पुणे जहरीली शराब कांड: हडपसर थाने के 3 पुलिस अधिकारी निलंबित, विभागीय जांच शुरू
सारांश
मुख्य बातें
पुणे और पिंपरी-चिंचवड में जहरीली शराब से हुई मौतों के मामले में पुणे पुलिस प्रशासन ने 29 मई 2026 को कड़ी कार्रवाई करते हुए हडपसर पुलिस स्टेशन से जुड़े तीन वरिष्ठ अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। विभाग ने इन अधिकारियों पर लापरवाही, कर्तव्य में निष्क्रियता और पर्यवेक्षण में गंभीर चूक का आरोप लगाया है।
निलंबित अधिकारी कौन हैं
निलंबित किए गए तीन अधिकारियों में वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक संजय मोगले, सहायक पुलिस निरीक्षक हसीना सिकलगार और पुलिस उपनिरीक्षक हसन मुलाणी शामिल हैं। तीनों हडपसर पुलिस स्टेशन और उससे संबद्ध अपराध जांच तंत्र में तैनात थे। यह कार्रवाई मुंबई पुलिस (शिक्षा एवं अपील) नियम 1956 तथा मुंबई पुलिस अधिनियम 1951 के तहत की गई है।
मामले का विवरण
29 मई को हडपसर थाने में अपराध क्रमांक 379/2026 दर्ज किया गया। यह मामला भारतीय न्याय संहिता की धारा 105, 123, 125, 275 और 3(5) के साथ-साथ महाराष्ट्र दारूबंदी अधिनियम 1949 की धारा 65 (ई), 68, 81 और 83 के तहत दर्ज है। जांच में सामने आया कि आरोपियों ने जानबूझकर जहरीली देसी शराब में विषैले रसायन मिलाकर उसका परिवहन और वितरण किया — यह जानते हुए भी कि इसके सेवन से जानें जा सकती हैं।
पुलिस विभाग की जवाबदेही
आदेश में स्पष्ट किया गया है कि संबंधित अधिकारियों की निगरानी में गंभीर कमी के चलते यह त्रासदी हुई। रिपोर्टों के अनुसार, मामला सोशल मीडिया और समाचार माध्यमों में उजागर होने के बाद पुलिस विभाग की छवि पर प्रतिकूल असर पड़ा और व्यवस्था की कार्यक्षमता पर सवाल उठे। यह ऐसे समय में आया है जब महाराष्ट्र में अवैध शराब के खिलाफ अभियान पहले से ही चर्चा में है।
निलंबन की शर्तें
निलंबन काल में तीनों अधिकारियों को महाराष्ट्र नागरी सेवा नियम 1981 के तहत निर्वाह भत्ता मिलेगा। शहर भत्ता, घरभाड़ा भत्ता और महंगाई भत्ते जैसी सुविधाएं भी नियमानुसार जारी रहेंगी। हालांकि, इन अधिकारियों को बिना अनुमति मुख्यालय छोड़ने की अनुमति नहीं होगी और उन्हें प्रतिदिन पुणे शहर पुलिस नियंत्रण कक्ष में अनिवार्य रूप से हाजिरी देनी होगी।
आगे क्या होगा
यह निलंबन प्रस्तावित प्राथमिक और विभागीय जांच पूरी होने तक प्रभावी रहेगा। गौरतलब है कि जहरीली शराब कांडों में पुलिस की मिलीभगत या लापरवाही के आरोप महाराष्ट्र में नए नहीं हैं — विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक जड़ स्तर पर अवैध शराब नेटवर्क को तोड़ा नहीं जाता, केवल निलंबन से स्थायी समाधान नहीं निकलेगा।