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भारत ने नाउरू को जन औषधि दवाइयाँ और मेडिकल सामग्री भेंट की, FIPIC प्रतिबद्धता मज़बूत

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भारत ने नाउरू को जन औषधि दवाइयाँ और मेडिकल सामग्री भेंट की, FIPIC प्रतिबद्धता मज़बूत

सारांश

भारत ने नाउरू को जन औषधि जेनेरिक दवाइयाँ और चिकित्सा सामग्री भेंट कर FIPIC के तहत प्रशांत क्षेत्र में अपनी स्वास्थ्य कूटनीति को एक नई ऊँचाई दी। सौर ऊर्जा, साइकिलिंग MOU और अब दवा सहायता — भारत-नाउरू साझेदारी बहुआयामी होती जा रही है।

मुख्य बातें

भारत ने 2 जुलाई 2026 को नाउरू को जन औषधि जेनेरिक दवाइयाँ और चिकित्सा सामग्री भेंट की।
यह सहायता भारत-प्रशांत द्वीप सहयोग मंच (FIPIC) के तहत दी गई है।
अगस्त 2025 में भारत-नाउरू ने 'साइकिलिंग फॉर ए स्ट्रॉन्गर नाउरू' परियोजना के लिए MOU पर हस्ताक्षर किए थे।
1960 के दशक में भारत ने संयुक्त राष्ट्र में नाउरू की स्वतंत्रता का समर्थन किया था — द्विपक्षीय मित्रता की नींव।
बेयरफुट कॉलेज ने भारत सरकार की ओर से नाउरू में सोलर होम लाइटिंग सिस्टम का प्रशिक्षण दिया।

भारत ने 2 जुलाई 2026 को प्रशांत महासागर के छोटे द्वीपीय देश नाउरू को प्रधानमंत्री भारतीय जनऔषधि परियोजना (जन औषधि) के अंतर्गत उपलब्ध जेनेरिक दवाइयों और चिकित्सा सामग्री की एक महत्त्वपूर्ण खेप भेंट की। यह सहायता भारत-प्रशांत द्वीप सहयोग मंच (FIPIC) के तहत प्रशांत क्षेत्र में स्वास्थ्य सहयोग को सुदृढ़ करने की भारत की प्रतिबद्धता का हिस्सा है।

सहायता का विवरण और महत्त्व

कैनबरा स्थित भारतीय उच्चायोग ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, "भारत को नाउरू को जन औषधि की जेनेरिक दवाइयों और चिकित्सा सामग्री की सहायता प्रदान करने पर गर्व है। यह प्रशांत क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवा और आपसी हित के अन्य क्षेत्रों में सहयोग को मजबूत करने के लिए FIPIC के तहत हमारी प्रतिबद्धता को दिखाता है।"

उच्चायोग ने आगे कहा कि यह सहायता नाउरू के साथ भारत की दीर्घकालिक मित्रता और साझेदारी को रेखांकित करती है, और साथ ही ग्लोबल साउथ के प्रति भारत की मज़बूत प्रतिबद्धता को भी दर्शाती है — जिसके तहत सस्ती और उच्च गुणवत्ता वाली स्वास्थ्य सेवाओं को बढ़ावा दिया जा रहा है।

भारत-नाउरू संबंधों की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

भारत और नाउरू के बीच संबंध दशकों पुराने हैं। 1960 के दशक की शुरुआत में भारत ने संयुक्त राष्ट्र में नाउरू की स्वतंत्रता का समर्थन करने का प्रस्ताव रखा था, जिसे तत्कालीन सोवियत संघ (USSR) का भी समर्थन मिला था। इस ऐतिहासिक सहयोग के कारण नाउरू भारत के प्रति विशेष सम्मान रखता है।

गौरतलब है कि नवंबर 2025 में कैनबरा में भारत के उच्चायुक्त ने नाउरू के राष्ट्रपति से भेंट की थी, जिसमें नाउरू के विकास में हर संभव सहयोग देने और द्विपक्षीय सहयोग बढ़ाने की प्रतिबद्धता दोहराई गई थी।

बहुआयामी विकास साझेदारी

अगस्त 2025 में भारत और नाउरू ने 'साइकिलिंग फॉर ए स्ट्रॉन्गर नाउरू' परियोजना के क्रियान्वयन के लिए एक समझौता ज्ञापन (MOU) पर हस्ताक्षर किए थे। भारत की अनुदान सहायता से संचालित इस परियोजना का उद्देश्य खिलाड़ियों को प्रशिक्षित करना और साइकिलिंग के माध्यम से बेहतर सार्वजनिक स्वास्थ्य को प्रोत्साहित करना है।

