PM मोदी की नीदरलैंड यात्रा: रणनीतिक साझेदारी का ऐलान, सेमीकंडक्टर-रक्षा समेत दर्जनभर MOU पर हस्ताक्षर
सारांश
मुख्य बातें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 16-17 मई 2026 को द हेग में अपने दो दिवसीय आधिकारिक दौरे का समापन किया, जिसमें भारत और नीदरलैंड ने अपने द्विपक्षीय संबंधों को औपचारिक रूप से 'रणनीतिक साझेदारी' के स्तर तक उन्नत करने का ऐतिहासिक निर्णय लिया। नीदरलैंड के प्रधानमंत्री रॉब जेटन के निमंत्रण पर आए मोदी ने सेमीकंडक्टर, रक्षा, नवीकरणीय ऊर्जा, जल प्रबंधन और शिक्षा सहित कई क्षेत्रों में समझौता ज्ञापनों (MOU) और आशय पत्रों पर हस्ताक्षर किए।
राजकीय मुलाकात और द्विपक्षीय बैठक
16 मई की सुबह प्रधानमंत्री मोदी ने हेग स्थित रॉयल पैलेस हुइस टेन बॉश में नीदरलैंड के राजा विलेम-अलेक्जेंडर और रानी मैक्सिमा से द्विपक्षीय बैठक की। राजा और रानी ने पीएम मोदी के सम्मान में दोपहर के भोज की मेजबानी भी की। इसी दिन शाम को प्रधानमंत्री जेटन और मोदी के बीच सीमित और प्रतिनिधिमंडल स्तर की बातचीत हुई, जिसके बाद रात्रिभोज आयोजित किया गया।
यह प्रधानमंत्री मोदी का नीदरलैंड का दूसरा दौरा था। दोनों नेताओं ने दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक व्यापारिक संबंधों, लोगों के बीच गहरे जुड़ाव और मजबूत द्विपक्षीय रिश्तों को याद किया तथा इन्हें और गहरा करने की प्रतिबद्धता जताई।
रणनीतिक साझेदारी रोडमैप: क्या-क्या शामिल
दोनों देशों ने एक रणनीतिक साझेदारी रोडमैप अपनाया, जिसके तहत राजनीति, व्यापार और निवेश, रक्षा और सुरक्षा, साइबर सुरक्षा, सेमीकंडक्टर, अंतरिक्ष, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्वांटम सिस्टम, विज्ञान और नवाचार, सतत कृषि, जल प्रबंधन, जलवायु परिवर्तन, ऊर्जा परिवर्तन, समुद्री विकास, शिक्षा और संस्कृति जैसे विविध क्षेत्रों में संरचनात्मक सहयोग सुनिश्चित किया जाएगा।
गौरतलब है कि दोनों देशों के बीच फरवरी 2026 में नई दिल्ली में आयोजित एआई इम्पैक्ट समिट और 2023 में भारत की G20 अध्यक्षता के दौरान भी उपयोगी सहयोग हुआ था। यह रणनीतिक साझेदारी उसी सिलसिले की अगली और अधिक ठोस कड़ी है।
प्रमुख MOU और आशय पत्र
सेमीकंडक्टर: भारत और नीदरलैंड के बीच सेमीकंडक्टर व संबंधित उभरती तकनीक पर MOU हस्ताक्षरित हुआ। इसके अतिरिक्त, टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स और ASML के बीच धोलेरा में सेमीकंडक्टर फैब को समर्थन देने के लिए MOU पर हस्ताक्षर हुए — यह भारत की चिप-निर्माण महत्वाकांक्षाओं के लिए एक उल्लेखनीय कदम है।
रक्षा और सुरक्षा: दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग को गहरा करने के लिए आशय पत्र (Letter of Intent) पर हस्ताक्षर हुए। इसके साथ ही भारत-यूरोपीय संघ सुरक्षा और रक्षा साझेदारी पर भी हस्ताक्षर किए गए, जो समुद्री सुरक्षा, साइबर, आतंकवाद-रोधी और रक्षा औद्योगिक सहयोग को मजबूत करेगी।
जल और ऊर्जा: जल शक्ति मंत्रालय और नीदरलैंड के इंफ्रास्ट्रक्चर व जल प्रबंधन मंत्रालय के बीच गुजरात के कल्पसर प्रोजेक्ट के लिए तकनीकी सहयोग हेतु संयुक्त आशय पत्र पर हस्ताक्षर हुए। ग्रीन हाइड्रोजन सहयोग पर भारत-नीदरलैंड रोडमैप और नवीकरणीय ऊर्जा में MOU के तहत संयुक्त कार्यदल की स्थापना की घोषणा भी हुई। नीति आयोग और नीदरलैंड के बीच ऊर्जा परिवर्तन परियोजनाओं पर संयुक्त आशय पत्र पर भी हस्ताक्षर हुए।
कृषि और स्वास्थ्य: पश्चिम त्रिपुरा में फूलों के लिए इंडो-डच सेंटर ऑफ एक्सीलेंस और बेंगलुरु में डेयरी प्रशिक्षण केंद्र की स्थापना पर सहमति बनी। स्वास्थ्य क्षेत्र में भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) और नीदरलैंड के RIVM के बीच सहयोग पर आशय पत्र हस्ताक्षरित हुआ।
शिक्षा: नालंदा विश्वविद्यालय और यूनिवर्सिटी ऑफ ग्रोनिंगन के बीच अकादमिक सहयोग पर MOU, तथा लेडेन यूनिवर्सिटी लाइब्रेरीज और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के बीच MOU पर हस्ताक्षर हुए। उच्च शिक्षा सहयोग और कस्टम मामलों में आपसी प्रशासनिक सहायता पर भी समझौते हुए।
वैश्विक मंचों पर साझा रुख
दोनों नेताओं ने लोकतंत्र, मानवाधिकार और संयुक्त राष्ट्र चार्टर के सिद्धांतों के प्रति प्रतिबद्धता दोहराई। दोनों सरकारों ने यूएन सुरक्षा परिषद की स्थायी और अस्थायी दोनों श्रेणियों में सदस्यता विस्तार सहित बहुपक्षीय सुधारों का आह्वान किया। प्रधानमंत्री मोदी ने सुधरी हुई UNSC में भारत की स्थायी सदस्यता के लिए प्रधानमंत्री जेटन के निरंतर समर्थन के लिए आभार व्यक्त किया।
पीएम जेटन ने नीदरलैंड के इंडो-पैसिफिक ओशन्स इनिशिएटिव (IPOI) में शामिल होने और जर्मनी तथा यूरोपीय संघ के साथ क्षमता निर्माण और संसाधन साझाकरण स्तंभ का सह-नेतृत्व करने की घोषणा की। दोनों नेताओं ने जनवरी 2026 में पूर्ण हुई भारत-EU मुक्त व्यापार समझौता वार्ता का भी स्वागत किया।
आगे की राह
रणनीतिक साझेदारी रोडमैप के तहत नीति नियोजन में सहयोग की संभावनाएं तलाशने पर भी सहमति बनी है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह साझेदारी भारत के लिए यूरोप में तकनीकी और औद्योगिक सहयोग का एक नया द्वार खोलती है, विशेषकर सेमीकंडक्टर और हरित ऊर्जा के क्षेत्र में। संयुक्त कार्यदलों की बैठकें और क्षेत्रीय दिशानिर्देश आने वाले महीनों में अपेक्षित हैं।