कांगो में इबोला का प्रकोप: कन्फर्म मामले 1,048 पहुँचे, 267 की मौत; इतुरी प्रांत सबसे अधिक प्रभावित
सारांश
मुख्य बातें
डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (DRC) में बुंडीबुग्यो इबोलावायरस का प्रकोप थमने का नाम नहीं ले रहा — देश के स्वास्थ्य मंत्रालय की ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार, 23 जून 2026 तक कन्फर्म मामलों की संख्या बढ़कर 1,048 हो चुकी है, जिनमें 267 मौतें शामिल हैं। 15 मई को आधिकारिक रूप से घोषित इस प्रकोप में कुल केस मृत्यु दर 25.5 फीसदी दर्ज की गई है, जो वैश्विक स्वास्थ्य विशेषज्ञों के लिए गंभीर चिंता का विषय बनी हुई है।
मौजूदा स्थिति और आँकड़े
रविवार तक के आँकड़ों के अनुसार, 371 मरीज आइसोलेशन में थे या अस्पताल में भर्ती थे, जबकि 112 लोग स्वस्थ होकर घर लौट चुके हैं। इसके अतिरिक्त, 202 संदिग्ध मामले भी सामने आए हैं, जिनमें 60 मौतें शामिल हैं। रिपोर्ट में चेताया गया है कि कन्फर्म मामलों की संख्या हर सप्ताह बढ़ रही है, जो कम्युनिटी ट्रांसमिशन का स्पष्ट संकेत है।
इतुरी प्रांत — प्रकोप का केंद्र
स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार, 90 फीसदी से अधिक कन्फर्म मामले इतुरी प्रांत में सामने आए हैं। संयुक्त राष्ट्र मानवीय मामलों के समन्वय कार्यालय (OCHA) ने बताया कि इतुरी की राजधानी बुनिया में बुधवार और गुरुवार के बीच दो विस्थापन शिविरों में कम से कम 13 लोगों की मौत हुई है। जाँच दल यह पता लगाने में जुटे हैं कि ये मौतें इबोला से जुड़ी हैं या नहीं। अप्रैल के बाद से बुनिया के आसपास के शिविरों में कम से कम 62 मौतें दर्ज हो चुकी हैं।
विस्थापन शिविरों में बढ़ता खतरा
OCHA के अनुसार, 2 लाख 70 हज़ार से अधिक लोग — जिनमें बड़ी संख्या में महिलाएँ और बच्चे हैं — इतुरी प्रांत में 60 से अधिक स्थानों पर शरण लिए हुए हैं। इनमें से अनेक स्थानों पर स्वच्छ पानी, सफाई और बुनियादी स्वास्थ्य सेवाओं का घोर अभाव है।
OCHA ने स्पष्ट किया कि स्वास्थ्य सुविधाओं पर भरोसे की कमी, भीड़भाड़, सुरक्षात्मक उपायों की अनदेखी और शवों को असुरक्षित तरीके से संभाला जाना — ये सभी कारक विस्थापित शिविरों में इबोला के प्रसार का जोखिम कई गुना बढ़ा रहे हैं।
संयुक्त राष्ट्र की चेतावनी
शुक्रवार को संयुक्त राष्ट्र के मानवीय कार्यकर्ताओं ने आगाह किया कि विस्थापन शिविरों में अत्यधिक भीड़ और खराब स्वच्छता व्यवस्था इबोला के तेज़ प्रसार के लिए अनुकूल परिस्थितियाँ बना रही है। रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि यदि तत्काल सार्वजनिक स्वास्थ्य उपाय लागू नहीं किए गए, तो स्थिति और विकराल हो सकती है।
आगे क्या
प्रतिक्रिया दल बुनिया में हुई मौतों की जाँच में जुटे हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि इतुरी प्रांत में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुँच बढ़ाना और शिविरों में संक्रमण-नियंत्रण प्रोटोकॉल लागू करना इस प्रकोप पर काबू पाने की तत्काल ज़रूरत है।