भाभाट्रॉन-2 से अब 10 गुना अधिक कैंसर मरीजों का इलाज, भारत ने किर्गिस्तान को दिया कोबाल्ट-60 स्रोत
सारांश
मुख्य बातें
भारत की स्वास्थ्य कूटनीति के तहत किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक स्थित नेशनल सेंटर ऑफ ऑन्कोलॉजी एंड हेमाटोलॉजी में भारत-प्रदत्त भाभाट्रॉन-2 कैंसर उपचार मशीन अब प्रतिदिन पहले की तुलना में 10 गुना अधिक मरीजों का इलाज करने में सक्षम हो गई है। यह संभव हुआ है नए कोबाल्ट-60 स्रोत की स्थापना के बाद, जिसे भारत सरकार ने किर्गिस्तान को उपहार के रूप में दिया है।
उच्चस्तरीय दौरे का विवरण
किर्गिस्तान के स्वास्थ्य मंत्री दामिरबेक ओस्मोनोव और किर्गिस्तान में भारत के राजदूत बीरेंद्र सिंह यादव ने 28 जुलाई 2025 को सोमवार को बिश्केक स्थित इस केंद्र का संयुक्त दौरा किया। दोनों अधिकारियों ने नए कोबाल्ट-60 स्रोत की स्थापना के बाद भाभाट्रॉन-2 मशीन के परिचालन की जानकारी ली और इसकी बढ़ी हुई क्षमता का जायजा लिया।
किर्गिस्तान में भारतीय दूतावास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इस दौरे की जानकारी साझा करते हुए लिखा, 'किर्गिस्तान गणराज्य के स्वास्थ्य मंत्री महामहिम दामिरबेक ओस्मोनोव और राजदूत बीरेंद्र सिंह यादव ने नेशनल सेंटर ऑफ ऑन्कोलॉजी एंड हेमेटोलॉजी का दौरा किया और नए कोबाल्ट-60 स्रोत को लगाने के बाद भाभाट्रॉन-2 कैंसर इलाज मशीन के कामकाज के बारे में जानकारी ली।'
भाभाट्रॉन-2 और कोबाल्ट-60 की अहमियत
भाभाट्रॉन-2 मशीन को भारत सरकार ने पहले ही बिश्केक के नेशनल सेंटर ऑफ ऑन्कोलॉजी एंड हेमाटोलॉजी को उपहार के रूप में दिया था। यह मशीन कैंसर रोगियों के रेडियोथेरेपी उपचार में उपयोग होती है। दूतावास के अनुसार, कोबाल्ट-60 स्रोत को बदलने के बाद अब यह मशीन एक दिन में पहले की तुलना में 10 गुना अधिक मरीजों का इलाज कर सकती है — जो किर्गिस्तान के कैंसर रोगियों के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
दूतावास ने स्पष्ट किया कि कोबाल्ट-60 स्रोत की यह पुनः-स्थापना भारत सरकार और भारत के लोगों की ओर से किर्गिस्तान गणराज्य को दिया गया उपहार है। गौरतलब है कि कोबाल्ट-60 रेडियोआइसोटोप का उपयोग रेडियोथेरेपी में कैंसर कोशिकाओं को नष्ट करने के लिए किया जाता है, और समय के साथ इसकी सक्रियता घटती है, इसलिए इसे नियमित अंतराल पर बदलना आवश्यक होता है।
भारत-किर्गिस्तान द्विपक्षीय संबंध
यह स्वास्थ्य पहल ऐसे समय में आई है जब दोनों देशों के बीच राजनयिक संपर्क भी गहरा हो रहा है। पिछले सप्ताह विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने किर्गिस्तान के चोल्पोन अता शहर में शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के विदेश मंत्रियों की बैठक के दौरान किर्गिस्तान के विदेश मंत्री झीनबेक कुलुबाएव से मुलाकात की।
इस बैठक में दोनों मंत्रियों ने भारत-किर्गिस्तान रणनीतिक साझेदारी में हुई प्रगति की समीक्षा की और प्रमुख क्षेत्रों में सहयोग को और मजबूत करने के तरीकों पर विचार-विमर्श किया। विदेश राज्य मंत्री सिंह ने एक्स पर लिखा, 'भारत-किर्गिस्तान रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाने की अपनी साझा प्रतिबद्धता को दोहराया।'
आम जनता पर असर
किर्गिस्तान में कैंसर के मरीजों की संख्या को देखते हुए भाभाट्रॉन-2 की बढ़ी हुई क्षमता सीधे हज़ारों रोगियों के उपचार को प्रभावित करेगी। पहले जहाँ सीमित संख्या में मरीज प्रतिदिन उपचार पा सकते थे, अब यह संख्या 10 गुना तक बढ़ सकती है। यह पहल भारत की 'स्वास्थ्य कूटनीति' और पड़ोसी व मित्र देशों के साथ विकास साझेदारी के व्यापक ढाँचे का हिस्सा है।
आगे चलकर यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि दोनों देश स्वास्थ्य, शिक्षा और व्यापार के क्षेत्रों में अपनी साझेदारी को किस दिशा में ले जाते हैं, विशेषकर SCO के बढ़ते महत्व के संदर्भ में।