भारत-न्यूजीलैंड का आतंकवाद विरोधी साझा मोर्चा: पहलगाम हमले की निंदा, काउंटर-टेररिज्म JWG पर MOU
सारांश
मुख्य बातें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन ने 11 जुलाई 2026 को आतंकवाद-रोधी सहयोग, साइबर सुरक्षा और उभरती सुरक्षा चुनौतियों पर गहरी साझेदारी का संकल्प लिया। विदेश मंत्रालय द्वारा जारी भारत-न्यूजीलैंड संयुक्त बयान में दोनों देशों ने काउंटर-टेररिज्म जॉइंट वर्किंग ग्रुप (JWG) के गठन के लिए MOU पर हस्ताक्षर का स्वागत किया और क्षेत्रीय व बहुपक्षीय मंचों पर समन्वय को और मज़बूत करने पर सहमति जताई।
पहलगाम और लाल किले के हमलों की कड़ी निंदा
दोनों नेताओं ने 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले और 10 नवंबर 2025 को नई दिल्ली के लाल किले के निकट हुई आतंकी घटना की कड़े शब्दों में भर्त्सना की। संयुक्त बयान में स्पष्ट किया गया कि इन हमलों के दोषियों को जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए। दोनों नेताओं ने सीमा-पार आतंकवाद सहित आतंकवाद के हर रूप के प्रति ज़ीरो-टॉलरेंस नीति अपनाने पर बल दिया।
यह ऐसे समय में आया है जब भारत पहलगाम हमले के बाद से कूटनीतिक स्तर पर व्यापक अंतरराष्ट्रीय समर्थन जुटा रहा है। न्यूजीलैंड का यह स्पष्ट समर्थन भारत की उस रणनीति को बल देता है जिसमें आतंकवाद के वित्तपोषण नेटवर्क और सुरक्षित ठिकानों को वैश्विक स्तर पर चिह्नित करने की माँग की जा रही है।
काउंटर-टेररिज्म JWG और कानून प्रवर्तन सहयोग
संयुक्त बयान के अनुसार, दोनों देश काउंटर-टेररिज्म JWG के ज़रिए जानकारी और ज्ञान साझा करने का एक ठोस ढाँचा तैयार करेंगे। इसके अलावा दोनों पक्षों ने गैर-कानूनी ड्रग तस्करी, वित्तीय अपराध, साइबर अपराध, आतंकवाद से जुड़े अपराध और मानव तस्करी जैसे ट्रांसनेशनल संगठित अपराधों से निपटने के लिए व्यावहारिक कानून प्रवर्तन सहयोग मज़बूत करने का वादा किया।
बयान में यह भी कहा गया कि दोनों देशों की संबंधित एजेंसियों के बीच काउंटर-नारकोटिक्स सहयोग और कानून प्रवर्तन व्यवस्थाओं को जल्द से जल्द औपचारिक रूप दिया जाएगा। गौरतलब है कि यह पहली बार है जब भारत और न्यूजीलैंड के बीच नशा-तस्करी रोधी सहयोग को इतने स्पष्ट तरीके से द्विपक्षीय एजेंडे में शामिल किया गया है।
हिंद-प्रशांत और UNCLOS पर साझा प्रतिबद्धता
दोनों प्रधानमंत्रियों ने एक स्वतंत्र, खुले, शांतिपूर्ण और समृद्ध हिंद-प्रशांत क्षेत्र के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई, जहाँ संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान हो। बयान में 1982 के UNCLOS (समुद्र के कानून पर संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन) के तहत नौवहन और उड़ान की स्वतंत्रता की पुनः पुष्टि की गई तथा विवादों को अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुसार शांतिपूर्ण तरीके से सुलझाने पर बल दिया गया।
दोनों नेताओं ने ईस्ट एशिया समिट, आसियान रीजनल फोरम और आसियान डिफेंस मिनिस्टर्स मीटिंग प्लस जैसे क्षेत्रीय मंचों में आसियान की केंद्रीय भूमिका को रेखांकित किया और इन मंचों के ज़रिए द्विपक्षीय समन्वय बढ़ाने पर सहमति जताई।
आगे की राह
काउंटर-टेररिज्म JWG के गठन के बाद अब दोनों देशों की सुरक्षा एजेंसियों के बीच नियमित संवाद का रास्ता खुलेगा। काउंटर-नारकोटिक्स और साइबर सुरक्षा पर औपचारिक व्यवस्थाएँ शीघ्र अपेक्षित हैं। यह साझेदारी भारत की व्यापक इंडो-पैसिफिक रणनीति को और मज़बूत करती है, जिसमें क्वाड और आसियान-केंद्रित मंचों के साथ-साथ प्रशांत क्षेत्र के देशों के साथ सुरक्षा संबंध गहरे किए जा रहे हैं।