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पुणे में 18 से 31 अगस्त तक धारा 37 के तहत प्रतिबंधात्मक आदेश, 5 या अधिक लोगों के जमावड़े पर पुलिस अनुमति अनिवार्य

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पुणे में 18 से 31 अगस्त तक धारा 37 के तहत प्रतिबंधात्मक आदेश, 5 या अधिक लोगों के जमावड़े पर पुलिस अनुमति अनिवार्य

सारांश

पुणे पुलिस ने ईद-ए-मिलाद, नारली पूर्णिमा और रक्षाबंधन से पहले 18 से 31 अगस्त तक सख्त प्रतिबंधात्मक आदेश जारी किया है। 5 या अधिक लोगों के जमावड़े, भड़काऊ नारेबाज़ी और सोशल मीडिया पर उकसावे वाली सामग्री साझा करने पर रोक — उल्लंघन पर धारा 135 के तहत कार्रवाई होगी।

मुख्य बातें

पुणे पुलिस ने 18 अगस्त से 31 अगस्त 2026 तक महाराष्ट्र पुलिस अधिनियम, 1951 की धारा 37 के तहत प्रतिबंधात्मक आदेश जारी किया।
सार्वजनिक स्थानों पर 5 या अधिक लोगों के एकत्रित होने के लिए पुणे पुलिस आयुक्त की पूर्व अनुमति अनिवार्य।
ईद-ए-मिलाद , नारली पूर्णिमा और रक्षाबंधन के मद्देनजर यह कदम उठाया गया है।
भड़काऊ भाषण, पुतला दहन, हथियार और सोशल मीडिया पर उकसावे वाली सामग्री पर पूर्ण प्रतिबंध।
उल्लंघन पर धारा 135 के तहत कार्रवाई; आदेश समाप्त होने के बाद भी जाँच जारी रह सकती है।
सरकारी कर्मचारी और 3.5 फीट तक लाठी रखने वाले निजी सुरक्षाकर्मियों को छूट।

पुणे पुलिस ने 18 अगस्त से 31 अगस्त 2026 तक शहर में प्रतिबंधात्मक आदेश लागू करने का निर्णय लिया है, जिसके तहत सार्वजनिक स्थानों पर 5 या उससे अधिक लोगों के एकत्रित होने के लिए पुणे पुलिस आयुक्त की पूर्व अनुमति अनिवार्य होगी। यह आदेश महाराष्ट्र पुलिस अधिनियम, 1951 की धारा 37 (1), (2) और (3) के तहत जारी किया गया है और 18 अगस्त की रात 12:01 बजे से 31 अगस्त की रात 12 बजे तक पुणे शहर पुलिस आयुक्तालय क्षेत्र में प्रभावी रहेगा।

आदेश जारी करने की वजह

पुलिस उप आयुक्त (विशेष शाखा) डॉ. प्रशांत अमृतकर द्वारा जारी इस आदेश में स्पष्ट किया गया है कि शहर में आगामी ईद-ए-मिलाद, नारली पूर्णिमा और रक्षाबंधन जैसे त्योहारों के साथ-साथ विभिन्न राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों के कार्यक्रमों को देखते हुए कानून-व्यवस्था बनाए रखना आवश्यक है। अधिकारियों के अनुसार, अतिक्रमण विरोधी कार्रवाइयों और अन्य संवेदनशील मुद्दों के दौरान तनाव की संभावना को भी इस फैसले की वजह बताया गया है।

प्रतिबंध के प्रमुख प्रावधान

आदेश के तहत किसी भी व्यक्ति को सार्वजनिक स्थानों पर दाहक, विस्फोटक और ज्वलनशील पदार्थ, पत्थर, हथियार या शारीरिक नुकसान पहुँचाने वाली वस्तुएँ ले जाने पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा। किसी नेता, व्यक्ति या संगठन के पुतले जलाने अथवा प्रतिमाओं के प्रदर्शन पर भी रोक लगाई गई है।

इसके अलावा सार्वजनिक स्थलों पर भड़काऊ नारेबाज़ी, आपत्तिजनक गीत, भड़काऊ भाषण और सामाजिक वैमनस्य फैलाने वाली किसी भी गतिविधि पर कार्रवाई की जाएगी। उल्लेखनीय है कि डिजिटल माध्यम भी इस आदेश के दायरे में है — अपराधियों की रील बनाकर सोशल मीडिया पर प्रसारित करना, दहशत फैलाना या कानून-व्यवस्था को प्रभावित करने वाली सामग्री साझा करना भी प्रतिबंधित रहेगा।

