18 जुलाई 2026
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सेंसेक्स 582 अंक और निफ्टी 127 अंक चढ़े, वैश्विक तनाव के बीच आईटी शेयरों ने 4.3% की छलांग लगाई

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सेंसेक्स 582 अंक और निफ्टी 127 अंक चढ़े, वैश्विक तनाव के बीच आईटी शेयरों ने 4.3% की छलांग लगाई

सारांश

वैश्विक अशांति के बावजूद भारतीय बाज़ार ने हफ्ते भर में बढ़त बनाए रखी — सेंसेक्स 582 अंक और निफ्टी 127 अंक चढ़े। आईटी शेयरों की 4.3% की उछाल और सरकार की ₹1.9 लाख करोड़ की विनिर्माण मंज़ूरी ने निवेशकों का भरोसा बनाए रखा, जबकि ब्रेंट क्रूड 88 डॉलर तक पहुँचा।

मुख्य बातें

BSE सेंसेक्स सप्ताहभर में 582.06 अंक (0.8%) चढ़कर 78,151.45 पर बंद हुआ; NSE निफ्टी 50 में 127.4 अंक (0.5%) की बढ़त।
शुक्रवार को सेंसेक्स 964.58 अंक (1.25%) और निफ्टी 261.55 अंक (1.09%) उछले।
निफ्टी आईटी सबसे बड़ा विजेता — साप्ताहिक 4.3% की बढ़त; निफ्टी रियल्टी सबसे कमज़ोर — 2.1% की गिरावट।
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 15 जुलाई को ₹1.9 लाख करोड़ की दो विनिर्माण योजनाओं को मंज़ूरी दी।
ब्रेंट क्रूड सप्ताहभर में 15.91% उछलकर 88.10 डॉलर प्रति बैरल तक पहुँचा।
इंडिया VIX में 7.3% की वृद्धि — बाज़ार में बढ़ती अस्थिरता का संकेत।

बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) सेंसेक्स ने 18 जुलाई 2026 को समाप्त सप्ताह में 582.06 अंक यानी 0.8 प्रतिशत की बढ़त के साथ 78,151.45 पर कारोबार बंद किया, जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) निफ्टी 50 में 127.4 अंक यानी 0.5 प्रतिशत की साप्ताहिक वृद्धि दर्ज हुई। अमेरिका-ईरान तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में 15.91 प्रतिशत की उछाल और कमज़ोर वैश्विक संकेतों के बावजूद घरेलू बाज़ार ने यह बढ़त हासिल की, जिसे मज़बूत कॉर्पोरेट तिमाही नतीजों और सरकार की नीतिगत घोषणाओं का सहारा मिला।

साप्ताहिक प्रदर्शन और शुक्रवार की तेज़ी

सप्ताह के अंतिम कारोबारी दिन शुक्रवार को बाज़ार में ज़ोरदार खरीदारी देखने को मिली। निफ्टी 50 261.55 अंक यानी 1.09 प्रतिशत उछलकर 24,334.30 पर बंद हुआ, जबकि सेंसेक्स 964.58 अंक यानी 1.25 प्रतिशत की छलांग लगाकर 78,151.45 पर पहुँचा। हालाँकि व्यापक बाज़ार अपेक्षाकृत कमज़ोर रहा — निफ्टी मिडकैप 100 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 दोनों सूचकांक सप्ताहभर में करीब 1 प्रतिशत की गिरावट के साथ बंद हुए।

भू-राजनीतिक दबाव और तेल बाज़ार

सप्ताह के दौरान निवेशकों की नज़र पश्चिम एशिया की भू-राजनीतिक परिस्थितियों पर टिकी रही। अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने बताया कि उसने 12 जुलाई को ईरान के कई ठिकानों पर सटीक हमले किए, जिनका उद्देश्य होर्मुज जलडमरूमध्य से गुज़रने वाले अंतरराष्ट्रीय जहाज़ों पर ईरान की हमलावर क्षमता को कमज़ोर करना था। इस घटनाक्रम के चलते ब्रेंट क्रूड की कीमत सप्ताहभर में 15.91 प्रतिशत उछलकर 88.10 डॉलर प्रति बैरल तक पहुँची। अंतिम सत्र में ब्रेंट 85.03 डॉलर और अमेरिकी WTI क्रूड 79.07 डॉलर प्रति बैरल के आसपास रहा, रात के कारोबार में करीब 1 प्रतिशत की गिरावट के साथ। इस दबाव के बीच इंडिया VIX में 7.3 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज हुई, जो बाज़ार में बढ़ती अस्थिरता का संकेत है।

कॉर्पोरेट नतीजे और सरकारी नीतिगत फ़ैसले

वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच घरेलू बाज़ार को दो मज़बूत आधारों ने थामे रखा। पहला, एचसीएल टेक्नोलॉजीज़, टेक महिंद्रा, विप्रो, रिलायंस इंडस्ट्रीज़ और जियो फाइनेंशियल सर्विसेज़ सहित कई बड़ी कंपनियों के पहली तिमाही के नतीजे इस सप्ताह जारी हुए। दूसरा, 15 जुलाई को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने करीब ₹1.9 लाख करोड़ (22 अरब डॉलर) की लागत वाली दो बड़ी विनिर्माण योजनाओं को मंज़ूरी दी, जिससे निवेशकों का भरोसा और मज़बूत हुआ। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया जब वैश्विक बाज़ारों में सतर्कता का माहौल था।

