बैंक ऑफ इंडिया धोखाधड़ी: सीबीआई ने दो आरोपी गिरफ्तार, ₹64.82 करोड़ की फर्जी ट्रांसफर का खुलासा

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
बैंक ऑफ इंडिया धोखाधड़ी: सीबीआई ने दो आरोपी गिरफ्तार, ₹64.82 करोड़ की फर्जी ट्रांसफर का खुलासा

सारांश

बैंक ऑफ इंडिया की लखनऊ शाखा में UP वन निगम के नाम पर फर्जी खाता खुलवाकर ₹64.82 करोड़ हड़पने के मामले में सीबीआई ने दो आरोपियों को गिरफ्तार किया। जाली दस्तावेजों से रची गई इस साजिश में कई राज्यों की फर्में शामिल हैं और जाँच अभी जारी है।

मुख्य बातें

सीबीआई ने बैंक ऑफ इंडिया धोखाधड़ी मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार किया।
आरोपियों ने उत्तर प्रदेश वन निगम के नाम पर फर्जी केवाईसी, नकली अधिकार पत्र और जाली बोर्ड प्रस्तावों से फर्जी बैंक खाता खुलवाया।
खाते में ₹64 करोड़ 82 लाख ट्रांसफर कराए गए; इसमें से ₹6 करोड़ 95 लाख कोलकाता और नई दिल्ली की 6 फर्मों को भेजे गए।
मामला 15 जनवरी को बैंक ऑफ इंडिया की शिकायत पर दर्ज हुआ था।
दोनों आरोपियों को लखनऊ की विशेष अदालत ने 16 मई तक पुलिस हिरासत में भेजा।
साजिश में शामिल अज्ञात सरकारी कर्मचारियों की भूमिका की जाँच जारी है।

केंद्रीय जाँच ब्यूरो (CBI) ने बैंक ऑफ इंडिया के साथ हुई ₹64 करोड़ 82 लाख की बड़ी धोखाधड़ी के मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों ने कथित तौर पर फर्जी केवाईसी दस्तावेजों और जाली बोर्ड प्रस्तावों के ज़रिए उत्तर प्रदेश वन निगम के नाम पर एक फर्जी बैंक खाता खुलवाकर यह रकम हड़पी। यह मामला 15 जनवरी को बैंक ऑफ इंडिया की शिकायत के आधार पर दर्ज किया गया था।

कैसे रची गई साजिश

जाँच एजेंसी के अनुसार, आरोपियों ने कुछ अज्ञात सरकारी कर्मचारियों और अन्य व्यक्तियों के साथ मिलकर सुनियोजित षड्यंत्र रचा। उन्होंने बैंक ऑफ इंडिया की सदर शाखा, लखनऊ में उत्तर प्रदेश वन निगम के नाम पर फर्जी केवाईसी दस्तावेज, नकली अधिकार पत्र और जाली बोर्ड प्रस्ताव प्रस्तुत कर एक धोखाधड़ी वाला बैंक खाता खुलवाया।

इसके बाद सावधि जमा (Fixed Deposit) कराने का बहाना बनाकर उस खाते में ₹64 करोड़ 82 लाख ट्रांसफर करवाए गए। तत्काल धन अंतरण प्रणाली (RTGS/NEFT) के माध्यम से ₹6 करोड़ 95 लाख रुपए कोलकाता और नई दिल्ली की छह अलग-अलग फर्मों के खातों में भेज दिए गए।

धोखाधड़ी का खुलासा कैसे हुआ

इस पूरे फर्जीवाड़े का भंडाफोड़ तब हुआ जब उत्तर प्रदेश वन निगम के अधिकारियों ने बैंक को स्पष्ट किया कि उन्होंने कोई अधिकार पत्र जारी नहीं किया था और गिरफ्तार आरोपियों का निगम से कोई संबंध नहीं है। यह खुलासा होते ही बैंक ने सीबीआई से शिकायत की।

गौरतलब है कि इस तरह की सरकारी संस्थाओं के नाम पर फर्जी खाते खोलकर बैंकों को ठगने की यह पहली घटना नहीं है — विशेषज्ञों के अनुसार ऐसे मामलों में आंतरिक मिलीभगत की आशंका हमेशा बनी रहती है।

