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पुणे ग्रामीण पुलिस में बड़ी कार्रवाई: अवैध शराब आरोपी से संपर्क पर चार पुलिसकर्मी निलंबित

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पुणे ग्रामीण पुलिस में बड़ी कार्रवाई: अवैध शराब आरोपी से संपर्क पर चार पुलिसकर्मी निलंबित

सारांश

पिंपरी-चिंचवड़ और पुणे में जहरीली हाथभट्टी शराब से मौतों के बाद पुणे ग्रामीण पुलिस अधीक्षक ने अवैध शराब के मुख्य आरोपी से संपर्क रखने वाले चार पुलिसकर्मियों को तत्काल निलंबित किया — विभाग में जवाबदेही की बड़ी कार्रवाई।

मुख्य बातें

पुणे ग्रामीण पुलिस अधीक्षक संदीप सिंह गिल ने 1 जून 2026 को चार पुलिसकर्मियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया।
निलंबित कर्मी — रामदास जगताप , सुभाष डोईफोडे , अजित काले और सुमित वाघ — अवैध शराब के मुख्य आरोपी राधेश्याम प्रजापती के संपर्क में पाए गए।
कार्रवाई महाराष्ट्र पुलिस अधिनियम 1951 और महाराष्ट्र पुलिस (दंड व अपील) नियम 1956 के तहत की गई।
निलंबन अवधि में सभी का मुख्यालय पुणे ग्रामीण पुलिस मुख्यालय निर्धारित; बिना अनुमति मुख्यालय छोड़ने पर प्रतिबंध।
जांच की पृष्ठभूमि में पिंपरी-चिंचवड़ और पुणे शहर में जहरीली हाथभट्टी शराब से हुई मौतें हैं।

पुणे ग्रामीण पुलिस विभाग ने 1 जून 2026 को अवैध शराब कारोबार से जुड़े मुख्य आरोपी के साथ संपर्क में होने के आरोप में चार पुलिसकर्मियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। यह कार्रवाई पिंपरी-चिंचवड़ और पुणे शहर क्षेत्र में जहरीली हाथभट्टी शराब से हुई मौतों के मामले की पृष्ठभूमि में की गई है। पुणे ग्रामीण के पुलिस अधीक्षक संदीप सिंह गिल ने यह विभागीय कार्रवाई की है।

मुख्य घटनाक्रम

महाराष्ट्र पुलिस अधिनियम 1951 तथा महाराष्ट्र पुलिस (दंड व अपील) नियम 1956 के तहत की गई इस कार्रवाई में जिन चार पुलिसकर्मियों को निलंबित किया गया है, वे हैं — रामदास ज्ञानदेव जगताप (यवत पुलिस स्टेशन), सुभाष बलभीम डोईफोडे (दौंड उपविभागीय पुलिस कार्यालय), अजित शिवाजी काले (उरुली कांचन पुलिस स्टेशन) और सुमित नंदकुमार वाघ (उरुली कांचन पुलिस स्टेशन)। प्राथमिक जांच में इन सभी का इस मामले के मुख्य आरोपी राधेश्याम प्रजापती (निवासी उरुली कांचन) से संपर्क सामने आया।

जांच की प्रक्रिया

इस मामले की जांच के लिए बारामती विभाग के अपर पुलिस अधीक्षक को नियुक्त किया गया था। प्राथमिक जांच में इन चारों कर्मियों का आचरण संदिग्ध और अनुशासनहीन पाया गया, जिसके बाद विभागीय कार्रवाई शुरू करते हुए निलंबन का आदेश जारी किया गया। गवाहों को प्रभावित करने की आशंका को देखते हुए भी यह कदम उठाया गया बताया जा रहा है।

निलंबन की शर्तें

निलंबन अवधि के दौरान सभी चारों कर्मियों का मुख्यालय पुणे ग्रामीण पुलिस मुख्यालय निर्धारित किया गया है। बिना पूर्व अनुमति मुख्यालय छोड़ने पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया है। इसके अलावा, निलंबन अवधि में किसी भी प्रकार की निजी नौकरी या व्यवसाय करने पर भी रोक है और हर माह इसका लिखित प्रमाण देना अनिवार्य होगा। नियमों के अनुसार निर्वाह भत्ता और अन्य देय भत्ते प्रदान किए जाएंगे।

