हरियाणा में आईडीएफसी बैंक धोखाधड़ी: चार गिरफ्तार, 7 दिन की रिमांड

Click to start listening
हरियाणा में आईडीएफसी बैंक धोखाधड़ी: चार गिरफ्तार, 7 दिन की रिमांड

सारांश

हरियाणा में आईडीएफसी फर्स्ट बैंक के साथ हुए 590 करोड़ रुपए के फ्रॉड में चार लोगों को गिरफ्तार किया गया है। यह मामला तेजी से उभरता जा रहा है, जिसमें आरोपियों को सात दिनों की रिमांड पर भेजा गया है। जानिए इस मामले की पूरी कहानी।

Key Takeaways

  • चार आरोपी गिरफ्तार, 590 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी का मामला।
  • सरकार ने 556 करोड़ रुपए रिकवर किए, जिसमें 22 करोड़ रुपए ब्याज शामिल।
  • मुख्यमंत्री ने फंड की सुरक्षा पर जोर दिया।
  • जांच के लिए उच्च-स्तरीय समिति का गठन।
  • बैंक अधिकारियों पर कार्रवाई की जाएगी।

चंडीगढ़, 25 फरवरी (राष्ट्र प्रेस)। आईडीएफसी फर्स्ट बैंक में लगभग 590 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी के मामले में चार व्यक्तियों को गिरफ्तार किया गया है। इन चारों को बुधवार को अदालत में पेश किया गया, जहाँ उन्हें सात दिनों की पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया। आरोपियों की पहचान ऋभव ऋषि, अभिषेक सिंगला, अभय कुमार और स्वाति सिंगला के रूप में हुई है।

हरियाणा एंटी-करप्शन ब्यूरो के निदेशक जनरल अर्शिंदर सिंह चावला के अनुसार, पंचायत विभाग के फंड के गबन की सूचना 23 फरवरी को एक पत्र के माध्यम से मिली थी, जिसके बाद सरकारी आदेश से मामला दर्ज किया गया। इसके तुरंत बाद, गंगा राम पूनिया के नेतृत्व में विशेष जांच टीम ने 24 घंटे के भीतर आरोपियों को पकड़ लिया। इस पूरे मामले के मुख्य योजनाकार ऋभव ऋषि और अभय कुमार थे।

जानकारी के अनुसार, मुख्य आरोपी ऋभव ऋषि, जो पंचकूला के निवासी हैं, ने छह महीने पहले बैंक में अपनी नौकरी छोड़ी थी, जबकि अभय कुमार ने पिछले साल अगस्त में नौकरी छोड़ी थी।

हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने मंगलवार को विधानसभा में बताया कि सरकार ने 24 घंटे के भीतर फ्रॉड केस से जुड़े 556 करोड़ रुपए रिकवर कर लिए हैं, जिसमें लगभग 22 करोड़ रुपए ब्याज के भी शामिल हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि विभिन्न सरकारी विभागों, बोर्डों और निगमों से संबंधित पूरी राशि आईडीएफसी फर्स्ट बैंक ने उनके विभाग के खाते में वापस जमा कर दी है। उन्होंने यह भी कहा कि हरियाणा सरकार और सीनियर बैंक अधिकारियों के संयुक्त प्रयासों से यह त्वरित रिकवरी संभव हो पाई है।

मुख्यमंत्री ने इस विषय पर जोर देते हुए कहा कि यह फंड हरियाणा के 2.8 करोड़ लोगों की मेहनत की कमाई है और इसका उपयोग पूरी तरह से उनकी भलाई के लिए किया जाएगा। प्रत्येक रुपए को सुरक्षित रखा जाएगा और केवल जनता के हित में खर्च किया जाएगा।

इसके अलावा, मुख्यमंत्री ने मामले की विस्तृत जांच और संबंधित कर्मचारियों एवं अधिकारियों की जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए वित्त सचिव की अध्यक्षता में एक उच्च-स्तरीय समिति का गठन किया है। यह समिति जिम्मेदारी तय करेगी और आवश्यकता पड़ने पर आगे की कार्रवाई की सिफारिश करेगी।

वहीं, बैंक ने संकेत दिया कि गड़बड़ियाँ मुख्य रूप से उसकी चंडीगढ़ शाखा से जुड़ी थीं, जिसमें मध्य और निचले स्तर पर मिलीभगत का आरोप था। बैंक ने स्पष्ट किया कि इस मामले में शामिल किसी भी व्यक्ति, चाहे वह सरकारी अधिकारी हो या बैंक कर्मचारी, को बख्शा नहीं जाएगा।

Point of View

बल्कि आम नागरिकों की मेहनत की कमाई भी दांव पर लग जाती है।
NationPress
26/02/2026

Frequently Asked Questions

आईडीएफसी बैंक धोखाधड़ी मामले में कितने आरोपी गिरफ्तार हुए हैं?
चार आरोपी गिरफ्तार किए गए हैं, जिनकी पहचान ऋभव ऋषि, अभिषेक सिंगला, अभय कुमार और स्वाति सिंगला के रूप में हुई है।
हरियाणा सरकार ने कितने पैसे रिकवर किए हैं?
हरियाणा सरकार ने 556 करोड़ रुपए रिकवर किए हैं, जिसमें लगभग 22 करोड़ रुपए ब्याज के हैं।
इस मामले की जांच कौन कर रहा है?
इस मामले की जांच हरियाणा एंटी-करप्शन ब्यूरो कर रहा है और एक उच्च-स्तरीय समिति का गठन किया गया है।
मुख्यमंत्री ने क्या कहा है?
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि यह फंड हरियाणा के 2.8 करोड़ लोगों की मेहनत की कमाई है और इसका उपयोग उनकी भलाई के लिए किया जाएगा।
क्या बैंक के अधिकारियों पर कोई कार्रवाई होगी?
बैंक ने स्पष्ट किया है कि इस मामले में शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा।
Nation Press