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एमआरसीसीओएन 2026: डॉ. मधुचंदा कर बोलीं — कैंसर इलाज के बाद रीहैबिलिटेशन अनिवार्य, शिक्षा में समानता जरूरी

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एमआरसीसीओएन 2026: डॉ. मधुचंदा कर बोलीं — कैंसर इलाज के बाद रीहैबिलिटेशन अनिवार्य, शिक्षा में समानता जरूरी

सारांश

कोलकाता के एमआरसीसीओएन 2026 सम्मेलन में BJP की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. मधुचंदा कर ने कहा कि कैंसर उपचार के बाद रीहैबिलिटेशन उतना ही ज़रूरी है जितनी सर्जरी — साथ ही शिक्षा में समानता और भारतीय इतिहास के पुनर्लेखन की भी पुरज़ोर वकालत की।

मुख्य बातें

मधुचंदा कर ने 13 सितंबर 2026 को कोलकाता में एमआरसीसीओएन 2026 को संबोधित किया।
उन्होंने कहा कि दवा और सर्जरी के साथ-साथ रीहैबिलिटेशन को उपचार का अनिवार्य हिस्सा बनाया जाना चाहिए।
ब्रेस्ट कैंसर सर्जरी के बाद हाथ में सूजन जैसी समस्याओं के लिए समय पर पुनर्वास को समाधान बताया।
सभी नागरिकों के लिए समान शिक्षा अवसर की माँग की और शिक्षा प्रणाली को 'सबका साथ, सबका विकास' के अनुरूप बताया।
गृह मंत्री अमित शाह के इतिहास लेखन संबंधी बयान का समर्थन करते हुए छत्रपति शिवाजी महाराज जैसे नायकों को पाठ्यक्रम में उचित स्थान देने की वकालत की।

भारतीय जनता पार्टी (BJP) की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और वरिष्ठ ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. मधुचंदा कर ने 13 सितंबर 2026 को कोलकाता में आयोजित चिकित्सा सम्मेलन एमआरसीसीओएन 2026 में कहा कि मरीजों को रोगमुक्त करना ही स्वास्थ्य प्रणाली का एकमात्र लक्ष्य नहीं होना चाहिए — दवा और सर्जरी के साथ-साथ चिकित्सा पुनर्वास (रीहैबिलिटेशन) को भी उपचार का अनिवार्य हिस्सा बनाया जाना चाहिए। इस सम्मेलन में उन्होंने चिकित्सा पुनर्वास, शिक्षा व्यवस्था और भारतीय इतिहास लेखन — तीनों विषयों पर अपने विचार साझा किए।

रीहैबिलिटेशन क्यों अनिवार्य है

डॉ. कर ने कहा कि आमतौर पर चिकित्सा परामर्श में मरीजों को दवा लेने और सर्जरी कराने की सलाह दी जाती है, परंतु उपचार के बाद पुनर्वास की भूमिका के बारे में पर्याप्त जानकारी नहीं दी जाती। उनके अनुसार दैनिक गतिविधियों को सामान्य बनाए रखने और जीवन की गुणवत्ता सुधारने के लिए रीहैबिलिटेशन उतना ही ज़रूरी है जितना उपचार स्वयं।

उन्होंने ब्रेस्ट कैंसर का उदाहरण देते हुए स्पष्ट किया कि सर्जरी के बाद कई मरीजों के हाथ में सूजन और भारीपन की समस्या उत्पन्न हो जाती है। उन्होंने कहा, 'यदि सही समय पर उचित रीहैबिलिटेशन कराया जाए तो मरीज पूर्णतः सामान्य जीवन जी सकते हैं।' डॉ. कर ने ज़ोर दिया कि डॉक्टरों और मरीजों — दोनों को बीमारी के साथ-साथ जीवन की गुणवत्ता पर भी ध्यान देना चाहिए।

स्वास्थ्य प्रणाली की जिम्मेदारी

डॉ. कर के अनुसार मरीजों को केवल रोगमुक्त करना पर्याप्त नहीं है; उन्हें बेहतर और आत्मनिर्भर जीवन जीने में सक्षम बनाना भी स्वास्थ्य प्रणाली की समान जिम्मेदारी है। यह ऐसे समय में आया है जब भारत में कैंसर के मामले तेज़ी से बढ़ रहे हैं और उपचार के बाद मरीजों की पुनर्वास सुविधाओं तक पहुँच सीमित बनी हुई है।

शिक्षा में समानता का आह्वान

शिक्षा और धर्मनिरपेक्षता के प्रश्न पर डॉ. कर ने कहा कि यदि सभी नागरिक समान हैं, तो शिक्षा व्यवस्था में भी समानता होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि सभी भारतीयों को समान अवसर और समान शिक्षा मिलनी चाहिए। 'सबका साथ, सबका विकास, सबका प्रयास' की भावना का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि शिक्षा प्रणाली को भी उसी तरह समावेशी और न्यायसंगत होना चाहिए।