किन्हें मिली छूट

आदेश में कुछ श्रेणियों को स्पष्ट रूप से छूट दी गई है। सरकारी सेवा में कार्यरत ऐसे कर्मचारी जिन्हें ड्यूटी के दौरान हथियार रखने की अनुमति है, उन पर यह प्रतिबंध लागू नहीं होगा। निजी सुरक्षा गार्ड और चौकीदार ड्यूटी के दौरान 3.5 फीट तक लंबी लाठी रख सकते हैं।

उल्लंघन पर कार्रवाई

पुणे पुलिस ने स्पष्ट किया है कि आदेश का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ महाराष्ट्र पुलिस अधिनियम, 1951 की धारा 135 के तहत कानूनी कार्रवाई की जाएगी। यह भी कहा गया है कि आदेश की अवधि समाप्त होने के बाद भी उल्लंघन से जुड़े मामलों की जाँच, जब्ती और दंड की प्रक्रिया जारी रह सकती है।

आगे क्या

पुणे पुलिस ने इस आदेश को व्यापक स्तर पर प्रचारित करने के निर्देश जारी किए हैं। 31 अगस्त को गणेश चतुर्थी की तैयारियाँ भी शुरू होने वाली हैं, जिसे देखते हुए यह प्रतिबंधात्मक आदेश विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। बिना अनुमति सभा, रैली या जुलूस निकालने पर संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध तत्काल कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह सवाल भी उठता है कि क्या इस तरह के व्यापक प्रतिबंध नागरिकों के शांतिपूर्ण सभा के अधिकार पर अनावश्यक अंकुश लगाते हैं। गौरतलब है कि महाराष्ट्र के प्रमुख शहरों में त्योहारी सीजन से पहले ऐसे आदेश एक स्थापित प्रशासनिक परंपरा बन चुके हैं, जिनकी उपयोगिता और दुरुपयोग दोनों का इतिहास रहा है। डिजिटल सामग्री को भी प्रतिबंध के दायरे में लाना एक नई और महत्वपूर्ण प्रवृत्ति है जो भविष्य में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की सीमाओं पर बहस को और तीखा कर सकती है।
RashtraPress
16 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पुणे में 18 से 31 अगस्त तक कौन-से प्रतिबंध लागू रहेंगे?
पुणे पुलिस आयुक्तालय क्षेत्र में 18 अगस्त की रात 12:01 बजे से 31 अगस्त की रात 12 बजे तक सार्वजनिक स्थानों पर 5 या अधिक लोगों का जमावड़ा, भड़काऊ नारेबाज़ी, पुतला दहन, हथियार ले जाना और उकसावे वाली सोशल मीडिया सामग्री साझा करना प्रतिबंधित रहेगा। यह आदेश महाराष्ट्र पुलिस अधिनियम, 1951 की धारा 37 के तहत जारी किया गया है।
पुणे में यह प्रतिबंधात्मक आदेश क्यों जारी किया गया है?
ईद-ए-मिलाद, नारली पूर्णिमा और रक्षाबंधन जैसे त्योहारों के साथ-साथ राजनीतिक और सामाजिक कार्यक्रमों के दौरान संभावित तनाव को देखते हुए यह कदम उठाया गया है। अधिकारियों के अनुसार, अतिक्रमण विरोधी कार्रवाइयों के दौरान भी तनाव की आशंका रहती है।
5 या अधिक लोगों की सभा के लिए अनुमति कहाँ से लेनी होगी?
पुणे पुलिस आयुक्त से पूर्व अनुमति लेना अनिवार्य होगा। बिना अनुमति के कोई भी सभा, रैली या जुलूस निकालने पर संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ महाराष्ट्र पुलिस अधिनियम, 1951 की धारा 135 के तहत कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
क्या इस आदेश से सरकारी कर्मचारी और सुरक्षाकर्मी भी प्रभावित होंगे?
नहीं। ड्यूटी पर तैनात सरकारी कर्मचारी जिन्हें हथियार रखने की अनुमति है, उन पर यह आदेश लागू नहीं होगा। निजी सुरक्षा गार्ड और चौकीदार ड्यूटी के दौरान 3.5 फीट तक लंबी लाठी रख सकते हैं।
31 अगस्त के बाद भी क्या कार्रवाई हो सकती है?
पुणे पुलिस ने स्पष्ट किया है कि आदेश की अवधि समाप्त होने के बाद भी उल्लंघन से जुड़े मामलों की जाँच, जब्ती, दंड और अन्य कानूनी प्रक्रियाएँ जारी रह सकती हैं। अर्थात् 31 अगस्त के बाद भी इस अवधि में हुए उल्लंघनों पर कार्रवाई संभव है।
राष्ट्र प्रेस
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