चंद्रबाबू नायडू ने काफिले में की 50% से अधिक कटौती, 12 वाहनों से घटाकर किए सिर्फ 4
सारांश
मुख्य बातें
आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने 14 मई 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ईंधन-मितव्ययिता आह्वान के अनुरूप अपने आधिकारिक काफिले में 50 प्रतिशत से अधिक की कटौती करते हुए वाहनों की संख्या 12 से घटाकर 4 कर दी। अमरावती से जारी एक आधिकारिक विज्ञप्ति के अनुसार, मुख्यमंत्री ने निर्णय लिया है कि वे अब से केवल चार वाहनों के साथ ही यात्रा करेंगे।
फैसले की पृष्ठभूमि
उपमुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से जारी बयान में स्पष्ट किया गया कि पश्चिम एशिया में जारी तनाव और पेट्रोलियम उत्पादों की वैश्विक कमी को देखते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने पेट्रोल-डीजल के उपयोग में कटौती का आह्वान किया था। इसी आह्वान के जवाब में राज्य सरकार ने यह कदम उठाया है।
मुख्यमंत्री नायडू ने बुधवार को अधिकारियों को निर्देश दिया था कि ईंधन की खपत कम करने के लिए काफिले में शामिल वाहनों की संख्या में 50 प्रतिशत की कटौती की जाए। गुरुवार को जब उनका काफिला उंडावल्ली स्थित सरकारी आवास से कैबिनेट बैठक के लिए सचिवालय पहुँचा, तो उसमें केवल चार वाहन ही नज़र आए।
उपमुख्यमंत्री और मंत्रियों की अनुपालना
उपमुख्यमंत्री पवन कल्याण ने भी अपने काफिले का आकार घटा दिया है। उनके कार्यालय ने छोटे काफिले के वीडियो भी जारी किए, जब वे कैबिनेट बैठक में शामिल होने के लिए सचिवालय पहुँचे।
राज्य के आईटी और एचआरडी मंत्री नारा लोकेश ने भी अपने काफिले में वाहनों की संख्या घटाने का फैसला किया। लोकेश, जो मुख्यमंत्री नायडू के पुत्र भी हैं, ने गुरुवार को अपने सुरक्षाकर्मियों को निर्देश दिया कि काफिले में वाहनों की संख्या 50 प्रतिशत तक कम की जाए, जिससे उनके काफिले में केवल दो गाड़ियाँ रह जाएँगी। राज्य के अन्य मंत्रियों ने भी इस पहल का पालन करते हुए अपने काफिलों का आकार घटाया है।
मुख्यमंत्री की व्यापक अपील
मुख्यमंत्री नायडू ने बुधवार को एक सार्वजनिक बैठक में कहा कि बड़े काफिलों में यात्रा करना अब एक आम चलन बन गया है और जनप्रतिनिधियों को अपने काफिलों का आकार कम करके एक मिसाल कायम करनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि सुरक्षा व्यवस्था समझदारीपूर्ण और उद्देश्यपूर्ण होनी चाहिए।
उन्होंने मंत्रियों और अन्य जनप्रतिनिधियों से आग्रह किया कि वे ईंधन बचाने के लिए अपने काफिलों का आकार घटाकर इस पहल का पालन करें। मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री दोनों ने सुझाव दिया कि प्रधानमंत्री मोदी के दिशा-निर्देशों के अनुसार राज्य के सभी लोगों को भी पेट्रोल-डीजल का उपयोग कम करने में सहयोग करना चाहिए।
आगे क्या होगा
यह पहल केंद्र सरकार के ईंधन-संरक्षण अभियान को राज्य स्तर पर अमल में लाने का पहला ठोस उदाहरण बनकर उभरी है। यदि अन्य राज्य भी इस मॉडल को अपनाते हैं, तो सरकारी काफिलों पर होने वाले ईंधन खर्च में उल्लेखनीय कमी संभव है।