अंतरराष्ट्रीय संगठित अपराध पर भारत की कार्रवाई को वैश्विक मान्यता, 'ऑपरेशन हार्ड बॉल' में अहम भूमिका
सारांश
मुख्य बातें
ब्रसेल्स से प्रकाशित एक विस्तृत रिपोर्ट के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय संगठित अपराध के विरुद्ध भारत की सक्रिय भूमिका को वैश्विक स्तर पर व्यापक मान्यता मिल रही है। 'यूरोपियन टाइम्स' में प्रकाशित इस रिपोर्ट में कहा गया है कि मानव तस्करी, अवैध प्रवासन, मादक पदार्थों की तस्करी, हथियारों की तस्करी और संगठित अपराध के खिलाफ भारत का सहयोग उसकी अंतरराष्ट्रीय प्रतिबद्धताओं और सुरक्षा नीति का केंद्रीय स्तंभ बन चुका है।
भारत की अंतरराष्ट्रीय प्रतिबद्धताएँ और UNTOC
रिपोर्ट के अनुसार, भारत ने 2011 में संयुक्त राष्ट्र के ट्रांसनेशनल ऑर्गेनाइज्ड क्राइम कन्वेंशन (UNTOC) और उससे संबद्ध तीन प्रोटोकॉल का अनुमोदन किया था। तब से भारत ने मानव तस्करी, अवैध प्रवासन तथा हथियारों के अवैध निर्माण और तस्करी जैसे गंभीर अपराधों से निपटने की अंतरराष्ट्रीय जिम्मेदारियाँ स्वीकार की हैं।
रिपोर्ट में रेखांकित किया गया है कि भारत इन अपराधों को अलग-थलग घटनाओं के बजाय राष्ट्रीय और वैश्विक सुरक्षा से जुड़े परस्पर संबद्ध खतरों के रूप में देखता है — यह दृष्टिकोण उसे कई पश्चिमी देशों की नीतिगत सोच के करीब लाता है।
ऑपरेशन हार्ड बॉल: बहुदेशीय कार्रवाई
रिपोर्ट में अमेरिकी न्याय विभाग के 'ऑपरेशन हार्ड बॉल' का विशेष उल्लेख किया गया है, जिसकी घोषणा 7 जुलाई को की गई थी। इस संयुक्त अभियान के तहत अमेरिका, कनाडा और यूरोप में 24 गिरफ्तारियाँ, 50 से अधिक तलाशी वारंट, तीन अभियोग (इंडिक्टमेंट) और 37 आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की गई।
रिपोर्ट के अनुसार, जाँच के दायरे में आए कई आपराधिक नेटवर्क कथित तौर पर भारत से जुड़े थे और शुरुआती दौर में उनके निशाने पर भारतीय नागरिक थे। ऐसे में इन नेटवर्कों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई भारत के सहयोग के बिना संभव नहीं मानी जा सकती।
लॉरेंस बिश्नोई और जग्गू भगवानपुरिया नेटवर्क
रिपोर्ट में जेल में बंद पंजाब के कथित गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई, जग्गू भगवानपुरिया और कनाडा स्थित रविंदर सिंह ढांडा के नेटवर्क का विशेष उल्लेख है। इन पर कथित तौर पर सुपारी देकर हत्या, रंगदारी, हथियारों की तस्करी और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मादक पदार्थों की तस्करी जैसे गंभीर अपराधों में संलिप्त होने के आरोप हैं।
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि जग्गू भगवानपुरिया गिरोह के दुनिया भर में एक हजार से अधिक सदस्य और सहयोगी हैं, जो एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग प्लेटफॉर्म और जेल के भीतर अवैध मोबाइल फोन के जरिए अपनी गतिविधियाँ संचालित करते हैं। गौरतलब है कि भारत इन नेटवर्कों से उस समय से जूझ रहा है, जब ये अमेरिका और कनाडा के लिए इतनी बड़ी चुनौती नहीं बने थे।
रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि लॉरेंस बिश्नोई और उसके कथित सहयोगी गोल्डी बराड़ ने वर्ष 2022 में पंजाबी गायक सिद्धू मूसेवाला की हत्या की जिम्मेदारी ली थी। इसके अलावा, इस नेटवर्क का नाम वर्ष 2024 में मुंबई में एनसीपी नेता बाबा सिद्दीकी की हत्या और कई अन्य धमकी के मामलों में भी सामने आया है।
अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों का सहयोग और आगे की राह
रिपोर्ट के अनुसार, रॉयल कैनेडियन माउंटेड पुलिस (RCMP) ने इस जाँच में भारत के सहयोग को स्वीकार किया है। अभियोजकों का कहना है कि अमेरिका, कनाडा, स्पेन और भारत की एजेंसियाँ इन मामलों की जाँच आगे बढ़ने के दौरान आपसी समन्वय बनाए रखेंगी।
यह ऐसे समय में आया है जब भारत-कनाडा संबंध राजनयिक तनाव के दौर से गुजर रहे हैं, और इस सहयोग को दोनों देशों के बीच सुरक्षा क्षेत्र में व्यावहारिक साझेदारी का संकेत माना जा रहा है। आलोचकों का कहना है कि इस सहयोग की दीर्घकालिक स्थिरता राजनयिक संबंधों की दिशा पर भी निर्भर करेगी।