भारत-नीदरलैंड 'रणनीतिक साझेदारी': मोदी-जेटन वार्ता में टाटा-ASML सेमीकंडक्टर डील, रक्षा व जल सहयोग पर बड़े फैसले
सारांश
मुख्य बातें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और नीदरलैंड के प्रधानमंत्री रॉब जेटन ने 17 मई 2025 को द हेग में डेलिगेशन-स्तर की वार्ता के बाद द्विपक्षीय संबंध को औपचारिक रूप से 'रणनीतिक साझेदारी' तक उन्नत करने का निर्णय लिया। विदेश मंत्रालय के अनुसार, इस बैठक में सेमीकंडक्टर, रक्षा औद्योगिक सहयोग, जल प्रबंधन, ग्रीन हाइड्रोजन और सांस्कृतिक विरासत सहित कई क्षेत्रों में ठोस समझौते हुए। यह वार्ता 'विकसित भारत 2047' के लक्ष्य की दिशा में भारत के वैश्विक साझेदारी विस्तार का हिस्सा है।
टाटा-ASML समझौता: सेमीकंडक्टर क्षेत्र में ऐतिहासिक कदम
बैठक का सबसे महत्वपूर्ण परिणाम रहा टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स और डच सेमीकंडक्टर दिग्गज ASML के बीच साझेदारी समझौते पर हस्ताक्षर। विदेश सचिव (पश्चिम) सिबी जॉर्ज ने इसे 'गेम-चेंजिंग एग्रीमेंट' बताते हुए कहा कि यह धोलेरा में सेमीकंडक्टर सुविधा को समर्थन देगा और भारत में हाई-स्किल्ड रोज़गार सृजन को गति देगा। गौरतलब है कि ASML विश्व की एकमात्र कंपनी है जो अत्याधुनिक EUV लिथोग्राफी मशीनें बनाती है — जो आधुनिक चिप निर्माण की रीढ़ है।
दोनों प्रधानमंत्रियों ने इस समझौते पर हस्ताक्षर समारोह में व्यक्तिगत रूप से भाग लिया। सिबी जॉर्ज ने कहा कि यह भारत में एक मज़बूत सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम बनाने की कोशिशों को 'मज़बूत समर्थन' देगा।
रक्षा और इंडो-पैसिफिक सहयोग
दोनों देशों ने रक्षा औद्योगिक सहयोग को और गहरा करने पर सहमति जताई। विदेश सचिव के अनुसार, पिछले वर्ष हस्ताक्षरित रक्षा सहयोग आशय पत्र को आगे बढ़ाने पर चर्चा हुई। इसके अलावा, नीदरलैंड के इंडो-पैसिफिक ओशन्स इनिशिएटिव (IPOI) में शामिल होने को भी इस वार्ता का अहम हिस्सा बताया गया।
सिबी जॉर्ज ने कहा कि IPOI 'एक बहुत ज़रूरी पहल है जो बढ़ रही है और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में साझेदारी बना रही है।' नीदरलैंड का इसमें जुड़ना यूरोपीय देशों की इस क्षेत्र में बढ़ती भागीदारी को दर्शाता है।
जल प्रबंधन और कल्पसार परियोजना
जल क्षेत्र में भारत और नीदरलैंड के बीच पहले से मौजूद रणनीतिक साझेदारी को और विस्तार देने पर सहमति बनी। सिबी जॉर्ज ने बताया कि कल्पसार प्रोजेक्ट और नीदरलैंड के उत्तर में डाइक निर्माण के बीच तकनीकी समानताएँ हैं। दोनों प्रधानमंत्री अगले दिन इस परियोजना स्थल का दौरा करने वाले थे।
डच विशेषज्ञता — विशेषकर डेल्टा प्रबंधन और बाढ़ नियंत्रण में — भारत के लिए अत्यंत प्रासंगिक है, जहाँ जलवायु परिवर्तन के कारण तटीय और नदी बाढ़ की चुनौतियाँ बढ़ रही हैं।
व्यापार, प्रौद्योगिकी और टैलेंट साझेदारी
सीईओ राउंडटेबल में नीदरलैंड के 16 शीर्ष सीईओ ने भाग लिया, जो सेमीकंडक्टर, मैरीटाइम, नवीकरणीय ऊर्जा, स्वास्थ्य सेवा और लॉजिस्टिक्स क्षेत्रों से जुड़े थे। वार्ता में ग्रीन हाइड्रोजन, रोबोटिक्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, स्टार्ट-अप सहयोग, और भारतीय-डच बंदरगाहों के बीच संपर्क जैसे विषयों पर भी चर्चा हुई।
सिबी जॉर्ज ने कहा कि 'भारत को एक टैलेंट इंजन के तौर पर देखा जाता है' और टैलेंट पार्टनरशिप, ग्लोबल मोबिलिटी और कौशल विकास पर भी सहमति बनी। भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते को दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग के लिए एक बड़े अवसर के रूप में रेखांकित किया गया।
सांस्कृतिक विरासत की वापसी
नीदरलैंड ने भारत को ताँबे की पट्टिकाओं के दो सेट — 21 बड़ी और 3 छोटी — लौटाने की घोषणा की, जिन पर सम्राट राजेंद्र चोल प्रथम और कुलोथुंगा चोल प्रथम के राजकीय आदेश अंकित हैं। विदेश सचिव ने इसे प्रधानमंत्री मोदी के 'विकास भी विरासत भी' विज़न के अनुरूप बताया।
यह सांस्कृतिक पुनर्प्राप्ति उस व्यापक कूटनीतिक प्रयास का हिस्सा है जिसके तहत भारत विश्व के विभिन्न देशों से अपनी ऐतिहासिक धरोहरें वापस ला रहा है। प्रधानमंत्री मोदी ने एक्स पर लिखा कि ये नतीजे 'भारत और नीदरलैंड के बीच दोस्ती को बेमिसाल रफ्तार देंगे।'