FIPIC बैठक में जयशंकर ने गिनाई प्रशांत द्वीप देशों के लिए भारत की उपलब्धियाँ: फिजी अस्पताल से 2,800 घरों के सौरकरण तक
सारांश
मुख्य बातें
विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने 23 सितंबर 2026 को न्यूयॉर्क में आयोजित भारत-FIPIC विदेश मंत्रियों की बैठक में प्रशांत द्वीप देशों के साथ भारत की विकास साझेदारी का विस्तृत लेखा-जोखा प्रस्तुत किया। 2023 के तीसरे FIPIC शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा की गई घोषणाओं के क्रियान्वयन की स्थिति बताते हुए जयशंकर ने स्वास्थ्य, ऊर्जा, तकनीक और क्षमता निर्माण के क्षेत्रों में पूर्ण एवं प्रगतिरत परियोजनाओं की सूची साझा की।
बैठक का संदर्भ और भारत की प्रतिबद्धता
न्यूयॉर्क स्थित भारतीय मिशन में आयोजित इस बैठक में जयशंकर ने कहा कि भारत के प्रशांत द्वीप देशों के साथ संबंध दो ढाँचों के माध्यम से विकसित हुए हैं — FIPIC ढाँचा और भारत-संयुक्त राष्ट्र विकास भागीदारी कोष। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भारत प्रशांत महाद्वीप की 2050 रणनीति का पूर्ण सम्मान करता है और उसका समर्थन करता है। यह बैठक ऐसे समय में हुई जब भारत अपनी इंडो-पैसिफिक नीति को व्यावहारिक सहयोग के माध्यम से मज़बूत करने में जुटा है।
स्वास्थ्य क्षेत्र में प्रमुख परियोजनाएँ
फिजी में 100 बिस्तरों वाले सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल का निर्माण कार्य प्रगति पर है और जयशंकर ने विश्वास जताया कि यह अस्पताल पूरे प्रशांत क्षेत्र की स्वास्थ्य देखभाल आवश्यकताओं को पूरा करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। पापुआ न्यू गिनी, सोलोमन आइलैंड्स, समोआ, पलाऊ, नाउरू, किरिबाती और मार्शल आइलैंड्स को डायलिसिस मशीनें प्रदान की जा चुकी हैं, जबकि अन्य सदस्य देशों के लिए यह प्रक्रिया जारी है।
12 सदस्य देशों से समुद्री एम्बुलेंस की कुल 20 इकाइयों की माँग प्राप्त हुई है, जिनका निर्माण भारत में चल रहा है। जयशंकर ने बताया कि 27 मार्च 2027 तक इनकी आपूर्ति सुनिश्चित करने का लक्ष्य है। अगले महीने फिजी में एक कृत्रिम लसीका उपचार शिविर आयोजित होने वाला है, जिसमें लगभग 650 पात्र मरीज़ों को लाभ मिलने की उम्मीद है। इसके अतिरिक्त फिजी, नाउरू और सोलोमन आइलैंड्स ने इंडियन फार्माकोपिया को मान्यता दी है, और नाउरू को दवाओं की पहली खेप की आपूर्ति हो चुकी है।
ऊर्जा और डिजिटल क्षेत्र में उपलब्धियाँ
भारत ने 14 प्रशांत द्वीप देशों में 2,800 घरों का सौरकरण (सोलराइजेशन) पूरा कर लिया है और 70 महिला सौर इंजीनियरों को प्रशिक्षित किया है। यह पहल न केवल ऊर्जा सुरक्षा की दृष्टि से बल्कि लैंगिक सशक्तिकरण के नज़रिए से भी महत्त्वपूर्ण मानी जा रही है। फिजी, पापुआ न्यू गिनी, कुक आइलैंड्स, वानुअतु, नाउरू, नीयू, सोलोमन आइलैंड्स और मार्शल आइलैंड्स में आईटी उत्कृष्टता केंद्र स्थापित किए गए हैं और स्थानीय प्रशिक्षकों को प्रशिक्षित किया गया है।
तकनीकी सहयोग और प्रगतिरत परियोजनाएँ
जयशंकर ने बताया कि माइक्रोनेशिया संघीय राज्यों (FSM) में स्वास्थ्य और टोबालू में जल अवसंरचना पर दो परियोजनाएँ संयुक्त राष्ट्र विकास निधि के माध्यम से चल रही हैं। पापुआ न्यू गिनी में एक अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी अनुप्रयोग केंद्र और दक्षिण प्रशांत विश्वविद्यालय में एक सतत तटीय एवं महासागर अनुसंधान संस्थान स्थापित करने की प्रतिबद्धता भी दोहराई गई। हालाँकि विदेश मंत्री ने स्वीकार किया कि ये दोनों परियोजनाएँ अपेक्षा से धीमी गति से आगे बढ़ी हैं।
आगे की दिशा
जयशंकर ने क्षमता निर्माण के लिए एक नई पहल का संकेत देते हुए कहा कि भारत प्रशांत द्वीप देशों की प्राथमिकताओं के अनुरूप विशेष प्रशिक्षण मॉड्यूल तैयार करने पर विचार कर रहा है, जिसके अंतर्गत इस क्षेत्र के प्रशिक्षार्थी भारत में आकर अपने विषय पर निश्चित अवधि का प्रशिक्षण प्राप्त कर सकेंगे। भारत की यह इंडो-पैसिफिक कूटनीति आने वाले वर्षों में और गहरी होने की संभावना है।