'आखिरी सवाल' में त्रिधा चौधरी: 'यह सिर्फ फिल्म नहीं, एक गहरी भावना है'

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'आखिरी सवाल' में त्रिधा चौधरी: 'यह सिर्फ फिल्म नहीं, एक गहरी भावना है'

सारांश

'आखिरी सवाल' सिर्फ एक फिल्म नहीं — यह RSS और बाबरी मस्जिद जैसे दशकों पुराने सवालों को सिनेमाई ज़ुबान देने की कोशिश है। त्रिधा चौधरी और समीरा रेड्डी के किरदार विचारधाराओं की टकराहट को मानवीय चेहरा देते हैं, जबकि राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता निर्देशक अभिजीत वरन उपदेश की जगह तथ्य रखते हैं।

मुख्य बातें

त्रिधा चौधरी ने फिल्म 'आखिरी सवाल' में छात्रा 'सारा' का किरदार निभाया है।
समीरा रेड्डी लंबे अंतराल के बाद इस फिल्म से पर्दे पर वापसी कर रही हैं; उनका किरदार 'डॉ.
पल्लवी' वामपंथी विचारधारा की महिला है।
फिल्म की कहानी RSS और बाबरी मस्जिद जैसे संवेदनशील ऐतिहासिक विषयों पर आधारित है।
फिल्म का निर्देशन राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता निर्देशक अभिजीत वरन ने किया है।
समीरा रेड्डी ने कोलकाता में मिथुन चक्रवर्ती से 20 साल बाद मिलने को विशेष पल बताया।

अभिनेत्री त्रिधा चौधरी फिल्म 'आखिरी सवाल' में एक अहम किरदार निभा रही हैं — एक ऐसी फिल्म जिसकी कहानी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और बाबरी मस्जिद जैसे संवेदनशील ऐतिहासिक विषयों के इर्द-गिर्द बुनी गई है। 14 मई को कोलकाता में आयोजित एक कार्यक्रम में त्रिधा और अभिनेत्री समीरा रेड्डी ने फिल्म के प्रति अपने जुड़ाव और अनुभव साझा किए।

त्रिधा चौधरी का किरदार और सोच

त्रिधा चौधरी ने फिल्म में 'सारा' नाम की एक छात्रा का किरदार निभाया है। उन्होंने कहा, 'मेरा मानना है कि शैक्षिक संस्थान ही वह जगह है, जहाँ भविष्य के नेता तैयार होते हैं। हम सभी की अपनी-अपनी विचारधाराएँ होती हैं और उन पर हमारा अटूट विश्वास होता है।'

त्रिधा ने इस फिल्म को महज एक व्यावसायिक परियोजना मानने से इनकार किया। उनके अनुसार, सिनेमा में वह शक्ति है जो दर्शक को 'सिनेमाई आज़ादी' के साथ गहरे सवालों से रूबरू कराती है। उन्होंने कहा, 'इस फिल्म का उद्देश्य समाज को बाँटना नहीं, बल्कि लोगों को एक गंभीर सोच से जोड़ना है। फिल्म के ज़रिए हमने इस बात पर ज़ोर दिया है कि किसी भी व्यक्ति के जीवन में विचारधारा कितनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।'

समीरा रेड्डी की वापसी और 'डॉ. पल्लवी' का किरदार

अभिनेत्री समीरा रेड्डी इस फिल्म के ज़रिए लंबे अंतराल के बाद पर्दे पर वापसी कर रही हैं। उन्होंने 'डॉ. पल्लवी' का किरदार निभाया है — एक वामपंथी विचारधारा वाली महिला जो कहानी के भीतर स्थापित मान्यताओं को चुनौती देती है और समाज में दबे हुए सवालों को उठाती है।

समीरा ने कोलकाता आने पर प्रसन्नता जताते हुए कहा, 'सिटी ऑफ जॉय में वापस आकर बहुत खुशी हो रही है।' उन्होंने दिग्गज अभिनेता मिथुन चक्रवर्ती से 20 साल बाद मिलने को एक विशेष पल बताया और कहा, 'मिथुन दा को देखकर बहुत अच्छा लगा — यह वैसा पल था जिसके लिए मैं सच में बहुत उत्साहित थी।'

