सारंगी के अद्वितीय उस्ताद: भारतीय संगीत का ग्लोबल चेहरा
सारांश
Key Takeaways
- उस्ताद सुल्तान खान ने सारंगी को नई पहचान दी।
- उन्होंने फिल्म संगीत में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया।
- उनका एल्बम ‘पिया बसंती’ बेहद सफल रहा।
- उस्ताद ने पश्चिमी संगीतकारों के साथ भी काम किया।
- उनकी विरासत आज उनके बेटे साबिर खान द्वारा आगे बढ़ाई जा रही है।
नई दिल्ली, 14 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। सारंगी की अद्भुत धुनों को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करने वाले प्रसिद्ध शास्त्रीय संगीतकार और गायक उस्ताद सुल्तान खान ने भारतीय संगीत को नई ऊँचाइयाँ प्रदान कीं। उन्हें ‘सारंगी का सुल्तान’ के नाम से भी जाना जाता है, और उन्होंने पद्म भूषण जैसे प्रतिष्ठित पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
उस्ताद ने न केवल शास्त्रीय संगीत में नयी ऊँचाइयाँ प्राप्त कीं, बल्कि सिनेमा और पॉप संगीत में भी अपनी छाप छोड़ी। उनका जन्म 15 अप्रैल 1940 को राजस्थान के जोधपुर में सीकर घराने में हुआ। उनके दादा उस्ताद अजीम खान और पिता उस्ताद गुलाब खान ने उन्हें बचपन से ही संगीत की कठिन साधना सिखाई। मात्र 11 वर्ष की आयु में उन्होंने अखिल भारतीय संगीत सम्मेलन में अपना पहला सोलो प्रदर्शन किया, जिसने सभी का ध्यान खींचा।
उनकी सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धि ‘गायकी अंग’ थी। उन्होंने सारंगी पर मानव स्वर की तरह भावपूर्ण गायकी का अनुकरण किया। इससे पहले, सारंगी को केवल एक सहायक वाद्य यंत्र के रूप में माना जाता था, लेकिन उस्ताद सुल्तान खान ने इसे एक स्वतंत्र और प्रभावशाली एकल वाद्य के रूप में स्थापित किया। उनकी सारंगी में ध्रुपद और खयाल की गहराई समाई हुई थी, जिससे उन्होंने सारंगी को सामाजिक पूर्वाग्रहों से मुक्त किया और इसे एक सम्मानित स्थान दिलाया।
उस्ताद ने फिल्म संगीत में भी अपनी अनूठी पहचान बनाई। 1999 में प्रदर्शित हिट फिल्म ‘हम दिल दे चुके सनम’ का गाना ‘अलबेला सजन आयो रे’ उन्हें रातोंरात प्रसिद्धि दिलाने में सफल रहा। असली सफलता तब आई जब गायिका चित्रा के साथ उनका पॉप एल्बम ‘पिया बसंती’ रिलीज हुआ। यह एल्बम युवाओं के बीच बेहद लोकप्रिय रहा और इसके लिए उन्हें एमटीवी इंटरनेशनल व्यूअर्स चॉइस अवार्ड से सम्मानित किया गया।
उस्ताद सुल्तान खान ने पश्चिमी दुनिया में भी भारतीय संगीत का परचम लहराया। 1970 के दशक में उन्होंने बीटल्स के सदस्य जॉर्ज हैरिसन के साथ 65 संगीत कार्यक्रम किए। उनकी सारंगी की धुनें ऑस्कर विजेता फिल्म ‘गांधी’ और ‘हीट एंड डस्ट’ जैसी हॉलीवुड फिल्मों में भी सुनी गईं।
2000 के दशक में, उन्होंने तबला वादक जाकिर हुसैन, बिल लासवेल और करश काले के साथ ‘तबला बीट साइंस’ नामक इलेक्ट्रॉनिक फ्यूजन ग्रुप में काम किया। उन्होंने राग आधारित सारंगी को आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक धुनों के साथ खूबसूरती से जोड़ा। इसके अतिरिक्त, उन्होंने पॉप आइकन मैडोना के एल्बम के लिए भी सारंगी बजाई और गिटार वादक वॉरेन कुकुरुलो के साथ भी सहयोग किया।
उस्ताद सुल्तान खान का निधन 27 नवंबर 2011 को हुआ। आज उनकी विरासत को उनके पुत्र साबिर खान आगे बढ़ा रहे हैं, जो शास्त्रीय और समकालीन संगीत को जोड़ने का प्रयास कर रहे हैं। साबिर खान ने ‘दंगल’ और ‘जोधा अकबर’ जैसी फिल्मों में संगीत दिया है।