11 जुलाई 2026
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भारत-न्यूजीलैंड का आतंकवाद विरोधी साझा मोर्चा: पहलगाम हमले की निंदा, काउंटर-टेररिज्म JWG पर MOU

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भारत-न्यूजीलैंड का आतंकवाद विरोधी साझा मोर्चा: पहलगाम हमले की निंदा, काउंटर-टेररिज्म JWG पर MOU

सारांश

भारत और न्यूजीलैंड ने आतंकवाद-रोधी JWG के लिए MOU पर हस्ताक्षर किए, पहलगाम और लाल किले के हमलों की निंदा की और साइबर सुरक्षा, ड्रग तस्करी व हिंद-प्रशांत स्थिरता पर गहरे सहयोग का संकल्प लिया — यह भारत की इंडो-पैसिफिक कूटनीति में एक नई कड़ी है।

मुख्य बातें

PM मोदी और PM क्रिस्टोफर लक्सन ने 11 जुलाई 2026 को आतंकवाद-रोधी और साइबर सुरक्षा सहयोग पर संयुक्त बयान जारी किया।
काउंटर-टेररिज्म जॉइंट वर्किंग ग्रुप (JWG) के गठन के लिए MOU पर हस्ताक्षर का स्वागत किया गया।
दोनों नेताओं ने 22 अप्रैल 2025 के पहलगाम हमले और 10 नवंबर 2025 के लाल किले के निकट आतंकी घटना की कड़ी निंदा की।
आतंकवाद के वित्तपोषण नेटवर्क, सुरक्षित ठिकानों और ऑनलाइन आतंकी ढाँचे को नष्ट करने पर ज़ीरो-टॉलरेंस नीति पर सहमति।
काउंटर-नारकोटिक्स सहयोग और कानून प्रवर्तन व्यवस्थाओं को शीघ्र औपचारिक रूप देने का वादा।
UNCLOS 1982 के तहत नौवहन की स्वतंत्रता और हिंद-प्रशांत में नियम-आधारित व्यवस्था बनाए रखने की प्रतिबद्धता दोहराई।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन ने 11 जुलाई 2026 को आतंकवाद-रोधी सहयोग, साइबर सुरक्षा और उभरती सुरक्षा चुनौतियों पर गहरी साझेदारी का संकल्प लिया। विदेश मंत्रालय द्वारा जारी भारत-न्यूजीलैंड संयुक्त बयान में दोनों देशों ने काउंटर-टेररिज्म जॉइंट वर्किंग ग्रुप (JWG) के गठन के लिए MOU पर हस्ताक्षर का स्वागत किया और क्षेत्रीय व बहुपक्षीय मंचों पर समन्वय को और मज़बूत करने पर सहमति जताई।

पहलगाम और लाल किले के हमलों की कड़ी निंदा

दोनों नेताओं ने 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले और 10 नवंबर 2025 को नई दिल्ली के लाल किले के निकट हुई आतंकी घटना की कड़े शब्दों में भर्त्सना की। संयुक्त बयान में स्पष्ट किया गया कि इन हमलों के दोषियों को जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए। दोनों नेताओं ने सीमा-पार आतंकवाद सहित आतंकवाद के हर रूप के प्रति ज़ीरो-टॉलरेंस नीति अपनाने पर बल दिया।

यह ऐसे समय में आया है जब भारत पहलगाम हमले के बाद से कूटनीतिक स्तर पर व्यापक अंतरराष्ट्रीय समर्थन जुटा रहा है। न्यूजीलैंड का यह स्पष्ट समर्थन भारत की उस रणनीति को बल देता है जिसमें आतंकवाद के वित्तपोषण नेटवर्क और सुरक्षित ठिकानों को वैश्विक स्तर पर चिह्नित करने की माँग की जा रही है।

काउंटर-टेररिज्म JWG और कानून प्रवर्तन सहयोग

संयुक्त बयान के अनुसार, दोनों देश काउंटर-टेररिज्म JWG के ज़रिए जानकारी और ज्ञान साझा करने का एक ठोस ढाँचा तैयार करेंगे। इसके अलावा दोनों पक्षों ने गैर-कानूनी ड्रग तस्करी, वित्तीय अपराध, साइबर अपराध, आतंकवाद से जुड़े अपराध और मानव तस्करी जैसे ट्रांसनेशनल संगठित अपराधों से निपटने के लिए व्यावहारिक कानून प्रवर्तन सहयोग मज़बूत करने का वादा किया।

बयान में यह भी कहा गया कि दोनों देशों की संबंधित एजेंसियों के बीच काउंटर-नारकोटिक्स सहयोग और कानून प्रवर्तन व्यवस्थाओं को जल्द से जल्द औपचारिक रूप दिया जाएगा। गौरतलब है कि यह पहली बार है जब भारत और न्यूजीलैंड के बीच नशा-तस्करी रोधी सहयोग को इतने स्पष्ट तरीके से द्विपक्षीय एजेंडे में शामिल किया गया है।

