अमेरिका-ईरान वार्ता के चलते भारतीय शेयर बाजार में आई मजबूती
सारांश
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मुंबई, 18 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। अमेरिका और ईरान के मध्य चल रही शांति वार्ता की संभावनाओं ने इस सप्ताह भारतीय शेयर बाजार को एक मजबूत समर्थन प्रदान किया है। सकारात्मक वैश्विक संकेत, रुपए की मजबूती और कच्चे तेल की कीमतों में कमी से निवेशकों का विश्वास बढ़ा है, जिसके परिणामस्वरूप बाजार में व्यापक खरीदारी हुई।
इस हफ्ते के अंतिम कारोबारी दिन शुक्रवार को, सेंसेक्स 504.86 अंक यानी 0.65 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 78,493.54 पर बंद हुआ। वहीं, निफ्टी 156.80 अंक या 0.65 प्रतिशत बढ़कर 24,353.55 के स्तर पर बंद हुआ।
सेक्टर के स्तर पर, लगभग सभी क्षेत्रों में खरीदारी का माहौल बना रहा। बजाज ब्रोकिंग रिसर्च की रिपोर्ट के अनुसार, बाजार का रुख पूरे हफ्ते सकारात्मक बना रहा। खासकर निफ्टी एफएमसीजी, मेटल और ऑयल एंड गैस क्षेत्रों में 1 से 3 प्रतिशत तक की वृद्धि हुई, जबकि आईटी क्षेत्र अपेक्षाकृत कमजोर रहा।
बड़े सूचकांकों की तुलना में, मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों ने बेहतर प्रदर्शन किया। निफ्टी मिडकैप इंडेक्स में लगभग 1.27 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जबकि स्मॉलकैप इंडेक्स लगभग 1.48 प्रतिशत चढ़ा।
विश्लेषकों के अनुसार, भारतीय बाजारों में इस सप्ताह धीरे-धीरे लेकिन स्थिर रिकवरी देखने को मिली। वैश्विक माहौल में सुधार और कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट ने निवेशकों के विश्वास को मजबूती दी। हालांकि, बाजार में सतर्कता का माहौल भी बना रहा, लेकिन लगातार खरीदारी और जोखिम लेने की बढ़ती क्षमता ने सूचकांकों को मजबूती दी।
पोनमुडी आर ने कहा कि हाल के हफ्तों के मुकाबले इस बार बाजार का उतार-चढ़ाव काफी नियंत्रित रहा। गिरावट आने पर निवेशकों ने खरीदारी की, जो इस बात का संकेत है कि बाजार का सेंटिमेंट धीरे-धीरे मजबूत हो रहा है। हालांकि, अभी भी बाजार ऊपरी स्तर पर निर्णायक ब्रेकआउट देने में सफल नहीं हुआ है, जिससे यह स्पष्ट है कि ट्रेंड अभी बदलाव के दौर में है।
बाजार का रुख अब सतर्क आशावाद की ओर बढ़ता दिख रहा है। कच्चे तेल की नरम कीमतें, बेहतर वैश्विक संकेत और स्थिर निवेश प्रवाह इस रिकवरी को सहारा दे रहे हैं। निकट भविष्य में गिरावट का जोखिम सीमित नजर आ रहा है, जबकि तेजी की संभावना धीरे-धीरे बढ़ रही है।
इस बीच, विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) के रुख में भी सुधार के संकेत मिले हैं। लंबे समय से बिकवाली करने के बाद, एफआईआई ने हफ्ते के अंतिम तीन सत्रों में खरीदारी की, जिससे बाजार को सहारा मिला। हालांकि, पूरे हफ्ते के आधार पर उनका निवेश लगभग 250 करोड़ रुपए की हल्की निकासी के साथ नकारात्मक ही रहा।
दूसरी ओर, घरेलू संस्थागत निवेशक (डीआईआई), जो अब तक बाजार को लगातार समर्थन दे रहे थे, हफ्ते के अंतिम सत्रों में मुनाफावसूली करते नजर आए। पूरे हफ्ते में डीआईआई की ओर से करीब 6,300 करोड़ रुपए की निकासी दर्ज की गई।
इसके बावजूद, बाजार में स्थिरता बनाए रखने में घरेलू निवेशकों की भूमिका अब भी मजबूत बनी हुई है और वे आगे भी बाजार को संरचनात्मक सहारा देते रहेंगे।