मोदी-जेटन वार्ता: होर्मुज संकट, पश्चिम एशिया युद्धविराम और भारत-नीदरलैंड रणनीतिक साझेदारी पर बड़े फैसले
सारांश
मुख्य बातें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 17 मई 2026 को द हेग में नीदरलैंड के प्रधानमंत्री रॉब जेटन के साथ व्यापक द्विपक्षीय वार्ता की, जिसके बाद दोनों देशों ने अपने संबंधों को रणनीतिक साझेदारी में बदलने का ऐतिहासिक निर्णय लिया। इस बैठक में होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने से उत्पन्न ऊर्जा संकट, पश्चिम एशिया संघर्ष को समाप्त करने की आवश्यकता, और तकनीक से लेकर रक्षा तक 14 समझौतों पर हस्ताक्षर जैसे अहम मुद्दे शामिल रहे।
होर्मुज संकट और पश्चिम एशिया पर साझा चिंता
प्रधानमंत्री जेटन ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर अपनी पोस्ट में कहा कि दोनों नेताओं के बीच होर्मुज स्ट्रेट के बंद होने पर विस्तृत चर्चा हुई, जिससे वैश्विक ऊर्जा कीमतें तेज़ी से बढ़ी हैं। उन्होंने लिखा, 'भारत और नीदरलैंड दोनों ही लोकतांत्रिक, सुशासन और नियमों व न्याय पर आधारित विश्व व्यवस्था को बहुत महत्व देते हैं।' जेटन ने स्पष्ट किया कि नीदरलैंड की तरह भारत पर भी इस संकट का गहरा आर्थिक प्रभाव पड़ा है और इसलिए इस झगड़े का निश्चित समाधान ज़रूरी है।
यह चर्चा ऐसे समय में हुई जब पश्चिम एशिया में तनाव के कारण वैश्विक तेल आपूर्ति श्रृंखला बाधित है और कई देश ऊर्जा सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं। गौरतलब है कि होर्मुज जलडमरूमध्य से दुनिया का लगभग 20% तेल गुज़रता है, और इसका बंद होना भारत जैसी उभरती अर्थव्यवस्थाओं के लिए विशेष रूप से संवेदनशील है।
इंसिया अपहरण मामला: अंतर्राष्ट्रीय एजेंडे पर बच्ची की वापसी
जेटन ने अपनी पोस्ट में इंसिया के मामले का भी उल्लेख किया — एक तीन वर्षीय बच्ची, जिसे उसके जैविक पिता ने सितंबर 2016 में नीदरलैंड से जर्मनी और फिर अवैध रूप से भारत लाया था। बॉम्बे उच्च न्यायालय ने बच्ची को उसकी माँ को सौंपने का आदेश दिया था, लेकिन पिता के असहयोग के कारण यह मामला अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अनसुलझा बना हुआ है। दोनों प्रधानमंत्रियों ने इस मामले पर भी बातचीत की और इसे राजनयिक स्तर पर हल करने की दिशा में प्रयासों की पुष्टि की।
रक्षा, तकनीक और आर्थिक सहयोग के नए आयाम
प्रधानमंत्री मोदी ने एक्स पर अपनी पोस्ट में बताया कि जेटन के साथ उनकी बातचीत में रक्षा और सुरक्षा, अंतरिक्ष यात्रा, समुद्री प्रणाली और समुद्री सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में मिलकर काम करने की संभावनाएँ तलाशी गईं। उन्होंने रक्षा उद्योग के लिए शीघ्र एक्शन प्लान बनाने पर भी ज़ोर दिया।
आर्थिक सहयोग के संदर्भ में मोदी ने कहा कि भारत-यूरोपीय संघ (EU) मुक्त व्यापार समझौता (FTA) दोनों देशों के लिए अपार अवसर प्रदान करता है। उन्होंने फिनटेक, ज़रूरी खनिज, सेमीकंडक्टर, ग्रीन हाइड्रोजन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जैसे क्षेत्रों में सहयोग की विशेष संभावनाएँ रेखांकित कीं।
एक महत्वपूर्ण घोषणा में ASML और टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स ने सेमीकंडक्टर क्षेत्र में करीबी सहयोग के लिए एक संयुक्त घोषणापत्र पर हस्ताक्षर किए। जेटन ने इसे भारत-EU के बीच इस वर्ष की शुरुआत में हुए ऐतिहासिक व्यापार समझौते की अगली कड़ी बताया।
14 समझौते और रणनीतिक रोडमैप
आधिकारिक वार्ता के बाद तकनीक, ग्रीन एनर्जी, व्यापार, गतिशीलता, जल प्रबंधन, शिक्षा और संस्कृति सहित विभिन्न क्षेत्रों में 14 समझौतों और MoU पर हस्ताक्षर हुए। डिफेंस सहयोग, नई तकनीक एवं नवाचार, हेल्थकेयर और जल प्रबंधन पर लेटर ऑफ इंटेंट भी साइन किए गए।
दोनों देशों ने एक संयुक्त वक्तव्य और रणनीतिक साझेदारी रोडमैप को औपचारिक रूप से अपनाया। विदेश मंत्रालय के अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी का यह दौरा दोनों देशों के संबंधों में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। मोदी ने जेटन को भारत आने का निमंत्रण दिया, जिसे उन्होंने स्वीकार कर लिया।
आगे की राह
रणनीतिक साझेदारी की यह नई रूपरेखा भारत-नीदरलैंड संबंधों को एक नए स्तर पर ले जाती है। साझा लोकतांत्रिक मूल्यों और बहुआयामी सहयोग पर आधारित यह साझेदारी ऐसे समय में और भी अहम हो जाती है जब वैश्विक अनिश्चितता बढ़ रही है। जेटन की भारत यात्रा की तारीख़ों की घोषणा जल्द होने की उम्मीद है, जो इस रोडमैप को अमल में लाने की दिशा में अगला कदम होगा।