क्या रूसी मीडिया ने अमेरिकी चुनौतियों के बीच भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता पर भरोसा जताया?
सारांश
Key Takeaways
- भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता 2026 में शुरू होगी।
- ब्रिक्स समूह में 11 सदस्य देश शामिल हैं।
- भारत को भू-राजनीतिक संतुलन साधना होगा।
- अमेरिकी कार्रवाई से भारत की संतुलित प्रतिक्रिया की सराहना की गई है।
- ब्रिक्स का विस्तार वैश्विक आर्थिक परिदृश्य में महत्वपूर्ण है।
नई दिल्ली, 6 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। रूस के सरकारी अंतरराष्ट्रीय समाचार चैनल आरटी की वेबसाइट पर प्रकाशित एक लेख में वेनेजुएला में अमेरिकी कार्रवाई पर भारत की संतुलित प्रतिक्रिया की प्रशंसा की गई है। इसमें कहा गया है कि भारत की अध्यक्षता में ब्रिक्स समूह, अमेरिका जैसी विरोधी शक्तियों की चुनौतियों का सामना करने के लिए चीन के वर्चस्व वाले नेतृत्व की तुलना में अधिक सक्षम साबित हो सकता है।
लेख में यह भी उल्लेख किया गया है कि भारत के सामने ब्रिक्स जैसे विशाल समूह के आर्थिक और राजनीतिक एजेंडे को दिशा देने की बड़ी जिम्मेदारी है। इसके साथ ही, उसे वैश्विक शक्तियों के साथ भू-राजनीतिक संतुलन भी साधना होगा, जिनके हित विविध क्षेत्रों में फैले हुए हैं।
भारत ने औपचारिक रूप से 2026 के लिए ब्रिक्स की अध्यक्षता संभाल ली है। इस समय, भारत से ग्लोबल साउथ के विकास और व्यापार एजेंडे को आगे बढ़ाने की उम्मीद की जा रही है, जबकि उसे भू-राजनीतिक तनावों और विस्तारित सदस्यता वाले समूह को भी संभालना होगा।
वर्तमान में, ब्रिक्स में 11 सदस्य देश शामिल हैं। ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका के अलावा हाल ही में सऊदी अरब, मिस्र, संयुक्त अरब अमीरात, इथियोपिया, इंडोनेशिया और ईरान इस समूह में शामिल हुए हैं।
ब्रिक्स का विस्तार वैश्विक आर्थिक परिदृश्य में इसके बढ़ते महत्व को दर्शाता है। यह समूह विश्व की बड़ी आबादी और वैश्विक जीडीपी के एक महत्वपूर्ण हिस्से का प्रतिनिधित्व करता है। इसे पश्चिमी देशों के प्रभुत्व वाले संस्थानों के विकल्प के रूप में देखा जाता है और इसका उद्देश्य बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था को बढ़ावा देना है।
यह मंच उभरती अर्थव्यवस्थाओं के बीच आर्थिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक सहयोग को मजबूत करने का कार्य करता है। साथ ही, यह वैश्विक शासन व्यवस्था में ग्लोबल साउथ के देशों की भूमिका बढ़ाने और संयुक्त राष्ट्र व विश्व बैंक जैसे अंतरराष्ट्रीय संस्थानों की वैधता और प्रभावशीलता में सुधार की दिशा में काम करता है।
रिपोर्ट में वेनेजुएला में अमेरिकी कार्रवाई का भी जिक्र किया गया है। लेख के अनुसार, यह घटना ब्रिक्स देशों को संयुक्त राष्ट्र जैसी वैश्विक संस्थाओं की कथित विफलताओं को उजागर करने का अवसर प्रदान करती है।
लेख में कहा गया है कि नए वर्ष में भारत द्वारा ब्रिक्स अध्यक्षता संभालने के साथ ही अमेरिकी बलों ने वेनेजुएला की राजधानी काराकास में कार्रवाई करते हुए राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी को हिरासत में लिया। इस कदम की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तीखी निंदा हुई, खासकर चीन, ब्राजील और रूस जैसे ब्रिक्स देशों की ओर से।
आरटी की रिपोर्ट में भारत की सतर्क और संतुलित प्रतिक्रिया की सराहना की गई है और कहा गया है कि ब्रिक्स की अध्यक्षता करते हुए भारत को ऐसे संवेदनशील मुद्दों पर बेहद संतुलन साधना होगा।
रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया कि ब्रिक्स समूह अपने प्रभाव क्षेत्र का विस्तार करना चाहता है और भारत की 2026 की अध्यक्षता पर सभी की नज़रें टिकी होंगी, खासकर ऐसे समय में जब अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने खुले तौर पर ब्रिक्स के प्रति अपनी नाराजगी जाहिर की है।