भारत-मिस्र आतंकवाद-रोधी JWG की 5वीं बैठक: पहलगाम हमले की निंदा, जीरो टॉलरेंस पर सहमति

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भारत-मिस्र आतंकवाद-रोधी JWG की 5वीं बैठक: पहलगाम हमले की निंदा, जीरो टॉलरेंस पर सहमति

सारांश

भारत और मिस्र ने नई दिल्ली में आतंकवाद-रोधी JWG की 5वीं बैठक में पहलगाम और लाल किले के हमलों की कड़ी निंदा की, जीरो टॉलरेंस के सिद्धांत को दोहराया और ड्रोन-AI के आतंकी दुरुपयोग पर चिंता जताई। अगली बैठक मिस्र में होगी।

मुख्य बातें

भारत-मिस्र आतंकवाद-रोधी JWG की 5वीं बैठक 20 मई 2026 को नई दिल्ली में आयोजित हुई।
दोनों देशों ने 22 अप्रैल 2025 के पहलगाम हमले और 10 नवंबर 2025 की लाल किले के निकट आतंकवादी घटना की कड़ी निंदा की।
आतंकवाद के प्रति जीरो टॉलरेंस के सिद्धांत की पुष्टि; आतंकवाद को किसी धर्म या राष्ट्रीयता से न जोड़ने पर सहमति।
UAV, ड्रोन और AI के आतंकी उद्देश्यों के लिए बढ़ते उपयोग पर विशेष चिंता व्यक्त की गई।
UN, BRICS, FATF, GCTF जैसे बहुपक्षीय मंचों पर सहयोग मज़बूत करने की प्रतिबद्धता दोहराई गई।
CCIT को शीघ्र अंतिम रूप देने और अगली JWG बैठक मिस्र में आयोजित करने पर सहमति।

भारत और मिस्र के बीच आतंकवाद-रोधी संयुक्त कार्य समूह (JWG) की 5वीं बैठक 20 मई 2026 को नई दिल्ली में संपन्न हुई, जिसमें दोनों देशों ने आतंकवाद के प्रति जीरो टॉलरेंस के सिद्धांत को दृढ़ता से दोहराया और सीमा-पार आतंकवाद सहित इसके हर रूप की कड़ी निंदा की। बैठक की सह-अध्यक्षता दोनों देशों के विदेश मंत्रालयों के वरिष्ठ अधिकारियों ने की, और संबंधित सुरक्षा एजेंसियों के प्रतिनिधि भी इसमें सम्मिलित हुए।

मुख्य घटनाक्रम

बैठक में दोनों पक्षों ने 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए भीषण आतंकवादी हमले और 10 नवंबर 2025 को नई दिल्ली के लाल किले के निकट हुई आतंकवादी घटना की कड़ी भर्त्सना की। दोनों देशों ने एकमत से कहा कि आतंकवादी गतिविधियों में शामिल सभी व्यक्तियों और उनके समर्थकों को जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए और उन्हें दंड मिलना चाहिए।

मिस्र ने भारत की सुरक्षा और स्थिरता को क्षति पहुँचाने के उद्देश्य से संचालित आतंकवाद के हर स्वरूप के विरुद्ध भारत के साथ अपनी पूर्ण एकजुटता पुनः व्यक्त की। यह बैठक भारत-मिस्र रणनीतिक साझेदारी के व्यापक ढाँचे के अंतर्गत आयोजित की गई।

बहुपक्षीय मंचों पर सहयोग

दोनों पक्षों ने संयुक्त राष्ट्र (UN), ब्रिक्स (BRICS), वित्तीय कार्रवाई कार्य बल (FATF), वैश्विक आतंकवाद-रोधी फोरम (GCTF) और अन्य बहुपक्षीय मंचों के माध्यम से आतंकवाद-रोधी सहयोग को और सुदृढ़ करने की प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने GCTF को अधिक प्रभावशाली बनाने के उपायों पर विचार साझा किए और अंतर्राष्ट्रीय आतंकवाद पर संयुक्त राष्ट्र व्यापक अभिसमय (CCIT) को शीघ्र अंतिम रूप देने और अपनाने की अपनी प्रतिबद्धता भी दोहराई।

उभरते खतरे और तकनीकी चुनौतियाँ

बैठक में दोनों देशों ने आतंकवादियों की भर्ती, आतंकी उद्देश्यों के लिए प्रौद्योगिकी के दुरुपयोग और आतंकवाद की वित्तपोषण जैसी पुरानी और नई चुनौतियों की समीक्षा की। विशेष रूप से, मानव-रहित हवाई वाहनों (UAV), ड्रोन और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के आतंकी उद्देश्यों के लिए बढ़ते उपयोग पर गहरी चिंता व्यक्त की गई। दोनों पक्षों ने संयुक्त राष्ट्र द्वारा घोषित सभी आतंकवादियों, आतंकी संगठनों, उनके सहयोगियों, प्रॉक्सी समूहों और वित्तपोषकों के विरुद्ध समन्वित कार्रवाई की आवश्यकता पर बल दिया।