हिंद-प्रशांत और UNCLOS पर साझा प्रतिबद्धता

दोनों प्रधानमंत्रियों ने एक स्वतंत्र, खुले, शांतिपूर्ण और समृद्ध हिंद-प्रशांत क्षेत्र के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई, जहाँ संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान हो। बयान में 1982 के UNCLOS (समुद्र के कानून पर संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन) के तहत नौवहन और उड़ान की स्वतंत्रता की पुनः पुष्टि की गई तथा विवादों को अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुसार शांतिपूर्ण तरीके से सुलझाने पर बल दिया गया।

दोनों नेताओं ने ईस्ट एशिया समिट, आसियान रीजनल फोरम और आसियान डिफेंस मिनिस्टर्स मीटिंग प्लस जैसे क्षेत्रीय मंचों में आसियान की केंद्रीय भूमिका को रेखांकित किया और इन मंचों के ज़रिए द्विपक्षीय समन्वय बढ़ाने पर सहमति जताई।

आगे की राह

काउंटर-टेररिज्म JWG के गठन के बाद अब दोनों देशों की सुरक्षा एजेंसियों के बीच नियमित संवाद का रास्ता खुलेगा। काउंटर-नारकोटिक्स और साइबर सुरक्षा पर औपचारिक व्यवस्थाएँ शीघ्र अपेक्षित हैं। यह साझेदारी भारत की व्यापक इंडो-पैसिफिक रणनीति को और मज़बूत करती है, जिसमें क्वाड और आसियान-केंद्रित मंचों के साथ-साथ प्रशांत क्षेत्र के देशों के साथ सुरक्षा संबंध गहरे किए जा रहे हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

न्यूजीलैंड का यह स्पष्ट बयान उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है — लेकिन असली कसौटी यह है कि JWG केवल कागज़ी ढाँचा बनकर न रह जाए। भारत के पड़ोस में पाकिस्तान-समर्थित आतंकी नेटवर्क को लेकर न्यूजीलैंड की स्थिति अब तक सतर्क रही है, इसलिए 'ज़ीरो-टॉलरेंस' के इस साझा बयान की व्याख्या दोनों पक्ष अपने-अपने तरीके से कर सकते हैं। UNCLOS और हिंद-प्रशांत पर साझा रुख चीन को एक स्पष्ट संकेत है, भले ही उसका नाम न लिया गया हो।
RashtraPress
11 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत और न्यूजीलैंड के बीच काउंटर-टेररिज्म JWG क्या है?
काउंटर-टेररिज्म जॉइंट वर्किंग ग्रुप (JWG) भारत और न्यूजीलैंड की सुरक्षा एजेंसियों के बीच जानकारी और ज्ञान साझा करने का एक औपचारिक ढाँचा है, जिसके लिए 11 जुलाई 2026 को MOU पर हस्ताक्षर का स्वागत किया गया। यह दोनों देशों के बीच आतंकवाद-रोधी सहयोग को संस्थागत रूप देने की दिशा में पहला ठोस कदम है।
दोनों देशों ने पहलगाम हमले का उल्लेख क्यों किया?
22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले की न्यूजीलैंड ने भारत के साथ संयुक्त रूप से कड़ी निंदा की और दोषियों को जवाबदेह ठहराने की माँग की। यह भारत की उस कूटनीतिक रणनीति का हिस्सा है जिसमें वह वैश्विक भागीदारों से आतंकवाद के विरुद्ध स्पष्ट समर्थन जुटा रहा है।
भारत-न्यूजीलैंड साइबर सुरक्षा सहयोग में क्या शामिल है?
दोनों देशों ने साइबर सुरक्षा और साइबर से जुड़े अपराधों पर सहयोग बढ़ाने की प्रतिबद्धता जताई है। इसमें ऑनलाइन आतंकी ढाँचे को नष्ट करना और साइबर अपराध से निपटने के लिए व्यावहारिक कानून प्रवर्तन सहयोग शामिल है।
हिंद-प्रशांत पर दोनों देशों का साझा रुख क्या है?
दोनों नेताओं ने एक स्वतंत्र, खुले और नियम-आधारित हिंद-प्रशांत क्षेत्र के प्रति प्रतिबद्धता दोहराई और UNCLOS 1982 के तहत नौवहन की स्वतंत्रता का समर्थन किया। उन्होंने आसियान के नेतृत्व वाले मंचों में सहयोग को भी महत्वपूर्ण बताया।
काउंटर-नारकोटिक्स सहयोग पर क्या सहमति बनी?
दोनों देश भारत और न्यूजीलैंड की संबंधित एजेंसियों के बीच काउंटर-नारकोटिक्स और कानून प्रवर्तन व्यवस्थाओं को जल्द से जल्द औपचारिक रूप देने पर सहमत हुए। यह गैर-कानूनी ड्रग तस्करी और ट्रांसनेशनल संगठित अपराध से निपटने की व्यापक रणनीति का हिस्सा है।
राष्ट्र प्रेस
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