आंध्र प्रदेश में पेट्रोल-डीजल संकट: CM चंद्रबाबू नायडू ने कलेक्टरों से मांगी तत्काल रिपोर्ट
सारांश
Key Takeaways
- 421 पेट्रोल पंप बंद: आंध्र प्रदेश के कुल 4,510 ईंधन आउटलेट्स में से 421 पंप घबराहट की खरीदारी के कारण बंद हुए।
- CM का सख्त आदेश: मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने सभी जिला कलेक्टरों को रविवार शाम तक तत्काल कार्य योजना और रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया।
- मांग में 34%25 उछाल: शनिवार को पेट्रोल की बिक्री सामान्य 6,330 किलोलीटर की जगह 8,489 किलोलीटर तक पहुंची।
- आपूर्ति सामान्य से अधिक: शनिवार को 10,345 किलोलीटर पेट्रोल और 14,156 किलोलीटर डीजल की आपूर्ति की गई, फिर भी स्टॉक खत्म हुआ।
- मंत्री की चेतावनी: नागरिक आपूर्ति मंत्री नादेंडला मनोहर ने कालाबाजारी करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी।
- थोक खरीद बनी समस्या: जल क्षेत्र द्वारा ड्रमों में थोक ईंधन खरीद से आपूर्ति पर अतिरिक्त दबाव पड़ा।
अमरावती, 26 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। आंध्र प्रदेश में पेट्रोल और डीजल की किल्लत के बीच मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने रविवार को सभी जिला कलेक्टरों को सख्त निर्देश दिए कि वे ईंधन आपूर्ति संकट से निपटने के लिए तत्काल कार्य योजना लागू करें और शाम तक विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करें। राज्य भर में 421 पेट्रोल पंप बंद होने और जनता में घबराहट की खरीदारी की खबरों ने प्रशासन को हरकत में ला दिया है।
मुख्यमंत्री की टेलीकॉन्फ्रेंस और प्रशासनिक हलचल
मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए मुख्य सचिव जी. साई प्रसाद और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के साथ आपातकालीन टेलीकॉन्फ्रेंस की। इस बैठक में अधिकारियों ने बताया कि राज्य के कुल 4,510 ईंधन आउटलेट्स में से 421 पेट्रोल पंप फिलहाल बंद हैं।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि यह स्थिति अस्वीकार्य है और सभी जिम्मेदार अधिकारियों को जवाबदेह ठहराया जाएगा। उन्होंने कहा कि समस्या के समाधान में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
ईंधन खपत के आंकड़े और घबराहट की खरीदारी
अधिकारियों ने बताया कि सामान्य दिनों में आंध्र प्रदेश में प्रतिदिन औसतन 6,330 किलोलीटर पेट्रोल और 9,048 किलोलीटर डीजल की खपत होती है। लेकिन शनिवार को यह आंकड़ा क्रमशः 8,489 किलोलीटर पेट्रोल और 10,556 किलोलीटर डीजल तक पहुंच गया — यानी सामान्य से करीब 34%25 अधिक।
इस असाधारण मांग के बावजूद शनिवार को डीलरों को 10,345 किलोलीटर पेट्रोल और 14,156 किलोलीटर डीजल की आपूर्ति की गई। फिर भी घबराहट में हो रही खरीदारी के चलते कई पंपों पर लंबी कतारें लगी रहीं और स्टॉक तेजी से समाप्त हो गया।
अधिकारियों ने यह भी बताया कि जल क्षेत्र द्वारा ड्रमों में थोक में ईंधन खरीदे जाने से आपूर्ति श्रृंखला पर अतिरिक्त दबाव बन रहा है, जिससे आम उपभोक्ताओं को परेशानी हो रही है।
मंत्री का स्पष्टीकरण और कालाबाजारियों पर चेतावनी
नागरिक आपूर्ति मंत्री नादेंडला मनोहर ने सार्वजनिक बयान जारी करते हुए स्पष्ट किया कि राज्य में पेट्रोल या डीजल की वास्तविक कमी नहीं है। उन्होंने कहा कि आपूर्ति श्रृंखला में अस्थायी व्यवधान के कारण कुछ पंप बंद हुए थे, जिन्हें जल्द सामान्य किया जा रहा है।
मंत्री ने चेतावनी दी कि जो व्यापारी या व्यक्ति कालाबाजारी में लिप्त पाए जाएंगे, उनके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। यह बयान उस समय आया जब कुछ क्षेत्रों में ईंधन की जमाखोरी की शिकायतें भी सामने आई थीं।
गहरा संदर्भ: भारत-पाकिस्तान तनाव और ईंधन घबराहट का संबंध
गौरतलब है कि यह संकट ऐसे समय में उभरा है जब भारत-पाकिस्तान के बीच सीमा पर तनाव बढ़ा हुआ है और सोशल मीडिया पर ईंधन की कमी को लेकर अफवाहें तेजी से फैल रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह संकट वास्तविक आपूर्ति की कमी से कम और जनमानस में व्याप्त भय से अधिक उपजा है।
यह पहली बार नहीं है जब किसी राज्य में इस तरह की घबराहट की खरीदारी देखी गई हो। कोविड-19 महामारी के दौरान भी देश के कई हिस्सों में आवश्यक वस्तुओं की जमाखोरी और अफवाहों के कारण कृत्रिम संकट पैदा हुए थे। आंध्र प्रदेश में मौजूदा स्थिति उसी पैटर्न की पुनरावृत्ति प्रतीत होती है।
विडंबना यह है कि जब आपूर्ति के आंकड़े सामान्य से अधिक हैं, तब भी पंप खाली हो रहे हैं — यह सिद्ध करता है कि असली समस्या लॉजिस्टिक्स और सूचना प्रबंधन की है, न कि ईंधन भंडार की। सरकार को इस दिशा में संचार रणनीति को भी मजबूत करना होगा।
आगे क्या होगा
मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने सभी जिला कलेक्टरों को रविवार शाम तक स्थिति रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है। माना जा रहा है कि अगले 24 से 48 घंटों में राज्य सरकार ईंधन वितरण को सुव्यवस्थित करने के लिए अतिरिक्त कदम उठा सकती है, जिसमें थोक खरीद पर प्रतिबंध और निगरानी तंत्र को कड़ा करना शामिल हो सकता है।