आम जनता और विभाग पर असर

इस कार्रवाई से पुणे ग्रामीण पुलिस विभाग में हड़कंप मच गया है। यह ऐसे समय में आया है जब पिंपरी-चिंचवड़ और पुणे शहर में जहरीली हाथभट्टी शराब से हुई मौतों ने प्रशासन पर दबाव बढ़ा दिया था। गौरतलब है कि महाराष्ट्र में अवैध शराब के खिलाफ अभियान पहले से चल रहा है, और इस कार्रवाई के बाद इसके और तेज होने की संभावना जताई जा रही है।

क्या होगा आगे

विभागीय जांच अभी जारी है और आरोपी पुलिसकर्मियों को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जाएगा। जांच के निष्कर्षों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी। अवैध शराब कारोबार में पुलिस की कथित मिलीभगत की यह जांच विभाग की जवाबदेही की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

अंत नहीं — असली परीक्षा यह है कि विभागीय जांच आरोपों की तह तक जाती है या केवल औपचारिकता बनकर रह जाती है। महाराष्ट्र में जहरीली शराब से मौतें हर कुछ वर्षों में दोहराई जाती हैं, और हर बार कुछ निलंबन होते हैं, कुछ FIR दर्ज होती हैं — लेकिन अवैध शराब का नेटवर्क बना रहता है। जब तक जांच के निष्कर्ष सार्वजनिक और सत्यापन-योग्य नहीं होते, यह कार्रवाई दबाव-प्रबंधन से अधिक नहीं दिखती।
RashtraPress
17 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पुणे ग्रामीण में चार पुलिसकर्मियों को क्यों निलंबित किया गया?
इन चारों पुलिसकर्मियों का अवैध शराब कारोबार के मुख्य आरोपी राधेश्याम प्रजापती से संपर्क होने की बात प्राथमिक जांच में सामने आई। पुणे ग्रामीण पुलिस अधीक्षक संदीप सिंह गिल ने महाराष्ट्र पुलिस अधिनियम 1951 के तहत इन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित किया।
यह कार्रवाई किस घटना के बाद हुई?
पिंपरी-चिंचवड़ और पुणे शहर क्षेत्र में जहरीली हाथभट्टी शराब से हुई मौतों के बाद पुणे ग्रामीण पुलिस विभाग में यह विभागीय कार्रवाई की गई। इन मौतों ने प्रशासन पर कड़ी कार्रवाई का दबाव बनाया था।
निलंबित पुलिसकर्मी कौन हैं और वे किन थानों से हैं?
निलंबित चार कर्मी हैं — रामदास ज्ञानदेव जगताप (यवत पुलिस स्टेशन), सुभाष बलभीम डोईफोडे (दौंड उपविभागीय पुलिस कार्यालय), अजित शिवाजी काले (उरुली कांचन पुलिस स्टेशन) और सुमित नंदकुमार वाघ (उरुली कांचन पुलिस स्टेशन)।
निलंबन अवधि में इन पुलिसकर्मियों पर क्या प्रतिबंध हैं?
निलंबन अवधि में सभी का मुख्यालय पुणे ग्रामीण पुलिस मुख्यालय निर्धारित किया गया है और बिना पूर्व अनुमति वहाँ से बाहर जाने पर प्रतिबंध है। निजी नौकरी या व्यवसाय पर भी पूर्ण रोक है और हर माह लिखित प्रमाण देना अनिवार्य होगा।
आगे की जांच कौन करेगा और क्या होगा?
बारामती विभाग के अपर पुलिस अधीक्षक को इस मामले की जांच सौंपी गई थी। विभागीय जांच जारी है और निष्कर्षों के आधार पर आरोपी पुलिसकर्मियों के खिलाफ आगे की कार्रवाई तय होगी।
राष्ट्र प्रेस
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