दिग्विजय सिंह का नरेला विधानसभा क्षेत्र में फर्जी मतदाताओं का मामला: जांच की मांग
सारांश
Key Takeaways
- दिग्विजय सिंह ने फर्जी मतदाताओं के मामले में ज्ञापन दिया।
- निर्वाचन आयोग की प्रक्रिया की शुद्धता पर सवाल उठे हैं।
- मकान मालिकों ने फर्जी मतदाताओं के नामों के बारे में शपथ पत्र दिए।
- जांच की आवश्यकता है ताकि चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता बनी रहे।
भोपाल, 9 मार्च (राष्ट्र प्रेस) - मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और वर्तमान राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह ने भोपाल के नरेला विधानसभा क्षेत्र में अंतिम मतदाता सूची में व्यापक स्तर पर फर्जी मतदाताओं के नाम शामिल होने का गंभीर आरोप लगाया। उन्होंने इस संबंध में मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी मध्य प्रदेश को प्रमाण सहित ज्ञापन प्रस्तुत किया और निष्पक्ष जांच की मांग की।
दिग्विजय सिंह ने अपने ज्ञापन में बताया कि निर्वाचन आयोग द्वारा चलाए जा रहे स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य मतदाता सूची की शुद्धता को सुनिश्चित करना है। इस प्रक्रिया में बीएलओ द्वारा घर-घर जाकर 100 प्रतिशत भौतिक सत्यापन किया जाना चाहिए, जिससे मृत या प्रवासी व्यक्तियों के नाम हटाए जा सकें और नए पात्र मतदाताओं के नाम जोड़े जा सकें। लेकिन नरेला विधानसभा क्षेत्र में इस प्रक्रिया के विपरीत बड़ी संख्या में फर्जी मतदाताओं के नाम जोड़ने के प्रमाण सामने आए हैं।
उन्होंने उल्लेख किया कि नरेला विधानसभा के पूर्व कांग्रेस प्रत्याशी मनोज शुक्ला ने मतदाता सूची की जमीनी स्तर पर जांच की और पाया कि 21 फरवरी 2026 को जारी अंतिम मतदाता सूची में कई ऐसे मतदाताओं के नाम दर्ज हैं जो संबंधित पते पर निवास नहीं करते। इस संबंध में जिन मकान मालिकों के पते पर फर्जी मतदाताओं के नाम जोड़े गए हैं, उनमें रतन कॉलोनी, करोंद, भोपाल के निवासी पोखनलाल साहू (मकान नंबर 2), कमलेंद्र कुमार गुप्ता (मकान नंबर 10), और हमीर सिंह यादव (मकान नंबर 21) शामिल हैं।
इन मकान मालिकों ने मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के समक्ष शपथपूर्वक बताया कि उनके मकान के पते पर कई नाम दर्ज हैं। पोखनलाल साहू के घर में केवल 6 लोग रहते हैं, लेकिन एसआईआर के बाद जारी सूची में उनके पते पर लगभग 65 मतदाताओं के नाम हैं।
इसी तरह, हमीर सिंह यादव के घर में 4-5 लोग रहते हैं, लेकिन उनके मकान के पते पर लगभग 45 मतदाताओं के नाम दर्ज हैं। एक अन्य मामले में, कमलेंद्र कुमार गुप्ता के घर में केवल 8 सदस्य हैं, लेकिन पहली सूची में 70 नाम दर्ज पाए गए और एसआईआर के बाद भी 40-45 नाम उनके पते पर बने हुए हैं।
मकान मालिकों का कहना है कि इन नामित व्यक्तियों को वे पहचानते नहीं हैं और वे कभी उनके मकान में निवास नहीं करते। उन्होंने चिंता व्यक्त की कि भविष्य में यदि कोई आपराधिक या अन्य घटना होती है, तो अनावश्यक रूप से उन्हें ही जिम्मेदार ठहराया जा सकता है।
दिग्विजय सिंह ने मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी से आग्रह किया कि मकान मालिकों द्वारा प्रस्तुत शपथ पत्रों के आधार पर इन फर्जी मतदाताओं के नाम तुरंत मतदाता सूची से हटाए जाएं और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के लिए एक स्वतंत्र समिति बनाई जाए।
मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी मध्य प्रदेश ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वस्त किया कि शिकायतों और प्रस्तुत प्रमाणों की विधिवत जांच की जाएगी और आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।