निर्देशक और फिल्म का दृष्टिकोण

फिल्म का निर्देशन राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता निर्देशक अभिजीत वरन ने किया है। समीरा ने स्क्रिप्ट की तारीफ करते हुए कहा, 'सबसे प्रभावशाली बात यह थी कि वह कोई उपदेश नहीं दे रहे थे — वह बस तथ्य सामने रख रहे थे।' यह दृष्टिकोण फिल्म को प्रचारात्मक सिनेमा से अलग करता है और इसे एक विचारोत्तेजक कृति के रूप में स्थापित करता है।

फिल्म की प्रासंगिकता

गौरतलब है कि RSS और बाबरी मस्जिद जैसे विषय भारतीय सार्वजनिक विमर्श में दशकों से केंद्रीय रहे हैं। ऐसे में 'आखिरी सवाल' का इन मुद्दों को सिनेमाई माध्यम से उठाना इसे समसामयिक और संवेदनशील दोनों बनाता है। त्रिधा के अनुसार, फिल्म का लक्ष्य विभाजन नहीं, बल्कि संवाद है — और यही इसे अन्य राजनीतिक थीम वाली फिल्मों से अलग करता है।

फिल्म की रिलीज़ की तारीख अभी आधिकारिक रूप से घोषित नहीं की गई है, लेकिन कोलकाता में इसकी प्रस्तुति ने दर्शकों और आलोचकों की जिज्ञासा बढ़ा दी है।

संपादकीय दृष्टिकोण

कुछ को साहसिक। 'आखिरी सवाल' की असली परीक्षा यह होगी कि क्या यह दोनों ध्रुवों से परे जाकर संवाद की जगह बना पाती है। निर्देशक अभिजीत वरन का 'उपदेश नहीं, तथ्य' वाला दावा उत्साहजनक है, लेकिन इन विषयों की संवेदनशीलता को देखते हुए दर्शक और आलोचक दोनों इसे बारीकी से परखेंगे। मुख्यधारा की कवरेज अक्सर ऐसी फिल्मों को 'विवादास्पद' या 'देशभक्ति' के खाँचे में डाल देती है — जबकि असली सवाल यह है कि क्या सिनेमा इतिहास के जटिल सवालों को न्याय दे पाता है।
RashtraPress
14 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

फिल्म 'आखिरी सवाल' किस विषय पर आधारित है?
'आखिरी सवाल' की कहानी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और बाबरी मस्जिद जैसे ऐतिहासिक और सामाजिक विषयों के इर्द-गिर्द बुनी गई है। फिल्म विचारधाराओं की टकराहट को केंद्र में रखकर समाज में दबे सवालों को उठाती है।
त्रिधा चौधरी ने 'आखिरी सवाल' में कौन-सा किरदार निभाया है?
त्रिधा चौधरी ने फिल्म में 'सारा' नाम की एक छात्रा का किरदार निभाया है। उनके अनुसार यह किरदार उस सोच का प्रतिनिधित्व करता है जो शैक्षिक संस्थानों में विचारधारा की भूमिका को रेखांकित करती है।
समीरा रेड्डी का इस फिल्म में क्या किरदार है?
समीरा रेड्डी ने 'डॉ. पल्लवी' का किरदार निभाया है — एक वामपंथी विचारधारा वाली महिला जो कहानी के भीतर स्थापित मान्यताओं को चुनौती देती है। यह फिल्म लंबे अंतराल के बाद उनकी पर्दे पर वापसी भी है।
'आखिरी सवाल' का निर्देशन किसने किया है?
फिल्म का निर्देशन राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता निर्देशक अभिजीत वरन ने किया है। समीरा रेड्डी के अनुसार, उनका दृष्टिकोण 'उपदेश देने' का नहीं, बल्कि 'तथ्य सामने रखने' का है।
फिल्म में मिथुन चक्रवर्ती की क्या भूमिका है?
स्रोत के अनुसार मिथुन चक्रवर्ती फिल्म से जुड़े हैं और कोलकाता के कार्यक्रम में उपस्थित थे। समीरा रेड्डी ने उनसे 20 साल बाद मिलने को एक विशेष और भावनात्मक पल बताया।
राष्ट्र प्रेस
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