिलकिस शाह पर PMLA की धारा 3/4 के तहत आरोप तय किए — ₹26,000 मासिक वेतन के बावजूद कई संपत्तियाँ और बेनामी लेन-देन का आरोप। साथ ही शब्बीर शाह की NIA रिमांड दस दिन और बढ़ाई गई।

Key Takeaways

पटियाला हाउस कोर्ट ने 28 अप्रैल 2026 को डॉ. बिलकिस शाह के विरुद्ध PMLA 2002 की धारा 3/4 के तहत आरोप तय किए। अगली सुनवाई 20 मई को निर्धारित; डॉ. बिलकिस को कोर्ट में उपस्थित होने का निर्देश। कोर्ट ने माना कि ₹26,000 मासिक वेतन के बावजूद कई संपत्तियाँ खरीदी गईं, जो संदेहास्पद है। संपत्ति 1997 में ₹9 लाख में खरीदी गई बताई गई, लेकिन वैध स्रोत का कोई दस्तावेज़ नहीं। भूमि खरीद और उपहार लेन-देन बेनामी तरीके से होने का खुलासा जाँच में हुआ। शब्बीर शाह की NIA रिमांड दस दिन के लिए और बढ़ाई गई; टेरर फंडिंग केस में जमानत पर थे।

पटियाला हाउस कोर्ट ने 28 अप्रैल 2026 को कश्मीरी अलगाववादी नेता शब्बीर अहमद शाह की पत्नी डॉ. बिलकिस शाह के विरुद्ध प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA), 2002 की धारा 3/4 के तहत आरोप तय कर दिए हैं। अदालत ने डॉ. बिलकिस को 20 मई को कोर्ट में उपस्थित होने का निर्देश दिया है।

आरोप तय करने का आधार

कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि डॉ. बिलकिस शाह एक सरकारी अस्पताल में डॉक्टर के पद पर कार्यरत थीं और उन्हें प्रतिमाह लगभग ₹26,000 का वेतन मिलता था। अदालत ने माना कि यह वेतन उनके जीवनयापन के खर्चों और जीवनशैली को बनाए रखने के लिए अपर्याप्त था, फिर भी उन्होंने कई संपत्तियाँ अर्जित कीं, जिससे गंभीर संदेह उत्पन्न होता है।

कोर्ट के अनुसार, यह संपत्तियाँ कथित तौर पर वर्ष 2005 में डॉ. बिलकिस की दो बहनों द्वारा उनकी नाबालिग बेटियों और उन्हें उपहार में दी गई बताई गई थीं। जाँच के दौरान बहनों ने बयान दिया कि उक्त संपत्ति उनके पिता मोहम्मद इकबाल राथर ने 1997 में ₹9 लाख में खरीदी थी। हालाँकि, मोहम्मद इकबाल राथर वैध साधनों से इस खरीद को प्रमाणित करने वाला कोई दस्तावेज़ी साक्ष्य प्रस्तुत करने में विफल रहे।

बेनामी लेन-देन का खुलासा

अदालत ने यह भी कहा कि डॉ. बिलकिस द्वारा दी गई जानकारी उनकी दो बेटियों के नाम पर खरीदी गई भूमि के लिए नकद में भुगतान की गई राशि को उचित ठहराने के लिए पर्याप्त नहीं थी। आगे की जाँच से यह स्पष्ट हुआ कि भूमि की खरीद और उसे बाद में उपहार में देने का समूचा लेन-देन बेनामी तरीके से संचालित किया गया था। गौरतलब है कि इसी मामले में 2017 में अलगाववादी नेता शब्बीर शाह और मोहम्मद असलम वानी के विरुद्ध पहले ही आरोप तय किए जा चुके हैं।

शब्बीर शाह की NIA रिमांड बढ़ी

इस बीच, सोमवार को राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) की अदालत ने अलगाववादी नेता शब्बीर अहमद शाह की रिमांड दस दिन के लिए और बढ़ा दी। NIA ने उन्हें हाल ही में दिल्ली से गिरफ्तार किया था और ट्रांजिट रिमांड मंजूर करवाकर 18 अप्रैल को जम्मू स्थित NIA कोर्ट में पेश किया गया था, जहाँ पहले दस दिन की रिमांड दी गई थी।

