इबोला से लड़ाई तेज़: WHO और अफ्रीका CDC ने कंपाला में IMST लॉन्च की, युगांडा-कांगो को मिलेगा सीधा सहयोग
सारांश
मुख्य बातें
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO), अफ्रीका सेंटर्स फॉर डिज़ीज़ कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (अफ्रीका CDC) और युगांडा सरकार ने मिलकर 28 जून 2025 को युगांडा की राजधानी कंपाला स्थित मकेरेरे यूनिवर्सिटी में 'जॉइंट कॉन्टिनेंटल इंसिडेंट मैनेजमेंट सपोर्ट टीम' (IMST) का औपचारिक शुभारंभ किया। अफ्रीका में बंडिबुग्यो इबोला वायरस के बढ़ते प्रकोप के बीच यह कदम महाद्वीप की सामूहिक स्वास्थ्य आपातकालीन क्षमता को नई धार देने के उद्देश्य से उठाया गया है।
IMST क्या है और यह कैसे काम करेगी
IMST एक साझा ऑपरेशनल प्लेटफ़ॉर्म है जो 'एक टीम, एक योजना और एक बजट' के सिद्धांत पर संचालित होगी। यह मंच निगरानी, प्रयोगशाला प्रणालियों, केस मैनेजमेंट, संक्रमण नियंत्रण, आपातकालीन लॉजिस्टिक्स, जोखिम संचार, सूचना प्रबंधन और साझेदार समन्वय के विशेषज्ञों को एक छत के नीचे लाता है।
यह प्लेटफ़ॉर्म युगांडा, डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ़ कांगो (DRC) और जोखिम वाले पड़ोसी देशों को एकीकृत तकनीकी सहायता व ऑपरेशनल समन्वय मुहैया कराएगा।
अफ्रीका CDC का आधिकारिक बयान
अफ्रीका CDC ने शनिवार देर रात जारी बयान में कहा, 'यह लॉन्च अफ्रीका के सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकालीन ढाँचे को मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम है। यह अफ्रीका CDC, WHO और अफ्रीकी संघ (AU) के सदस्य देशों की उस साझा प्रतिबद्धता को दर्शाता है जिसके तहत वे तेज़ी से, बेहतर समन्वय के साथ और देशों के नेतृत्व में जटिल सार्वजनिक स्वास्थ्य खतरों से निपटने की तैयारी कर रहे हैं।'
अफ्रीकी संघ की विशेष सार्वजनिक स्वास्थ्य एजेंसी के अनुसार यह नया प्लेटफ़ॉर्म क्षेत्रीय तैयारी और सीमा-पार सहयोग को अफ्रीका की स्वास्थ्य सुरक्षा के अनिवार्य स्तंभों के रूप में स्थापित करता है।
इबोला: एक घातक वायरस की पृष्ठभूमि
इबोला एक अत्यंत संक्रामक और जानलेवा वायरल बीमारी है जो इंसानों के अलावा बंदर व चिंपैंज़ी जैसे प्राइमेट्स को भी प्रभावित करती है। यह वायरस फ्रूट बैट, साही और अन्य जंगली जानवरों से मनुष्यों में आता है और फिर संक्रमित व्यक्ति के रक्त, स्राव या शरीर के तरल पदार्थों के सीधे संपर्क से फैलता है।
विशेषज्ञों के अनुसार इबोला की औसत केस फ़ेटैलिटी रेट लगभग 50 प्रतिशत है, जबकि पिछले प्रकोपों में यह दर 25 से 90 प्रतिशत के बीच रही है। इस बीमारी का पहला प्रकोप मध्य अफ्रीका के उष्णकटिबंधीय वर्षावनों के निकट दूरदराज के गाँवों में दर्ज किया गया था।
2014-16 का विनाशकारी प्रकोप और अब की चुनौती
पश्चिम अफ्रीका में 2014 से 2016 के बीच फैला इबोला प्रकोप 1976 में वायरस की खोज के बाद से अब तक का सबसे बड़ा और सबसे जटिल प्रकोप था। इसकी शुरुआत गिनी से हुई और यह भूमि सीमाओं के रास्ते सिएरा लियोन व लाइबेरिया तक पहुँच गया। इस दौरान अब तक के सभी प्रकोपों की तुलना में सर्वाधिक मामले और मौतें दर्ज की गईं।
यह ऐसे समय में आया है जब बंडिबुग्यो इबोला स्ट्रेन एक बार फिर युगांडा और कांगो में सक्रिय है। IMST की स्थापना इस बात का संकेत है कि अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य संस्थाएँ इस बार खंडित प्रतिक्रिया की बजाय एकीकृत क्षेत्रीय रणनीति अपनाने पर ज़ोर दे रही हैं।