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यास्तिका भाटिया की वापसी: ACL चोट के बाद 'मानसिक रूप से पहले से ज़्यादा मज़बूत', लॉर्ड्स में जड़ा शतक

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यास्तिका भाटिया की वापसी: ACL चोट के बाद 'मानसिक रूप से पहले से ज़्यादा मज़बूत', लॉर्ड्स में जड़ा शतक

सारांश

घर में विश्व कप छूटा, फिर ACL चोट ने महिला प्रीमियर लीग भी छीन ली — लेकिन यास्तिका भाटिया टूटी नहीं। लंबे रिहैब के बाद लॉर्ड्स में शतक जड़कर उन्होंने साबित किया कि चुनौतियाँ उनके लिए ईंधन हैं, रुकावट नहीं।

मुख्य बातें

यास्तिका भाटिया ने ACL चोट के लंबे पुनर्वास के बाद भारतीय महिला क्रिकेट टीम में शानदार वापसी की।
घर में आयोजित विश्व कप और महिला प्रीमियर लीग — दोनों चोट के कारण नहीं खेल पाईं।
लॉर्ड्स में इंग्लैंड के खिलाफ शतकीय पारी खेलकर भारत को 270 रन की ऐतिहासिक जीत दिलाई।
भाटिया ने कहा — परिवार, कोच, ट्रेनर और फिज़ियो के सपोर्ट सिस्टम ने वापसी संभव बनाई।
चोट के बाद खुद को मानसिक रूप से पहले से ज़्यादा मज़बूत बताया; भविष्य की चुनौतियों को ईंधन की तरह इस्तेमाल करने का संकल्प।

भारतीय महिला क्रिकेट टीम की विकेटकीपर बल्लेबाज यास्तिका भाटिया ने कहा है कि घुटने की गंभीर ACL चोट के कारण मैदान से दूर बिताए गए लंबे समय ने उन्हें मानसिक रूप से पहले से कहीं अधिक मज़बूत बना दिया है। 18 जुलाई को बड़ौदा क्रिकेट एसोसिएशन (BCA) द्वारा आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने अपने पुनर्वास के कठिन सफर और शानदार वापसी के बारे में खुलकर बात की।

चोट का दर्द और लंबा पुनर्वास

भाटिया ने बताया कि चोट का वह दौर उनके करियर का सबसे कठिन पड़ाव था। उन्होंने कहा, "जब मैं चोटिल हुई थी, वह समय मेरे लिए बहुत बुरा था। घर में हो रहा विश्व कप न खेल पाने से बुरा क्या होगा। इसके बाद ACL इंजरी की वजह से मैं महिला प्रीमियर लीग भी नहीं खेल पाई। रिहैब और बाकी सब चीज़ों से यह एक लंबा सफर था।"

गौरतलब है कि ACL (एंटीरियर क्रूसिएट लिगामेंट) चोट क्रिकेटरों के लिए सबसे गंभीर चोटों में से एक मानी जाती है, जिसके पुनर्वास में कई महीने लग जाते हैं। भाटिया ने इस चुनौती को अपनी ताकत में बदला।

प्रक्रिया पर भरोसा — यास्तिका का मंत्र

भाटिया ने अपनी मानसिक दृढ़ता का श्रेय सही प्रक्रिया का पालन करने को दिया। उन्होंने कहा, "मुझे पता था कि अगर मैं प्रक्रिया को सही तरीके से फॉलो करती रही, तो मैं क्रिकेट में वापस आ पाऊंगी। इस सफर ने मुझे रिहैब के दौरान सब्र और हिम्मत रखना सिखाया। बेशक आपको परिणाम न दिखे, लेकिन प्रक्रिया वह चीज़ है जिस पर आपको टिके रहना है।"

उन्होंने आगे जोड़ा, "आपको खुद पर यह भरोसा रखना होगा कि आप वापसी करेंगे।" यह बयान उन युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन सकता है जो चोट के बाद आत्मविश्वास खो देते हैं।

परिवार, कोच और सपोर्ट सिस्टम की अहम भूमिका

भाटिया ने स्वीकार किया कि इस कठिन दौर में उनके परिवार, कोच, ट्रेनर और फिज़ियो ने मिलकर एक मज़बूत सहायता तंत्र बनाया। उन्होंने कहा, "मुझे अपने परिवार, अपने कोच, अपने ट्रेनर और फिज़ियो का अच्छा सहयोग मिला। उन्होंने एक अच्छा सपोर्ट सिस्टम बनाया था।"