उल्लेखनीय है कि शब्बीर शाह टेरर फंडिंग केस में दिल्ली की जेल में सज़ा काट रहे थे और कुछ दिन पहले ही जमानत पर रिहा हुए थे। रिमांड समाप्त होने से पूर्व उन्हें पुनः NIA कोर्ट में पेश किया गया, जहाँ अदालत ने दस दिन की नई रिमांड मंजूर की।

आम जनता और कानूनी विशेषज्ञों पर असर

यह मामला इस दृष्टि से महत्वपूर्ण है कि इसमें PMLA के तहत किसी अभियुक्त के परिवारजन पर भी आरोप तय किए गए हैं, जो मनी लॉन्ड्रिंग जाँच के दायरे को विस्तृत करने की प्रवृत्ति को दर्शाता है। कानूनी जानकारों के अनुसार, इस प्रकार के मामले संपत्ति अर्जन और स्रोत के दस्तावेज़ीकरण की अनिवार्यता को रेखांकित करते हैं। अब सभी की निगाहें 20 मई की सुनवाई पर टिकी हैं, जब मामले में अगला महत्वपूर्ण कदम उठाया जाएगा।

Point of View

000 मासिक वेतन और बहु-संपत्ति अर्जन के बीच का अंतर्विरोध कोर्ट की नज़र में स्पष्ट था, लेकिन असली परीक्षा यह होगी कि अभियोजन पक्ष बेनामी लेन-देन की श्रृंखला को ट्रायल में साबित कर पाता है या नहीं। शब्बीर शाह के टेरर फंडिंग और मनी लॉन्ड्रिंग दोनों मामलों का एक साथ सक्रिय होना यह संकेत देता है कि जाँच एजेंसियाँ अब सिर्फ मुख्य आरोपी तक नहीं, बल्कि उनके पूरे वित्तीय नेटवर्क तक पहुँचने की कोशिश कर रही हैं।
NationPress
30/04/2026

Frequently Asked Questions

डॉ. बिलकिस शाह पर PMLA के तहत क्या आरोप तय हुए हैं?
पटियाला हाउस कोर्ट ने 28 अप्रैल 2026 को डॉ. बिलकिस शाह के विरुद्ध PMLA 2002 की धारा 3/4 के तहत मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप तय किए हैं। कोर्ट ने माना कि उनके वेतन और अर्जित संपत्तियों के बीच स्पष्ट विसंगति है और लेन-देन बेनामी तरीके से हुए।
शब्बीर शाह कौन हैं और उनके खिलाफ क्या मामले हैं?
शब्बीर अहमद शाह कश्मीरी अलगाववादी नेता हैं, जो टेरर फंडिंग केस में दिल्ली की जेल में सज़ा काट चुके हैं। उनके विरुद्ध 2017 में मनी लॉन्ड्रिंग मामले में आरोप तय हो चुके हैं और अब NIA ने उन्हें पुनः गिरफ्तार कर दस दिन की नई रिमांड ली है।
डॉ. बिलकिस शाह की संपत्तियों पर संदेह क्यों है?
कोर्ट के अनुसार डॉ. बिलकिस का मासिक वेतन लगभग ₹26,000 था, जो उनकी जीवनशैली और कई संपत्तियों की खरीद के लिए अपर्याप्त था। जाँच में पाया गया कि संपत्ति खरीद और उपहार लेन-देन बेनामी तरीके से हुए और वैध स्रोत का कोई दस्तावेज़ी सबूत नहीं दिया जा सका।
इस मामले में अगली सुनवाई कब होगी?
पटियाला हाउस कोर्ट ने डॉ. बिलकिस शाह को 20 मई को अदालत में उपस्थित होने का निर्देश दिया है। यही अगली महत्वपूर्ण तारीख है जब मामले में आगे की कार्यवाही होगी।
शब्बीर शाह की NIA रिमांड क्यों बढ़ाई गई?
शब्बीर शाह को हाल ही में दिल्ली से गिरफ्तार कर 18 अप्रैल को जम्मू NIA कोर्ट में पेश किया गया था, जहाँ दस दिन की रिमांड दी गई थी। रिमांड समाप्त होने से पहले उन्हें पुनः पेश किया गया और कोर्ट ने दस दिन की नई रिमांड मंजूर की।
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