वाईएसआर कांग्रेस ने आंध्र प्रदेश सरकार पर मछली पकड़ने के बंदरगाहों के निजीकरण का आरोप लगाया

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वाईएसआर कांग्रेस ने आंध्र प्रदेश सरकार पर मछली पकड़ने के बंदरगाहों के निजीकरण का आरोप लगाया

सारांश

आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री वाईएस जगन मोहन रेड्डी ने मछली पकड़ने के बंदरगाहों के निजीकरण के खिलाफ कड़ी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि यह मछुआरों की आजीविका को प्रभावित कर रहा है और उन्होंने सरकार से बंदरगाहों को मछुआरों को सौंपने की मांग की।

Key Takeaways

  • मछली पकड़ने के बंदरगाह मछुआरों के हैं।
  • सरकार पर बंदरगाहों के निजीकरण का आरोप।
  • जगन मोहन रेड्डी ने सुधारात्मक कदम उठाने का वादा किया।
  • जुव्वेलादिनnne बंदरगाह का महत्व।
  • मछुआरों के लिए १,२५० मशीनीकृत नावें उपलब्ध कराई जाएंगी।

अमरावती, १५ अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और वाईएसआर कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष वाईएस जगन मोहन रेड्डी ने बुधवार को कहा कि सभी मछली पकड़ने के बंदरगाह मछुआरों के हैं। उन्होंने गठबंधन सरकार की सख्त आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार 'ब्लू इकॉनमी' (नीली अर्थव्यवस्था) को नष्ट कर रही है और बंदरगाहों को निजी हाथों में सौंप रही है।

नेल्लोर जिले के जुव्वेलादिन्ने मछली पकड़ने के बंदरगाह का दौरा करने के बाद मछुआरों को संबोधित करते हुए जगन मोहन रेड्डी ने मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू से सवाल किया कि जुव्वेलादिन्ने बंदरगाह को मछुआरों को क्यों नहीं सौंपा गया।

इसके बजाय, चंद्रबाबू ने एक निजी रक्षा कंपनी को भूमि आवंटित की है, जिससे मछुआरों की आजीविका पर प्रभाव पड़ा है। उन्होंने कहा कि पास के कृष्णपटनम बंदरगाह पर काफी जमीन उपलब्ध है, लेकिन फिर भी उन्होंने व्यावसायिक कारणों से यहाँ की जमीन देने का निर्णय लिया।

उन्होंने मछुआरों से कहा, "मैं आपको यकीन दिलाता हूं कि आने वाले दिनों में परिस्थितियां बदलेंगी और हम सभी बंदरगाह मछुआरों के लिए समर्पित कर देंगे और ब्लू इकॉनमी को सुधारेंगे।"

उन्होंने यह भी कहा कि यह वाईएसआरसीपी सरकार ही थी जिसने तट के किनारे सुविधाओं को सुनिश्चित करने के लिए २६,००० करोड़ रुपए की लागत से चार बंदरगाह और दस मछली पकड़ने वाले बंदरगाहों के साथ-साथ छह मछली लैंडिंग केंद्रों की योजना बनाई थी, और सभी आवश्यक अनुमतियां प्राप्त की थीं।

उन्होंने कहा, "हमने मार्च २०२४ में जुव्वलादिन्ने का काम पूरा कर लिया था और इसे देश को समर्पित भी कर दिया था, लेकिन चुनाव आचार संहिता के चलते हम इसका औपचारिक उद्घाटन नहीं कर पाए। बाद में, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसका उद्घाटन किया। अब सवाल यह है कि चंद्रबाबू ने मछुआरों को यह बंदरगाह क्यों नहीं सौंपा? इसका जवाब इस बात से साफ हो जाता है कि बंदरगाह की भूमि एक निजी पार्टी को आवंटित कर दी गई थी, जो धीरे-धीरे इसके निजीकरण की दिशा में ले जा रही है।"

उन्होंने कसम खाई कि वे सरकार को यह भूमि किसी भी निजी पार्टी को सौंपने नहीं देंगे।

उन्होंने कहा कि सत्ता में आने के बाद हम सुधारात्मक कदम उठाएंगे और सभी बंदरगाहों को मछुआरों को समर्पित कर देंगे। हमारी योजना के अनुसार, हम ९० प्रतिशत सब्सिडी पर १,२५० मशीनीकृत नावें उपलब्ध कराएंगे। इससे २५,००० से अधिक परिवारों को लाभ होगा, क्योंकि हर नाव का उपयोग मछुआरों के एक समूह द्वारा किया जाएगा, जिससे ब्लू इकॉनमी को भी बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने चंद्रबाबू नायडू पर आरोप लगाया कि वे अपने व्यावसायिक एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए मछुआरों की आजीविका को नुकसान पहुंचा रहे हैं।

Point of View

बल्कि यह राजनीतिक गलियारों में भी एक महत्वपूर्ण चर्चा का विषय बन गया है।
NationPress
18/04/2026

Frequently Asked Questions

वाईएसआर कांग्रेस ने बंदरगाहों के निजीकरण पर क्या कहा?
वाईएसआर कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि सरकार मछली पकड़ने के बंदरगाहों को निजी हाथों में सौंप रही है, जिससे मछुआरों की आजीविका पर खतरा मंडरा रहा है।
क्या जगन मोहन रेड्डी ने कोई सुधारात्मक कदम उठाने का वादा किया है?
हां, जगन मोहन रेड्डी ने कहा है कि सत्ता में आने के बाद वे सभी बंदरगाहों को मछुआरों को समर्पित करेंगे।
जुव्वेलादिनnne बंदरगाह का क्या महत्व है?
जुव्वेलादिनnne बंदरगाह मछुआरों के लिए एक महत्वपूर्ण स्थान है, और इसकी सही प्रबंधन से उनकी आजीविका में सुधार हो सकता है।
क्या यह मामला चुनावी राजनीति से जुड़ा है?
हां, यह मामला चुनाव आचार संहिता से प्रभावित है, जिससे इसका औपचारिक उद्घाटन नहीं हो सका।
क्या जगन मोहन रेड्डी ने मछुआरों के लिए कोई योजना बनाई है?
जगन मोहन रेड्डी ने १,२५० मशीनीकृत नावों की योजना बनाई है, जिससे २५,००० से अधिक परिवारों को लाभ होगा।
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