उन्होंने आत्मविश्वास के साथ कहा, "चोट से पहले की तुलना में मानसिक रूप से मैं अब ज़्यादा मज़बूत हूं। अब मुझे कितनी भी चुनौतियों का सामना करना पड़े, मैं उन्हें और भी मज़बूती से वापसी करने के लिए ईंधन की तरह इस्तेमाल करूंगी।"

लॉर्ड्स में शतक — शानदार वापसी

यास्तिका की टीम इंडिया में वापसी किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं रही। इंग्लैंड के खिलाफ लॉर्ड्स में खेले गए मैच में उन्होंने शतकीय पारी खेली, जो भारत की 270 रन की ऐतिहासिक जीत का अहम हिस्सा बनी। यह जीत भारतीय महिला क्रिकेट के इतिहास में एक यादगार अध्याय के रूप में दर्ज हो गई है।

यह ऐसे समय में आया है जब भारतीय महिला क्रिकेट टीम अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी पहचान और मज़बूत कर रही है। भाटिया की यह वापसी न केवल उनके व्यक्तिगत साहस की कहानी है, बल्कि यह टीम के लिए एक बड़ा मनोबल भी है। आने वाले टूर्नामेंटों में उनकी भूमिका और भी निर्णायक होने की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो संयोग नहीं, व्यवस्थित पुनर्वास का परिणाम है। असली सवाल यह है कि क्या BCCI महिला खिलाड़ियों के लिए वही स्तर का मेडिकल और मनोवैज्ञानिक सहयोग सुनिश्चित करता है जो पुरुष टीम को मिलता है — और भाटिया की सफलता इस मानक को और ऊँचा उठाने की माँग करती है।
RashtraPress
18 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

यास्तिका भाटिया को कौन सी चोट लगी थी?
यास्तिका भाटिया को घुटने की गंभीर ACL (एंटीरियर क्रूसिएट लिगामेंट) चोट लगी थी, जिसके कारण वे लंबे समय तक क्रिकेट से दूर रहीं। इस चोट की वजह से वे घर में आयोजित विश्व कप और महिला प्रीमियर लीग दोनों नहीं खेल पाईं।
यास्तिका भाटिया की वापसी कैसी रही?
यास्तिका भाटिया की वापसी बेहद शानदार रही। इंग्लैंड के खिलाफ लॉर्ड्स में उन्होंने शतकीय पारी खेली, जिससे भारत ने 270 रन की ऐतिहासिक जीत दर्ज की। यह भारतीय महिला क्रिकेट इतिहास की यादगार जीतों में से एक मानी जा रही है।
यास्तिका भाटिया ने रिहैब के दौरान क्या सीखा?
यास्तिका ने कहा कि रिहैब ने उन्हें सब्र और हिम्मत रखना सिखाया। उनके अनुसार प्रक्रिया पर भरोसा रखना सबसे ज़रूरी है, भले ही परिणाम तुरंत न दिखें। उन्होंने अपने परिवार, कोच, ट्रेनर और फिज़ियो के सपोर्ट सिस्टम को भी अहम बताया।
यास्तिका भाटिया मानसिक रूप से चोट के बाद कैसी हैं?
यास्तिका ने खुद कहा कि चोट से पहले की तुलना में वे अब मानसिक रूप से ज़्यादा मज़बूत हैं। उन्होंने भविष्य की हर चुनौती को वापसी के ईंधन की तरह इस्तेमाल करने का संकल्प जताया है।
यास्तिका भाटिया ने BCA प्रेस कॉन्फ्रेंस में क्या कहा?
18 जुलाई को बड़ौदा क्रिकेट एसोसिएशन (BCA) द्वारा आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में यास्तिका ने अपनी चोट, पुनर्वास और मानसिक यात्रा पर विस्तार से बात की। उन्होंने कहा कि यह सफर लंबा था, लेकिन इसने उन्हें एक बेहतर और मज़बूत खिलाड़ी बनाया।
राष्ट्र प्रेस
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