सीबीआई की कार्रवाई

मामले की जाँच के दौरान सीबीआई की टीम ने कई राज्यों में व्यापक तलाशी अभियान चलाया। लगातार निगरानी, समन्वित छापेमारी और फील्ड स्तर पर गहन कार्रवाई के बाद फरार आरोपियों का पता लगाकर उन्हें गिरफ्तार किया गया।

अदालती कार्यवाही

गिरफ्तार दोनों आरोपियों को लखनऊ स्थित भ्रष्टाचार निरोधक मामलों की विशेष अदालत में पेश किया गया, जहाँ अदालत ने उन्हें 16 मई तक पुलिस हिरासत में भेज दिया।

आगे क्या होगा

सीबीआई ने स्पष्ट किया है कि इस साजिश में शामिल अन्य लोगों — विशेषकर अज्ञात सरकारी कर्मचारियों — की भूमिका की जाँच अभी जारी है। जाँच एजेंसी के अनुसार आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियाँ भी संभव हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

इसे एक गहरी प्रणालीगत खामी की ओर इशारा करता है। बैंकिंग केवाईसी प्रक्रिया इतनी कमज़ोर कैसे रही कि ₹64 करोड़ से अधिक की रकम एक फर्जी सरकारी खाते में चली गई? आलोचकों का कहना है कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में आंतरिक ऑडिट और रियल-टाइम अलर्ट सिस्टम की कमी ऐसे घोटालों की असली जड़ है। जब तक जवाबदेही केवल गिरफ्तारियों तक सीमित रहेगी और बैंकिंग प्रक्रियाओं में संरचनात्मक सुधार नहीं होगा, ऐसे मामले दोहराते रहेंगे।
RashtraPress
14 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बैंक ऑफ इंडिया धोखाधड़ी मामले में सीबीआई ने क्या किया?
सीबीआई ने इस मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है जिन्होंने कथित तौर पर उत्तर प्रदेश वन निगम के नाम पर फर्जी बैंक खाता खुलवाकर ₹64 करोड़ 82 लाख की धोखाधड़ी की। यह मामला 15 जनवरी को बैंक ऑफ इंडिया की शिकायत पर दर्ज हुआ था।
आरोपियों ने धोखाधड़ी कैसे की?
आरोपियों ने फर्जी केवाईसी दस्तावेज, नकली अधिकार पत्र और जाली बोर्ड प्रस्तावों का इस्तेमाल कर बैंक ऑफ इंडिया की सदर शाखा, लखनऊ में UP वन निगम के नाम पर फर्जी खाता खुलवाया। इसके बाद सावधि जमा के बहाने ₹64.82 करोड़ ट्रांसफर कराए और ₹6.95 करोड़ कोलकाता व नई दिल्ली की छह फर्मों को भेज दिए।
इस धोखाधड़ी का पता कैसे चला?
उत्तर प्रदेश वन निगम के अधिकारियों ने बैंक को सूचित किया कि उन्होंने कोई अधिकार पत्र जारी नहीं किया था और गिरफ्तार आरोपियों का निगम से कोई संबंध नहीं है। इस खुलासे के बाद बैंक ने सीबीआई से शिकायत की।
गिरफ्तार आरोपियों को कितने दिनों की हिरासत मिली?
लखनऊ स्थित भ्रष्टाचार निरोधक मामलों की विशेष अदालत ने दोनों आरोपियों को 16 मई तक पुलिस हिरासत में भेज दिया है। मामले की आगे की सुनवाई उसके बाद होगी।
क्या इस मामले में और गिरफ्तारियाँ हो सकती हैं?
सीबीआई ने स्पष्ट किया है कि इस साजिश में शामिल अज्ञात सरकारी कर्मचारियों और अन्य लोगों की भूमिका की जाँच अभी जारी है। जाँच एजेंसी के अनुसार आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियाँ संभव हैं।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 2 दिन पहले
  2. 2 महीने पहले
  3. 2 महीने पहले
  4. 4 महीने पहले
  5. 4 महीने पहले
  6. 4 महीने पहले
  7. 6 महीने पहले
  8. 8 महीने पहले