भारतीय इतिहास लेखन पर रुख

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा इतिहास लेखन को लेकर दिए गए बयान का समर्थन करते हुए डॉ. कर ने कहा कि भारतीय इतिहास की पाठ्य-पुस्तकों में मुख्यतः आक्रमणकारियों पर अधिक ध्यान केंद्रित रहा है, जबकि देश के महान योद्धाओं और ऐतिहासिक नायकों को उचित स्थान नहीं मिला। उन्होंने छत्रपति शिवाजी महाराज जैसे वीर व्यक्तित्वों का विशेष उल्लेख करते हुए कहा कि नई पीढ़ी को इनके योगदान से अवगत कराना आवश्यक है।

उनके अनुसार शिक्षा नीति में आवश्यक बदलाव कर नई पीढ़ी को देश के समृद्ध इतिहास और सांस्कृतिक विरासत से जोड़ना 'समय की जरूरत' है। गौरतलब है कि इतिहास के पाठ्यक्रम में बदलाव का प्रश्न हाल के वर्षों में राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) बहस का केंद्र बन चुका है।

आगे क्या

एमआरसीसीओएन 2026 जैसे मंचों से चिकित्सा पुनर्वास को मुख्यधारा की स्वास्थ्य नीति में शामिल करने की माँग तेज़ होने की संभावना है। डॉ. कर का यह संबोधन चिकित्सा, नीति और सामाजिक विमर्श — तीनों क्षेत्रों को एक साथ छूता है, और यह रेखांकित करता है कि कैंसर देखभाल में पुनर्वास को उपचार के बराबर प्राथमिकता देने की दिशा में जागरूकता अभियान की अभी भी आवश्यकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

और इस अंतर को पाटने की ज़िम्मेदारी नीति-निर्माताओं की उतनी ही है जितनी चिकित्सकों की। हालाँकि, एक ही मंच से रीहैबिलिटेशन, शिक्षा समानता और इतिहास पुनर्लेखन — तीन विषयों को एक साथ उठाना इस संदेश को राजनीतिक रंग दे सकता है, जिससे चिकित्सीय तर्क की विश्वसनीयता प्रभावित हो सकती है। मुख्यधारा की मीडिया कवरेज प्रायः रीहैबिलिटेशन के व्यावहारिक पहलुओं को नज़रअंदाज़ कर राजनीतिक बयानों पर केंद्रित हो जाती है — जबकि असली ज़रूरत यह है कि कैंसर देखभाल में पुनर्वास को बीमा कवर और सरकारी प्रोटोकॉल का हिस्सा बनाया जाए।
RashtraPress
14 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एमआरसीसीओएन 2026 क्या है और इसमें डॉ. मधुचंदा कर ने क्या कहा?
एमआरसीसीओएन 2026 कोलकाता में आयोजित एक चिकित्सा सम्मेलन है। इसमें BJP की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और वरिष्ठ ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. मधुचंदा कर ने कहा कि कैंसर के इलाज में दवा-सर्जरी के साथ रीहैबिलिटेशन को भी समान महत्व देना चाहिए ताकि मरीज बेहतर जीवन जी सकें।
कैंसर मरीजों के लिए रीहैबिलिटेशन क्यों ज़रूरी है?
डॉ. कर के अनुसार सर्जरी के बाद कई मरीजों को हाथ में सूजन और भारीपन जैसी समस्याएँ होती हैं। सही समय पर उचित पुनर्वास से मरीज सामान्य दैनिक जीवन में लौट सकते हैं। उनका मानना है कि मरीज को रोगमुक्त करने के साथ-साथ उसे आत्मनिर्भर जीवन जीने में सक्षम बनाना भी स्वास्थ्य प्रणाली की जिम्मेदारी है।
डॉ. मधुचंदा कर ने शिक्षा व्यवस्था पर क्या विचार रखे?
उन्होंने कहा कि यदि सभी नागरिक समान हैं तो शिक्षा व्यवस्था में भी समानता होनी चाहिए। 'सबका साथ, सबका विकास, सबका प्रयास' की भावना के अनुरूप शिक्षा प्रणाली को समावेशी और न्यायसंगत बनाने की वकालत उन्होंने की।
डॉ. कर ने भारतीय इतिहास लेखन पर क्या कहा?
उन्होंने गृह मंत्री अमित शाह के इतिहास लेखन संबंधी बयान का समर्थन करते हुए कहा कि पाठ्यपुस्तकों में आक्रमणकारियों को अधिक और देश के वीर नायकों जैसे छत्रपति शिवाजी महाराज को कम स्थान मिला है। उन्होंने शिक्षा नीति में बदलाव कर नई पीढ़ी को भारत की सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने की ज़रूरत बताई।
ब्रेस्ट कैंसर के बाद रीहैबिलिटेशन कैसे मदद करता है?
डॉ. कर ने बताया कि ब्रेस्ट कैंसर सर्जरी के बाद हाथ में लिम्फेडेमा (सूजन व भारीपन) एक आम समस्या है। समय पर उचित फिज़ियोथेरेपी और पुनर्वास से इसे काफ़ी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है और मरीज अपनी सामान्य दिनचर्या पर वापस लौट सकते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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