क्या यूपी बनेगा देश का सबसे बड़ा हेल्थकेयर और मेडिकल टेक्नोलॉजी हब?

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क्या यूपी बनेगा देश का सबसे बड़ा हेल्थकेयर और मेडिकल टेक्नोलॉजी हब?

सारांश

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हेल्थटेक कॉन्क्लेव का उद्घाटन करते हुए कहा कि प्रदेश स्वास्थ्य आवश्यकताओं का बड़ा केंद्र बनेगा। सरकार मेडिकल टेक्नोलॉजी, हेल्थकेयर और फार्मा में सुधार लाने के लिए प्रतिबद्ध है। स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच को बढ़ाने के लिए नई योजनाएं और संसाधन विकसित किए जा रहे हैं।

Key Takeaways

  • उत्तर प्रदेश में हेल्थकेयर सेवाओं का सुधार हो रहा है।
  • आयुष्मान गोल्डन कार्ड से 5.5 करोड़ परिवारों को स्वास्थ्य सुविधा मिल रही है।
  • 81 मेडिकल कॉलेज अब प्रदेश में सक्रिय हैं।
  • इंसेफेलाइटिस जैसी बीमारियों पर नियंत्रण पाया गया है।
  • प्रदेश सरकार नई तकनीकों का उपयोग कर रही है।

लखनऊ, 18 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार को राजधानी लखनऊ में यूपी हेल्थटेक कॉन्क्लेव 1.0 का उद्घाटन किया। इस मौके पर उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश केवल 25 करोड़ की जनसंख्या वाला राज्य नहीं है, बल्कि यह देश तथा पड़ोसी राज्यों की स्वास्थ्य आवश्यकताओं की पूर्ति का सबसे बड़ा केंद्र भी है।

प्रदेश को मेडिकल टेक्नोलॉजी, हेल्थकेयर इनोवेशन और फार्मा मैन्युफैक्चरिंग का राष्ट्रीय एवं वैश्विक हब बनाने की दिशा में सरकार पूरी प्रतिबद्धता से आगे बढ़ रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में पिछले पौने नौ वर्षों में उत्तर प्रदेश ने स्वास्थ्य क्षेत्र में ऐतिहासिक परिवर्तन किए हैं, जिसका परिणाम आज ज़मीनी स्तर पर स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश देश के सबसे बड़े हेल्थकेयर कंज्यूमर मार्केट के रूप में 35 करोड़ से अधिक लोगों की स्वास्थ्य आवश्यकताओं का भार संभालता है।

