डीआरसी में इबोला से 521 मौतें, डब्ल्यूएचओ ने 'बहुत ज़्यादा' जोखिम की चेतावनी दी
सारांश
मुख्य बातें
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अफ्रीका क्षेत्रीय कार्यालय की ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार, डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (डीआरसी) में इबोला का प्रकोप गंभीर रूप से बढ़ता जा रहा है। 5 जुलाई 2026 तक देश में 1,624 कन्फर्म मामले और 521 कन्फर्म मौतें दर्ज की जा चुकी हैं, जिससे क्रूड केस फैटेलिटी रेशियो 32.1 प्रतिशत तक पहुँच गया है। डब्ल्यूएचओ ने डीआरसी में सार्वजनिक स्वास्थ्य जोखिम को आधिकारिक तौर पर 'बहुत ज़्यादा' श्रेणी में रखा है।
मुख्य घटनाक्रम
तीनों प्रभावित देशों — डीआरसी, युगांडा और फ्रांस — को मिलाकर 1,645 कन्फर्म मामले और 523 कन्फर्म मौतें सामने आई हैं। संयुक्त केस फैटेलिटी रेशियो 31.8 प्रतिशत है। रिपोर्ट के अनुसार, 12,400 से अधिक संपर्क व्यक्तियों की अभी भी निगरानी की जानी बाकी है।
डीआरसी के इतुरी और नॉर्थ किवु प्रांतों के हॉटस्पॉट क्षेत्रों में संक्रमण निरंतर फैल रहा है। इसके अलावा, पहले से अप्रभावित स्वास्थ्य क्षेत्रों में भी नए मामले उभर रहे हैं, जो प्रकोप के भौगोलिक विस्तार का संकेत देते हैं।
निगरानी और उपचार पर दबाव
रिपोर्ट की सबसे चिंताजनक बात यह है कि 5 जुलाई तक जाँची गई 430 कन्फर्म मौतों में से 397 (92.3 प्रतिशत) मौतें या तो समुदाय में हुईं या उपचार सुविधा में भर्ती होने से पहले। डब्ल्यूएचओ के अनुसार, यह इस बात का स्पष्ट संकेत है कि सर्विलांस और रेफरल प्रणाली संक्रमण की गति से पिछड़ रही है।
कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग में कुछ सुधार दर्ज हुआ है — 12,412 संपर्क व्यक्तियों की निगरानी चल रही है और उनमें से 9,624 (77.5 प्रतिशत) को पिछले 24 घंटों में देखा गया। हालाँकि, केवल 32.4 प्रतिशत कन्फर्म मामलों का पता ही कॉन्टैक्ट फॉलो-अप के ज़रिए चला, जो यह दर्शाता है कि बड़ी संख्या में संक्रमण अभी भी ज्ञात संपर्क श्रृंखलाओं के बाहर हो रहे हैं।
उपचार क्षमता पर भी भारी दबाव है। डीआरसी में 22 से अधिक इबोला ट्रीटमेंट सेंटर और देखभाल सुविधाओं में लगभग 700 बेड उपलब्ध हैं। 5 जुलाई तक 646 मरीज आइसोलेशन में थे और बेड ऑक्यूपेंसी 94.2 प्रतिशत तक पहुँच चुकी थी, जो क्षमता की सीमा पर है।
पहला क्लिनिकल ट्रायल शुरू
डब्ल्यूएचओ के सहयोग से 2 जुलाई 2026 को डीआरसी में एक ऐतिहासिक क्लिनिकल ट्रायल आधिकारिक रूप से शुरू हुआ। यह इबोला बुंडिबुग्यो वायरस बीमारी के उपचार का मूल्यांकन करने वाला पहला ट्रायल है — एक ऐसा वायरस स्ट्रेन जिसके लिए अब तक कोई मान्यता प्राप्त वैक्सीन या विशिष्ट उपचार उपलब्ध नहीं है। इस ट्रायल में मोनोक्लोनल एंटीबॉडी एमबीपी134 और रेमडेसिविर का अलग-अलग और संयुक्त रूप से परीक्षण किया जा रहा है।
युगांडा और फ्रांस की स्थिति
युगांडा में पिछले दो सप्ताहों में कोई नया मामला सामने नहीं आया है। 5 जुलाई तक देश में कुल 20 कन्फर्म मामले और 2 मौतें दर्ज हुईं। 16 मरीज पूरी तरह ठीक हो चुके हैं और 2 अभी भी अस्पताल में भर्ती हैं। संपर्क निगरानी के अंतर्गत आने वाले सभी व्यक्तियों ने अनिवार्य 21 दिन की निगरानी अवधि पूरी कर ली है।
फ्रांस में 24 जून को पुष्टि हुए एकमात्र मामले में मरीज पूरी तरह स्वस्थ हो गया और 4 जुलाई को लगातार दो नेगेटिव लैब परीक्षणों के बाद अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। उसी उड़ान में सफर करने वाले 5 यात्रियों को क्वारंटीन में रखा गया था और उनमें कोई लक्षण नहीं पाए गए।
क्षेत्रीय जोखिम और आगे की राह
डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि पूर्वी डीआरसी से लोगों की आवाजाही के कारण युगांडा को अभी भी संक्रमण के बाहर से आने का उच्च जोखिम बना हुआ है। फ्रांस में आए बाहरी मामले ने यह स्पष्ट कर दिया है कि लगातार यात्री निगरानी, जागरूकता और सीमा-पार तैयारियाँ अनिवार्य हैं। रिपोर्ट के अनुसार, मौजूदा प्रतिक्रिया क्षमता संक्रमण के प्रसार की गति से पीछे चल रही है, और इस अंतर को पाटना अगले कुछ हफ्तों की सबसे बड़ी चुनौती है।