सहयोग के क्षेत्र

दोनों देशों ने प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण, साइबर सुरक्षा, न्यायिक सहयोग, सर्वोत्तम प्रथाओं के आदान-प्रदान और सूचना साझाकरण के क्षेत्रों में द्विपक्षीय एवं बहुपक्षीय प्रयासों को और मज़बूत करने के तौर-तरीकों पर विस्तृत चर्चा की। यह ऐसे समय में आया है जब पहलगाम हमले के बाद भारत-पाकिस्तान तनाव के बीच भारत अपनी कूटनीतिक साझेदारियों को व्यापक स्तर पर सक्रिय कर रहा है।

आगे की राह

बैठक के अंत में दोनों पक्षों ने सहमति जताई कि JWG की अगली बैठक मिस्र में आपसी सुविधानुसार तय तारीख पर आयोजित की जाएगी। गौरतलब है कि यह श्रृंखला की 5वीं बैठक है, जो इस द्विपक्षीय तंत्र की निरंतरता और दोनों देशों की आतंकवाद के विरुद्ध साझा प्रतिबद्धता को रेखांकित करती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

मिस्र के साथ यह JWG बैठक उसी कूटनीतिक अभियान की एक कड़ी है। उल्लेखनीय है कि मिस्र स्वयं सिनाई प्रायद्वीप में आतंकवाद से दशकों से जूझता रहा है, इसलिए यह साझेदारी महज़ औपचारिक नहीं, बल्कि परिचालन अनुभव पर आधारित है। ड्रोन और AI के दुरुपयोग पर चिंता का उल्लेख संकेत देता है कि दोनों देश पहलगाम जैसे हमलों में तकनीकी सक्षमता के बढ़ते आयाम को गंभीरता से ले रहे हैं। CCIT पर प्रतिबद्धता का बार-बार दोहराया जाना भी महत्वपूर्ण है — यह अभिसमय दो दशकों से लंबित है और इसे अपनाने की राह में वही देश बाधा बनते रहे हैं जिन पर आतंकवाद को पनाह देने के आरोप लगते हैं।
RashtraPress
22 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत-मिस्र आतंकवाद-रोधी JWG की 5वीं बैठक में क्या हुआ?
20 मई 2026 को नई दिल्ली में आयोजित इस बैठक में दोनों देशों ने जीरो टॉलरेंस के सिद्धांत को दोहराया, पहलगाम और लाल किले के हमलों की निंदा की और FATF, GCTF सहित बहुपक्षीय मंचों पर सहयोग मज़बूत करने की प्रतिबद्धता जताई। बैठक की सह-अध्यक्षता दोनों देशों के विदेश मंत्रालयों के वरिष्ठ अधिकारियों ने की।
पहलगाम हमले का इस बैठक में क्या संदर्भ था?
दोनों देशों ने 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए भीषण आतंकवादी हमले की कड़ी निंदा की और कहा कि इसमें शामिल सभी आतंकवादियों तथा उनके समर्थकों को जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए। मिस्र ने भारत के साथ अपनी पूर्ण एकजुटता व्यक्त की।
CCIT क्या है और इस बैठक में इसका ज़िक्र क्यों हुआ?
CCIT यानी अंतर्राष्ट्रीय आतंकवाद पर संयुक्त राष्ट्र व्यापक अभिसमय एक प्रस्तावित वैश्विक संधि है जो आतंकवाद को व्यापक रूप से परिभाषित करेगी और सभी देशों पर बाध्यकारी दायित्व लगाएगी। भारत और मिस्र ने इसे शीघ्र अंतिम रूप देने और अपनाने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।
ड्रोन और AI को लेकर बैठक में क्या चिंता जताई गई?
दोनों देशों ने मानव-रहित हवाई वाहनों (UAV), ड्रोन और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के आतंकी उद्देश्यों के लिए बढ़ते दुरुपयोग पर गहरी चिंता व्यक्त की। यह उभरता खतरा आतंकवाद-रोधी सहयोग के एजेंडे में नई प्राथमिकता के रूप में शामिल हुआ है।
JWG की अगली बैठक कहाँ और कब होगी?
दोनों पक्षों ने सहमति जताई कि आतंकवाद-रोधी JWG की अगली बैठक मिस्र में आपसी सुविधानुसार तय तारीख पर आयोजित की जाएगी। अभी तक कोई निश्चित तिथि घोषित नहीं की गई है।
राष्ट्र प्रेस
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