पुणे जहरीली शराब कांड: 12 से अधिक मौतें, विपक्ष बोला — 'यह हत्या है, हादसा नहीं'
सारांश
मुख्य बातें
महाराष्ट्र के पुणे जिले के पिंपरी-चिंचवड इलाके में जहरीली शराब पीने से 12 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है और कई अन्य की हालत गंभीर बनी हुई है। 29 मई को सामने आई इस त्रासदी ने कई परिवारों को तबाह कर दिया है। विपक्षी दलों ने इसे महज़ एक हादसा मानने से इनकार करते हुए सरकार और प्रशासन पर सीधा निशाना साधा है।
मुख्य घटनाक्रम
भाजपा विधायक शंकर जगताप ने घटनास्थल का दौरा करने के बाद बताया कि करीब 10-12 लोगों की मौत हुई है और शराब में कोई रासायनिक पदार्थ मिलाया गया था। उन्होंने कहा कि संबंधित विभाग ने आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी है, कुछ लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया है और आगे की जाँच जारी है।
विपक्ष की तीखी प्रतिक्रिया
शिवसेना के प्रवक्ता कृष्णा हेगड़े ने कहा, 'पिंपरी-चिंचवड में जहरीली शराब पीने से हुई लोगों की मौत एक बहुत ही दुखद घटना है। मैं यह नहीं कहूँगा कि इन लोगों की मौत सिर्फ जहरीली शराब पीने से हुई, बल्कि इनकी हत्या की गई है। इन मौतों के लिए जिम्मेदार लोगों को कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए।'
कांग्रेस नेता नसीम खान ने सवाल उठाया कि पुणे जैसे जिले में अवैध शराब का उत्पादन कब से हो रहा था और स्थानीय अधिकारी क्या कर रहे थे। उन्होंने कहा, 'अगर पुलिस के अधिकार क्षेत्र में इस तरह अवैध शराब का उत्पादन हो रहा है तो इसके लिए आखिरकार जिम्मेदार कौन है?'
जवाबदेही की माँग
नसीम खान ने माँग की कि जिन अधिकारियों के अधिकार क्षेत्र में यह घटना हुई है, उन्हें तत्काल निलंबित किया जाए। साथ ही, मृतकों के परिजनों और अस्पताल में भर्ती घायलों के परिवारों को उचित मुआवजा दिया जाए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि किसी न किसी को इसकी जिम्मेदारी लेनी ही पड़ेगी।
आम जनता पर असर
यह ऐसे समय में आया है जब महाराष्ट्र में अवैध शराब के खिलाफ अभियान चलाने के दावे किए जा रहे थे। गौरतलब है कि राज्य में इस तरह की घटनाएँ पहले भी हो चुकी हैं, जिससे प्रवर्तन तंत्र की विश्वसनीयता पर सवाल उठता है। पिंपरी-चिंचवड एक घनी आबादी वाला औद्योगिक क्षेत्र है, जहाँ इस तरह की त्रासदी का असर बड़ी संख्या में मज़दूर वर्ग के परिवारों पर पड़ा है।
क्या होगा आगे
पुलिस ने कुछ आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है और जाँच जारी है। विपक्ष के दबाव को देखते हुए राज्य सरकार पर उच्च स्तरीय जाँच बैठाने और मुआवजे की घोषणा करने का दबाव बढ़ता जा रहा है।