इससे पहले भारत ने नाउरू के नागरिकों को सौर ऊर्जा उपकरण और आजीविका से जुड़ी सामग्री भी भेंट की थी। बेयरफुट कॉलेज ने भारत सरकार की ओर से सोलर होम लाइटिंग सिस्टम की स्थापना और रखरखाव का व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान किया — जिसे भारत-नाउरू विकास साझेदारी का एक उल्लेखनीय उदाहरण माना जाता है।

ग्लोबल साउथ रणनीति में नाउरू की भूमिका

यह सहायता ऐसे समय में आई है जब भारत प्रशांत द्वीपीय देशों के साथ अपने कूटनीतिक और विकास संबंधों को व्यापक रूप से मज़बूत कर रहा है। FIPIC के ढाँचे के अंतर्गत स्वास्थ्य, ऊर्जा और खेल जैसे विविध क्षेत्रों में सहयोग इस बात का संकेत है कि भारत छोटे द्वीपीय विकासशील देशों (SIDS) को अपनी विदेश नीति में प्राथमिकता दे रहा है।

आने वाले समय में दोनों देशों के बीच स्वास्थ्य, ऊर्जा और क्षमता-निर्माण के क्षेत्रों में सहयोग के और विस्तार की उम्मीद जताई जा रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह भारत की 'नेबरहुड फर्स्ट' नीति के प्रशांत विस्तार का हिस्सा है — जहाँ चीन की बढ़ती उपस्थिति के बीच भारत FIPIC को सक्रिय रखने में रणनीतिक रुचि रखता है। स्वास्थ्य, ऊर्जा और खेल — तीनों मोर्चों पर एक साथ जुड़ाव यह दर्शाता है कि भारत इन देशों को केवल कूटनीतिक वोट-बैंक नहीं, बल्कि दीर्घकालिक साझेदार मान रहा है। असली परीक्षा यह होगी कि ये परियोजनाएँ ज़मीन पर कितनी टिकाऊ साबित होती हैं।
RashtraPress
16 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत ने नाउरू को क्या सहायता दी है?
भारत ने 2 जुलाई 2026 को नाउरू को प्रधानमंत्री भारतीय जनऔषधि परियोजना (जन औषधि) के तहत जेनेरिक दवाइयाँ और चिकित्सा सामग्री भेंट की। यह सहायता FIPIC के अंतर्गत प्रशांत क्षेत्र में स्वास्थ्य सहयोग को मज़बूत करने की भारत की प्रतिबद्धता के तहत दी गई है।
FIPIC क्या है और इसमें भारत की भूमिका क्या है?
FIPIC यानी भारत-प्रशांत द्वीप सहयोग मंच एक बहुपक्षीय मंच है जिसके ज़रिए भारत प्रशांत महासागर के छोटे द्वीपीय देशों के साथ स्वास्थ्य, ऊर्जा और विकास के क्षेत्रों में सहयोग करता है। भारत इस मंच के माध्यम से ग्लोबल साउथ में अपनी कूटनीतिक और विकास साझेदारी को विस्तार दे रहा है।
भारत और नाउरू के बीच संबंध कितने पुराने हैं?
भारत-नाउरू संबंध 1960 के दशक से चले आ रहे हैं, जब भारत ने संयुक्त राष्ट्र में नाउरू की स्वतंत्रता का समर्थन करने का प्रस्ताव रखा था। इस ऐतिहासिक सहयोग की वजह से नाउरू भारत के प्रति विशेष सम्मान रखता है।
'साइकिलिंग फॉर ए स्ट्रॉन्गर नाउरू' परियोजना क्या है?
यह एक भारत-वित्तपोषित परियोजना है जिसके लिए अगस्त 2025 में दोनों देशों के बीच MOU पर हस्ताक्षर हुए थे। इसका उद्देश्य नाउरू में खिलाड़ियों को प्रशिक्षित करना और साइकिलिंग के माध्यम से सार्वजनिक स्वास्थ्य को बढ़ावा देना है।
भारत ने नाउरू को स्वास्थ्य के अलावा और क्या सहायता दी है?
भारत ने नाउरू को सौर ऊर्जा उपकरण और आजीविका सामग्री भी भेंट की है। बेयरफुट कॉलेज ने भारत सरकार की ओर से वहाँ सोलर होम लाइटिंग सिस्टम की स्थापना और रखरखाव का प्रशिक्षण दिया है।
राष्ट्र प्रेस
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