प्रधानमंत्री मोदी ने बाल गंगाधरनाथ महास्वामीजी के प्रयासों को सराहा
सारांश
Key Takeaways
- प्रधानमंत्री मोदी ने कर्नाटक के मांड्या में श्री गुरु भैरवैक्य मंदिर का उद्घाटन किया।
- उन्होंने बाल गंगाधरनाथ महास्वामीजी के योगदान की सराहना की।
- कर्नाटक की संस्कृति का समन्वय दर्शन और तकनीक के साथ है।
- मठ में शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं की सुविधाएं उपलब्ध हैं।
- सच्ची भक्ति का अर्थ समाज सेवा है।
मांड्या, 15 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को कर्नाटक के अपने दौरे की महत्वपूर्ण जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि कर्नाटक के मांड्या जिले स्थित श्री आदिचुंचनगिरी महासंस्थान मठ में श्री गुरु भैरवैक्य मंदिर का उद्घाटन किया गया।
प्रधानमंत्री ने कहा कि यह पवित्र स्थल हमारे देश की शाश्वत आध्यात्मिक भावना और सेवा एवं ज्ञान की अटूट परंपराओं को श्रद्धांजलि अर्पित करता है। अपनी यात्रा के दौरान, उन्होंने ज्वाला पीठ का भी दौरा किया और श्री कालभैरव मंदिर में प्रार्थना की। इस अवसर पर, उन्होंने परम पूज्य जगद्गुरु श्रीश्रीश्री डॉ. बालगंगाधरनाथ महास्वामीजी को श्रद्धांजलि अर्पित की।
पीएम मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, "आज सुबह कर्नाटक के मांड्या जिले में स्थित श्री आदिचुंचनगिरी महासंस्थान मठ में श्री गुरु भैरवैक्य मंदिर का उद्घाटन किया गया। यह पवित्र स्थल हमारी भूमि के शाश्वत आध्यात्मिक मूल्यों और सेवा एवं ज्ञान की अटूट परंपराओं को श्रद्धांजलि अर्पित करता है।"
एक अन्य पोस्ट में उन्होंने कहा, "श्री आदिचुंचनगिरी महासंस्थान मठ में, ज्वाला पीठ के दर्शन किए और श्री कालभैरव मंदिर में प्रार्थना की।"
उन्होंने आगे लिखा, "परम पूज्य जगद्गुरु श्रीश्रीश्री डॉ. बाल गंगाधरनाथ महास्वामीजी को श्रद्धांजलि अर्पित की। वे आध्यात्मिकता और सेवा के प्रतीक हैं, जिन्होंने समाज के सशक्तीकरण में सराहनीय प्रयास किए हैं। उनके कार्यों ने विश्वभर में अनगिनत लोगों के जीवन को प्रभावित किया है।"
कर्नाटक दौरे के दौरान पीएम मोदी ने एक जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि कर्नाटक एक ऐसा राज्य है, जहाँ ‘तत्वज्ञान’ (दर्शन) और ‘तकनीक’ (प्रौद्योगिकी) का सुंदर समन्वय देखने को मिलता है। उन्होंने मांड्या को ‘शक्कर नगरी’ बताते हुए यहाँ के लोगों की सरलता और अपनापन को भी सराहा। उन्होंने कहा कि श्री आदिचुंचनगिरी महासंस्थान मठ जैसे संस्थान समाज को सही दिशा दिखाते हैं।
प्रधानमंत्री ने भारत की हजारों साल पुरानी परंपराओं का उल्लेख करते हुए कहा कि इस मठ का लगभग 2,000 वर्ष पुराना इतिहास हमारी संस्कृति की निरंतरता को दर्शाता है। उन्होंने बालगंगाधरनाथ महास्वामीजी जैसे महान संतों के योगदान की सराहना की और कहा कि वर्तमान नेतृत्व इस परंपरा को आगे बढ़ा रहा है। ऐसे संत समाज के गरीब और ग्रामीण लोगों की समस्याओं को हल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उनके अनुसार सच्ची भक्ति का अर्थ समाज की सेवा करना और लोगों की सहायता करना है।
प्रधानमंत्री ने मठ द्वारा किए जा रहे सामाजिक कार्यों की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि यहाँ गरीब बच्चों के लिए विद्यालय से लेकर उच्च शिक्षा तक की सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं और सभी को उत्तम स्वास्थ्य सेवाएं भी प्रदान की जाती हैं।