उन्होंने आगे कहा कि पिछले पौने नौ वर्षों में उत्तर प्रदेश ने स्वास्थ्य क्षेत्र में ऐसे परिवर्तन किए हैं, जिनकी कल्पना पहले कभी नहीं की गई थी। वर्ष 2017 से पहले उत्तर प्रदेश में सरकारी और निजी क्षेत्र को मिलाकर कुल 40 मेडिकल कॉलेज थे, जबकि आज प्रदेश में 81 मेडिकल कॉलेज पूरी तरह से क्रियाशील हैं। इसके अलावा, दो एम्स, 100 से अधिक जिला अस्पताल, सैकड़ों सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी), प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) और हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर्स की एक मजबूत श्रृंखला तैयार की गई है, जिससे दूर-दराज के ग्रामीण क्षेत्रों में निःशुल्क स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध हो रही हैं। सरकार का लक्ष्य केवल भवनों का निर्माण नहीं है, बल्कि एक ऐसी व्यवस्था बनाना है जिसमें अंतिम पायदान पर बैठे व्यक्ति को भी सम्मानजनक और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सुविधाएं प्राप्त हो सकें।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के लागू होने से पहले, यदि किसी गरीब परिवार में कोई गंभीर रूप से बीमार होता था, तो पूरा परिवार भय और आर्थिक संकट में घिर जाता था। अब उत्तर प्रदेश में 5.5 करोड़ परिवारों को आयुष्मान गोल्डन कार्ड जारी किए जा चुके हैं, जिनके माध्यम से प्रति परिवार ₹5 लाख तक की निःशुल्क स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। जो पात्र परिवार किसी कारणवश आयुष्मान योजना में शामिल नहीं हो सके, उन्हें मुख्यमंत्री जन आरोग्य योजना के माध्यम से कवर किया गया है। आयुष्मान कार्ड एक अतिरिक्त सुरक्षा कवच है। प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों, जिला अस्पतालों, सीएचसी, पीएचसी और हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर्स में सभी नागरिकों को बिना किसी भेदभाव के निःशुल्क इलाज मिल रहा है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने यह भी कहा कि स्वास्थ्य क्षेत्र में सुधारों के परिणामस्वरूप उत्तर प्रदेश ने मातृ एवं शिशु मृत्यु दर को नियंत्रित करने में उल्लेखनीय सफलता प्राप्त की है। संस्थागत प्रसव अब राष्ट्रीय औसत के समान हो गया है। कई जनपदों में ट्यूबरक्लोसिस (टीबी) को पूरी तरह नियंत्रित कर लिया गया है। एक समय उत्तर प्रदेश वेक्टर जनित रोगों की चपेट में रहता था। मानसून के दौरान इंसेफेलाइटिस, डेंगू, मलेरिया, चिकनगुनिया और कालाजार जैसी बीमारियों का प्रकोप विकराल हो जाता था। इंसेफेलाइटिस के कारण पिछले 40 वर्षों में उत्तर प्रदेश में लगभग 50 हजार मासूम बच्चों की मृत्यु हुई थी। वर्ष 2017 में सरकार ने इसके खिलाफ निर्णायक अभियान शुरू किया। समय पर पहचान, स्थानीय स्तर पर इलाज और जवाबदेही सुनिश्चित करने की व्यवस्था लागू की गई। मात्र दो वर्षों के भीतर इस बीमारी को पूरी तरह नियंत्रित कर लिया गया और अब उत्तर प्रदेश में इंसेफेलाइटिस से ज़ीरो डेथ दर्ज की जा रही है। डेंगू, मलेरिया, कालाजार और चिकनगुनिया पर भी प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया गया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि अब अगला लक्ष्य प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘ईज़ ऑफ लिविंग’ विजन को साकार करना है। इसके लिए टेक्नोलॉजी का अधिकतम उपयोग आवश्यक है। स्क्रीनिंग की प्रक्रिया गांव स्तर से प्रारंभ होनी चाहिए, ताकि मरीज को अनावश्यक रूप से 40-50 किलोमीटर दूर न जाना पड़े। हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर पर ही यह सुनिश्चित किया जाए कि मरीज को किस स्तर की चिकित्सा की आवश्यकता है। टेली कंसल्टेशन, टेलीमेडिसिन और एआई आधारित स्क्रीनिंग से यह संभव है।

मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि यमुना प्राधिकरण क्षेत्र में मेडिकल डिवाइस पार्क और ललितपुर में बल्क ड्रग फार्मा पार्क का विकास युद्धस्तर पर किया जा रहा है। इसका उद्देश्य केवल आत्मनिर्भर भारत नहीं, बल्कि 'मेक इन इंडिया' से 'मेक फॉर द वर्ल्ड' की दिशा में आगे बढ़ना है। कोविड काल ने यह सिखाया कि संकट के समय दुनिया अपनी मोनोपोली दिखाती है। ऐसे में देश और प्रदेश को स्वास्थ्य और मेडिकल टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनना जरूरी है। मुख्यमंत्री ने तक्षशिला विश्वविद्यालय और वैद्य जीवक की कथा का उल्लेख करते हुए कहा कि भारतीय मनीषा हमेशा यह मानती रही है कि “नास्ति मूलमनौषधम्” अर्थात कोई भी वनस्पति ऐसी नहीं है, जिसमें औषधीय गुण न हो। उसी तरह “अयोग्य: पुरुषो नास्ति” अर्थात कोई व्यक्ति अयोग्य नहीं होता, आवश्यकता केवल सही योजक की होती है। आज सरकार की नीतियां वही योग्य योजक हैं, जो युवाओं, स्टार्टअप्स और इनोवेटर्स को अवसर प्रदान कर रही हैं।

मुख्यमंत्री योगी ने देश-विदेश के निवेशकों और उद्योग जगत को उत्तर प्रदेश आने का निमंत्रण देते हुए कहा कि प्रदेश में बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर, सुरक्षित वातावरण और सिंगल विंडो सिस्टम उपलब्ध है। सरकार समयबद्ध स्वीकृति और हर स्तर पर सहयोग सुनिश्चित करेगी। उन्होंने विश्वास जताया कि उत्तर प्रदेश मेडिकल टेक्नोलॉजी, हेल्थकेयर और फार्मा के क्षेत्र में देश ही नहीं, बल्कि दुनिया का प्रमुख केंद्र बन सकता है।

Point of View

बल्कि यह देश और दुनिया को भी एक नया दृष्टिकोण देगा। यह महत्वपूर्ण है कि ऐसे प्रयास लगातार जारी रहें।
NationPress
19/01/2026
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