क्या बैंक धोखाधड़ी मामले में सीबीआई कोर्ट ने सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के दो अधिकारियों को तीन साल की सजा सुनाई?

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क्या बैंक धोखाधड़ी मामले में सीबीआई कोर्ट ने सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के दो अधिकारियों को तीन साल की सजा सुनाई?

सारांश

पुणे की सीबीआई अदालत ने सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के अधिकारियों को धोखाधड़ी के मामले में सजा सुनाई। जानिए कैसे जाली दस्तावेजों ने एक गंभीर अपराध को जन्म दिया!

Key Takeaways

  • बैंक धोखाधड़ी मामले में सजा का महत्व।
  • जाली दस्तावेजों का उपयोग गंभीर अपराध है।
  • सीबीआई की कार्रवाई बैंकिंग विश्वास को बनाए रखने में मददगार है।
  • एक मजबूत कानूनी ढांचे की आवश्यकता।
  • भविष्य में ऐसे मामलों की रोकथाम हेतु कठोर दंड।

पुणे, 4 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। पुणे की विशेष सीबीआई अदालत ने सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया की पिंपरी शाखा से संबंधित एक बैंक धोखाधड़ी मामले में दो अधिकारियों को तीन वर्ष की सजा सुनाई। अदालत ने जाली दस्तावेजों के माध्यम से हाउसिंग लोन धोखाधड़ी को गंभीर अपराध मानते हुए दोषियों पर जुर्माना भी लगाया।

सीबीआई ने यह मामला 17 फरवरी 2016 को दर्ज किया था। जांच में सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के पूर्व एजीएम राकेश जायसवाल और अन्य उधारकर्ताओं के खिलाफ बैंक को धोखा देने और आपराधिक साजिश रचने के आरोप सामने आए थे। जांच के दौरान सीबीआई ने विभिन्न साजिशों से जुड़े मामलों में कुल छह चार्जशीट दाखिल की थीं।

विशेष केस नंबर 21/2018 में आरोप था कि तत्कालीन एजीएम राकेश जायसवाल, उधारकर्ता प्रशांत लक्ष्मण विस्पुते, सह-उधारकर्ता प्रियंका प्रशांत विस्पुते, तत्कालीन प्रबंधक नंदकिशोर खैरनार और सहायक प्रबंधक रवि भूषण प्रसाद ने मिलकर 18.75 लाख रुपए का हाउसिंग लोन मंजूर कराया। इस लोन को मंजूर करने के लिए जाली दस्तावेजों का उपयोग किया गया।

अदालत में प्रस्तुत साक्ष्यों के अनुसार, प्रियंका प्रशांत विस्पुते ने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया की पिंपरी शाखा को कुल 24.54 लाख रुपए का वित्तीय नुकसान पहुंचाया। जांच में यह स्पष्ट हुआ कि बैंक अधिकारियों ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए लोन स्वीकृति प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताएं कीं।

मामले की सुनवाई के दौरान दो आरोपियों - तत्कालीन एजीएम राकेश जायसवाल और मुख्य उधारकर्ता प्रशांत लक्ष्मण विस्पुते की मृत्यु हुई, जिसके कारण उनके खिलाफ चल रहा ट्रायल समाप्त कर दिया गया।

लंबे ट्रायल के बाद सीबीआई कोर्ट ने शेष तीन लोगों को दोषी ठहराया। सीबीआई की विशेष अदालत ने सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया की पिंपरी शाखा के पूर्व प्रबंधक नंदकिशोर खैरनार और पूर्व सहायक प्रबंधक रवि भूषण प्रसाद को तीन वर्ष की सश्रम कैद और प्रत्येक पर 75,000 रुपए का जुर्माना लगाया। इसके अलावा सह-उधारकर्ता प्रियंका प्रशांत विस्पुते को दो वर्ष की सश्रम कैद और 25,000 रुपए के जुर्माने की सजा सुनाई।

अदालत ने अपने निर्णय में कहा कि बैंकिंग व्यवस्था में विश्वास बनाए रखने के लिए ऐसे मामलों में कठोर दंड आवश्यक है, ताकि भविष्य में इस तरह की धोखाधड़ी पर अंकुश लगाया जा सके।

Point of View

NationPress
05/01/2026

Frequently Asked Questions

इस मामले में सजा के पीछे क्या कारण थे?
जाली दस्तावेजों का उपयोग कर हाउसिंग लोन धोखाधड़ी करना और बैंक को वित्तीय नुकसान पहुंचाना।
कितने अधिकारियों को सजा सुनाई गई?
दो अधिकारियों को तीन वर्ष की सजा और एक सह-उधारकर्ता को दो वर्ष की सजा सुनाई गई।
सीबीआई ने कब इस मामले की जांच शुरू की थी?
सीबीआई ने यह मामला 17 फरवरी 2016 को दर्ज किया था।
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