पिंपरी-चिंचवड जहरीली शराब कांड: 16 मौतें, रामदास अठावले बोले — मुख्यमंत्री से करूंगा बात
सारांश
मुख्य बातें
पुणे जिले के पिंपरी-चिंचवड इलाके में जहरीली देसी शराब पीने से कम से कम 16 लोगों की मौत हो गई है — जिनमें पुणे के पाँच और फुगेवाड़ी व दापोड़ी इलाकों के 11 लोग शामिल हैं। 31 मई को सामने आई इस त्रासदी ने पूरे क्षेत्र में दहशत और आक्रोश का माहौल खड़ा कर दिया है। केंद्रीय सामाजिक न्याय मंत्री रामदास अठावले ने घटना की कड़ी निंदा करते हुए महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री से इस विषय पर बात करने का आश्वासन दिया है।
मुख्य घटनाक्रम
स्थानीय निवासियों के अनुसार, कई लोग शराब पीने के कुछ घंटों बाद अचानक बीमार पड़ने लगे और एक के बाद एक मौतों का सिलसिला शुरू हो गया। मृतक बाबा शेख के परिवार के एक सदस्य ने बताया कि बाबा शेख और उनके मित्र अकबर पठान अक्सर साथ बैठकर शराब पीते थे। परिवार को शुरुआत में स्थिति की गंभीरता का अंदाज़ा नहीं था — जब उन्हें अस्पताल ले जाया गया तो पता चला कि उनके पेट से लगभग एक लीटर शराब निकाली गई। डॉक्टरों ने शुरुआत में अन्य कारण बताए, जिससे परिजन और भी भ्रम में पड़ गए। धीरे-धीरे हालत बिगड़ती गई और बाबा शेख की मृत्यु हो गई।
पुलिस की कार्रवाई
पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए इस मामले में चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान योगेश वानखेड़े, राधेश्याम प्रजापति, मिरका सिंह और गुरु मंगल सिंह के रूप में हुई है। सभी को पिंपरी कोर्ट में पेश किया गया, जहाँ से उन्हें 8 जून तक पुलिस हिरासत में भेज दिया गया है। जाँच एजेंसियाँ अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि यह जहरीली शराब कहाँ बनी, उसमें कौन से रसायन मिलाए गए और इस नेटवर्क में कौन-कौन शामिल हैं।
केंद्रीय मंत्री की प्रतिक्रिया
केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले ने कहा, 'किसी को नहीं पता कि अवैध देसी शराब कहाँ बनती है, उसमें कौन से रसायन मिलाए जाते हैं, या उसे कैसे तैयार किया जाता है। देश भर में ऐसी घटनाएँ कई बार हो चुकी हैं और सैकड़ों लोगों की जान जा चुकी है।' उन्होंने आगे कहा कि सभी अवैध शराब के अड्डों को पूरी तरह बंद किया जाना चाहिए और वे इस मुद्दे पर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री से बात करेंगे। अठावले ने यह भी कहा कि '16 मौतों का मतलब है कि 16 परिवार तबाह हो गए हैं।'
मुआवज़े की माँग
अठावले ने बताया कि केंद्र सरकार के नियमों के अनुसार आकस्मिक मृत्यु के मामलों में ₹2 लाख का मुआवज़ा दिया जाता है और वे पीड़ित परिवारों को यह सहायता दिलाने की दिशा में भी प्रयास करेंगे। गौरतलब है कि यह ऐसी घटनाओं की लंबी श्रृंखला में एक और कड़ी है — देश में अवैध शराब से हर साल दर्जनों मौतें होती हैं, जो अनियंत्रित अवैध शराब उत्पादन की गहरी समस्या को उजागर करती हैं।
आगे क्या होगा
पुलिस की जाँच जारी है और अवैध शराब की आपूर्ति श्रृंखला का पर्दाफाश करना प्राथमिकता बताई जा रही है। मुख्यमंत्री स्तर पर हस्तक्षेप और पीड़ित परिवारों को राहत की उम्मीद की जा रही है। यह त्रासदी एक बार फिर महाराष्ट्र में अवैध शराब पर नकेल कसने की माँग को सामने लाती है।