कांगो में इबोला विस्फोट: 515 पुष्ट मामले, युगांडा तक फैला संक्रमण — WHO ने जारी किया उच्च जोखिम अलर्ट
सारांश
मुख्य बातें
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने 9 जून 2026 को चेतावनी दी कि डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (DRC) में इबोला का प्रकोप तेज़ी से विस्तार ले रहा है और यह सीमा पार कर युगांडा तक पहुँच चुका है। संगठन के अनुसार, DRC और उसके उन पड़ोसी देशों के लिए जोखिम का स्तर 'बहुत अधिक' है, जो प्रभावित क्षेत्रों के साथ स्थलीय सीमाएँ साझा करते हैं।
मौजूदा स्थिति और मामलों का ब्यौरा
उपलब्ध आँकड़ों के अनुसार, रविवार तक DRC में इबोला के 515 पुष्ट मामले सामने आ चुके हैं, जिनमें 91 मौतें शामिल हैं। युगांडा में 19 पुष्ट मामले दर्ज किए गए हैं, जिनमें 2 मौतें और एक संभावित जानलेवा मामला भी है। WHO के अनुसार, युगांडा के सभी मामले महामारी विज्ञान की दृष्टि से DRC के प्रकोप से सीधे जुड़े हैं — इनमें बाहर से आए संक्रमण (imported cases) और स्वास्थ्यकर्मियों सहित संपर्क में आए लोगों में द्वितीयक संचरण (secondary transmission) दोनों के प्रमाण हैं।
WHO ने स्पष्ट किया है कि शेष अफ्रीकी क्षेत्रों और वैश्विक स्तर पर फिलहाल इबोला संक्रमण का खतरा 'कम' बना हुआ है।
महाद्वीपीय स्तर पर समन्वित प्रतिक्रिया
5 जून 2026 को अफ्रीका सेंटर्स फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (Africa CDC) और WHO ने संयुक्त रूप से एक महाद्वीपीय इबोला तैयारी एवं प्रतिक्रिया योजना की शुरुआत की। इस योजना के तहत 51.8 करोड़ अमेरिकी डॉलर जुटाने का लक्ष्य रखा गया है, ताकि अफ्रीकी देशों को प्रकोप की समय रहते पहचान, तैयारी और प्रभावी नियंत्रण में सहायता मिल सके। राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण और अन्य साझेदार संगठन मिलकर इस प्रकोप से निपटने के लिए कई कदम उठा रहे हैं।
बुंडीबुग्यो वायरस: बीमारी की प्रकृति और फैलाव
इस बार के प्रकोप का कारण बुंडीबुग्यो वायरस बीमारी (BVD) है, जो इबोला का एक गंभीर और अक्सर जानलेवा स्वरूप है। इस वायरस के उद्गम के बारे में माना जाता है कि यह फ्रूट बैट (चमगादड़) से उत्पन्न होता है। यह संक्रमित जानवरों के रक्त या स्राव अथवा संक्रमित मनुष्यों के शारीरिक तरल पदार्थों के संपर्क में आने से फैल सकता है। BVD का इन्क्यूबेशन पीरियड 2 से 21 दिनों का होता है और संक्रमित व्यक्ति तब तक बीमारी नहीं फैलाते जब तक उनमें लक्षण प्रकट न हों।
गौरतलब है कि बुंडीबुग्यो वेरिएंट, पिछले कई प्रकोपों के लिए ज़िम्मेदार जैरे स्ट्रेन की तुलना में कम सामान्य है, लेकिन यह गंभीर बीमारी और मृत्यु का कारण बन सकता है। इस प्रकोप की आधिकारिक घोषणा 15 मई 2026 को की गई थी।
इबोला: ऐतिहासिक संदर्भ
इबोला ऑर्थोइबोलावायरस से होने वाली एक गंभीर बीमारी है, जो फिलोविरिडे परिवार का हिस्सा है और मनुष्यों तथा अन्य प्राइमेट्स को प्रभावित करती है। इस बीमारी की पहचान पहली बार 1976 में तत्कालीन जैरे (अब DRC) और सूडान (अब दक्षिण सूडान) में लगभग एक साथ हुए प्रकोपों से हुई थी। यह ऐसे समय में आया है जब DRC पहले से ही कई स्वास्थ्य संकटों से जूझ रहा है, जिससे प्रतिक्रिया क्षमता पर अतिरिक्त दबाव पड़ रहा है।
आगे क्या होगा
WHO और Africa CDC की संयुक्त योजना के तहत जुटाई जाने वाली धनराशि का उपयोग सीमावर्ती देशों में निगरानी तंत्र मज़बूत करने, स्वास्थ्यकर्मियों को सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराने और संपर्क-अनुरेखण (contact tracing) को गति देने में किया जाएगा। अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि सीमा पार संचरण को रोकना इस प्रकोप पर नियंत्रण की सबसे बड़ी चुनौती है।