तमिलनाडु कैबिनेट विस्तार: 20 से अधिक विभाग बिना मंत्री, कांग्रेस को 2 पद मिलने की संभावना
सारांश
मुख्य बातें
तमिलनाडु में मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के नेतृत्व वाली नई सरकार में कृषि, राजस्व, वन, परिवहन, उच्च शिक्षा और सूचना प्रौद्योगिकी सहित 20 से अधिक अहम विभाग अभी भी बिना मंत्री के हैं, जिससे जल्द कैबिनेट विस्तार की अटकलें तेज हो गई हैं। 17 मई 2026 तक मुख्यमंत्री सहित केवल 10 मंत्री ही शपथ ले चुके हैं, जबकि संवैधानिक सीमा के अनुसार 25 और मंत्री नियुक्त किए जा सकते हैं।
मौजूदा कैबिनेट की स्थिति
फिलहाल मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने गृह और पुलिस से जुड़े विभाग अपने पास रखे हैं। एन. आनंद को ग्रामीण विकास, आधव अर्जुन को लोक निर्माण, के.जी. अरुणराज को स्वास्थ्य और के.ए. सेंगोत्तैयन को वित्त विभाग सौंपा गया है। इस प्रकार सरकार का प्रारंभिक ढाँचा तैयार हो चुका है, लेकिन प्रशासनिक तंत्र अभी भी अधूरा है।
कितने विभाग हैं बिना मंत्री के
सरकारी सूत्रों के अनुसार अभी भी वन, कृषि, राजस्व, आवास, सहकारिता, सूक्ष्म-लघु-मध्यम उद्यम (MSME), समाज कल्याण, मत्स्य पालन, पशुपालन, डेयरी विकास, पर्यटन, हथकरघा, वाणिज्यिक कर, परिवहन, हिंदू धार्मिक एवं धर्मार्थ बंदोबस्ती, उच्च शिक्षा, सूचना प्रौद्योगिकी, अल्पसंख्यक कल्याण, श्रम कल्याण, द्रविड़ कल्याण और मानव संसाधन प्रबंधन विभागों में मंत्री नियुक्त नहीं हुए हैं। यह ऐसे समय में आया है जब नई सरकार अपना प्रशासनिक कामकाज संभाल रही है और नीतिगत निर्णयों पर दबाव बढ़ रहा है।
संवैधानिक प्रावधान और गुंजाइश
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 164(1ए) के तहत किसी राज्य की मंत्रिपरिषद में मुख्यमंत्री सहित मंत्रियों की संख्या विधानसभा की कुल सदस्य संख्या के 15 प्रतिशत से अधिक नहीं हो सकती। तमिलनाडु विधानसभा में कुल 234 सदस्य हैं, इसलिए अधिकतम 35 मंत्री नियुक्त किए जा सकते हैं। वर्तमान में 10 पद भरे हैं, यानी अभी 25 और पदों पर नियुक्ति संभव है।
गठबंधन की राजनीति और कांग्रेस की भूमिका
सूत्रों के मुताबिक, सत्ताधारी गठबंधन को समर्थन देने वाली भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस / INC) को संभावित कैबिनेट विस्तार में दो मंत्री पद मिल सकते हैं। हालाँकि, कुछ अन्य सहयोगी दलों के कैबिनेट में प्रतिनिधित्व पाने की संभावना कम बताई जा रही है। गठबंधन के भीतर प्रतिनिधित्व को लेकर राजनीतिक चर्चाएं पहले ही शुरू हो चुकी हैं।
आगे क्या होगा
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बचे हुए विभागों का बंटवारा कैबिनेट विस्तार के अगले चरण में होगा, जिसमें गठबंधन के साथियों को भी प्रतिनिधित्व दिया जा सकता है। गौरतलब है कि जब तक इन विभागों में मंत्री नियुक्त नहीं होते, तब तक नीतिगत निर्णय और प्रशासनिक कार्यवाही में देरी की आशंका बनी रहेगी। विजय सरकार के अगले कदम पर सभी की नज़रें टिकी हैं।