सेक्टोरल प्रदर्शन

निफ्टी आईटी इस सप्ताह सबसे बड़ा विजेता रहा और इसमें 4.3 प्रतिशत की बढ़त दर्ज हुई। इसके बाद निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स 3.1 प्रतिशत और निफ्टी मीडिया 2.5 प्रतिशत मज़बूत हुआ। निफ्टी प्राइवेट बैंक 1.5 प्रतिशत और निफ्टी ऑयल एंड गैस 1.1 प्रतिशत चढ़ा, जिसे कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों का समर्थन मिला। दूसरी ओर, निफ्टी रियल्टी सबसे कमज़ोर सेक्टर रहा और इसमें 2.1 प्रतिशत की गिरावट आई। निफ्टी मेटल 2 प्रतिशत, निफ्टी इंडिया डिफेंस 1.5 प्रतिशत, निफ्टी एफएमसीजी 1.1 प्रतिशत और निफ्टी पीएसयू बैंक 0.8 प्रतिशत फिसले।

आगे क्या होगा

विशेषज्ञों के अनुसार आने वाले सत्रों में बाज़ार की दिशा मुख्यतः कंपनियों के तिमाही नतीजों, प्रबंधन गाइडेंस, मानसून की प्रगति, कच्चे तेल की कीमतों और पश्चिम एशिया के भू-राजनीतिक घटनाक्रम पर निर्भर करेगी। यदि वैश्विक तनाव में कमी आती है और कॉर्पोरेट नतीजे मज़बूत बने रहते हैं, तो घरेलू बाज़ार में तेज़ी का सिलसिला जारी रह सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जबकि मिडकैप और स्मॉलकैप में 1% की गिरावट बताती है कि व्यापक बाज़ार में आम निवेशक अभी भी सतर्क है। इंडिया VIX में 7.3% की उछाल और ब्रेंट क्रूड का 88 डॉलर तक पहुँचना — जो भारत के आयात बिल और मुद्रास्फीति दोनों के लिए ख़तरे की घंटी है — इस तस्वीर को और जटिल बनाते हैं। सरकार की ₹1.9 लाख करोड़ की विनिर्माण मंज़ूरी ने बाज़ार को मनोवैज्ञानिक सहारा दिया, लेकिन असली परीक्षा तब होगी जब वैश्विक तनाव और तेल की ऊँची कीमतें कॉर्पोरेट मार्जिन पर दबाव बनाना शुरू करेंगी।
RashtraPress
18 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इस सप्ताह सेंसेक्स और निफ्टी कितना चढ़े?
18 जुलाई 2026 को समाप्त सप्ताह में BSE सेंसेक्स 582.06 अंक (0.8%) चढ़कर 78,151.45 पर और NSE निफ्टी 50 127.4 अंक (0.5%) बढ़कर 24,334.30 पर बंद हुआ। शुक्रवार को अकेले सेंसेक्स में 964.58 अंक और निफ्टी में 261.55 अंक की बढ़त दर्ज हुई।
वैश्विक तनाव के बावजूद भारतीय बाज़ार क्यों चढ़ा?
घरेलू बाज़ार को मुख्यतः दो कारणों से सहारा मिला — एचसीएल टेक्नोलॉजीज़, विप्रो, रिलायंस इंडस्ट्रीज़ जैसी बड़ी कंपनियों के मज़बूत तिमाही नतीजे और 15 जुलाई को केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा ₹1.9 लाख करोड़ की विनिर्माण योजनाओं को दी गई मंज़ूरी। इन घरेलू सकारात्मक संकेतों ने अमेरिका-ईरान तनाव के असर को काफ़ी हद तक संतुलित किया।
इस सप्ताह कौन-सा सेक्टर सबसे अच्छा और सबसे बुरा रहा?
निफ्टी आईटी 4.3% की बढ़त के साथ सबसे बेहतर सेक्टर रहा, इसके बाद निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स (3.1%) और निफ्टी मीडिया (2.5%) रहे। दूसरी ओर, निफ्टी रियल्टी 2.1% की गिरावट के साथ सबसे कमज़ोर सेक्टर रहा, जबकि निफ्टी मेटल 2% और निफ्टी इंडिया डिफेंस 1.5% फिसले।
कच्चे तेल की कीमतों में इतनी तेज़ी क्यों आई?
अमेरिकी सेंट्रल कमांड द्वारा 12 जुलाई को ईरान के ठिकानों पर हमलों की जानकारी सामने आने के बाद ब्रेंट क्रूड सप्ताहभर में 15.91% उछलकर 88.10 डॉलर प्रति बैरल तक पहुँच गया। होर्मुज जलडमरूमध्य से वैश्विक तेल आपूर्ति के बाधित होने की आशंका ने कीमतों को जून के मध्य के बाद के सर्वोच्च स्तर पर पहुँचा दिया।
आने वाले हफ्तों में बाज़ार की दिशा क्या होगी?
विशेषज्ञों के अनुसार बाज़ार की चाल कंपनियों के तिमाही नतीजों, प्रबंधन गाइडेंस, मानसून की प्रगति, कच्चे तेल की कीमतों और पश्चिम एशिया के भू-राजनीतिक घटनाक्रम पर निर्भर करेगी। यदि वैश्विक तनाव घटता है और कॉर्पोरेट नतीजे मज़बूत रहते हैं, तो तेज़ी जारी रह सकती है।
राष्ट्र प्रेस
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