पुणे जहरीली शराब कांड: हडपसर में एफआईआर दर्ज, 13 मौतें, 8 गिरफ्तार
सारांश
मुख्य बातें
पुणे के हडपसर इलाके में अवैध जहरीली शराब पीने से हुई मौतों के मामले में पुलिस ने हडपसर पुलिस स्टेशन में औपचारिक एफआईआर दर्ज कर ली है। इस प्राथमिकी में आकाश जाधव और एक अज्ञात व्यक्ति को आरोपी बनाया गया है। अब तक इस कांड में कम से कम 13 लोगों की जान जा चुकी है और कई अन्य पीड़ित अस्पतालों में उपचाराधीन हैं।
घटनाक्रम: कैसे हुई त्रासदी
यह दर्दनाक घटना हडपसर के पांढरे माला क्षेत्र की है। स्थानीय निवासियों के अनुसार, जहरीली शराब पीने के महज 10 मिनट के भीतर ही लोगों को उल्टी और तीव्र पेट दर्द की शिकायत होने लगी। सभी पीड़ितों को तत्काल अस्पताल ले जाया गया, परंतु अनेक लोगों की जान नहीं बचाई जा सकी। 28 मई को दो मौतें हुईं, जबकि 29 मई तक मृतकों की संख्या बढ़कर 13 हो गई।
पीड़ित परिवारों की पीड़ा
स्थानीय निवासी सुनंदा साबले ने बताया कि मृतकों में से अधिकांश एक ही बस्ती के रहने वाले थे और उनमें से तीन लोग एक ही परिवार के सदस्य थे। एक अन्य स्थानीय महिला ने अवैध शराब पर कड़ी नाराजगी जताते हुए कहा कि इस तरह की शराब के चलते परिवारों में तबाही आ रही है और निर्दोष लोगों की जानें खतरे में पड़ रही हैं। उन्होंने अवैध शराब पर पूर्ण प्रतिबंध की माँग की।
सरकार और पुलिस की प्रतिक्रिया
गृह विभाग के सूत्रों के अनुसार, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इस मामले को अत्यंत गंभीरता से लेते हुए सख्त कार्रवाई के निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने पुणे और पिंपरी चिंचवाड़ के पुलिस आयुक्तों को संयुक्त जाँच करने और दोषियों के विरुद्ध कठोर कदम उठाने को कहा है। दोनों शहरों की पुलिस को मिलकर अवैध शराब के पूरे नेटवर्क को ध्वस्त करने के भी निर्देश दिए गए हैं।
छापेमारी और गिरफ्तारियाँ
पुलिस और प्रशासन की संयुक्त टीमों ने कई संदिग्ध ठिकानों पर छापेमारी की है। अब तक 8 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। आबकारी विभाग को भी जाँच में शामिल किया गया है ताकि जहरीली शराब के स्रोत, आपूर्ति शृंखला और मिलावट की प्रकृति की विस्तृत जाँच हो सके। गौरतलब है कि महाराष्ट्र में अवैध शराब से जुड़ी यह हाल के वर्षों की सबसे बड़ी त्रासदियों में से एक है।
आगे क्या होगा
जाँच एजेंसियाँ अवैध शराब के पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश करने में जुटी हैं। आरोपी आकाश जाधव और अन्य गिरफ्तार व्यक्तियों से पूछताछ जारी है। अस्पतालों में भर्ती पीड़ितों की हालत पर भी नज़र रखी जा रही है और मृतकों की संख्या में और वृद्धि की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।